एयर इंडिया हादसे पर बड़ा खुलासा, पायलट की बातें नहीं होंगी सार्वजनिक
अहमदाबाद एयर इंडिया विमान हादसे की जांच के बीच AAIB ने स्पष्ट किया है कि पायलट... और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर की बातचीत...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः अहमदाबाद में पिछले वर्ष 12 जून को हुए एयर इंडिया विमान हादसे की जांच से जुड़ी एक बड़ी.. और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है.. विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया है कि इस हादसे की जांच से जुड़े कई संवेदनशील रिकॉर्ड, विशेष रूप से कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग, सार्वजनिक नहीं किए जा सकते.. ब्यूरो का कहना है कि मौजूदा कानून इसकी अनुमति नहीं देता.. और ऐसा करना जांच प्रक्रिया के उद्देश्य के विपरीत होगा.. साथ ही AAIB ने अदालत को यह भी बताया है कि इस हादसे की ड्राफ्ट फाइनल जांच रिपोर्ट अक्टूबर 2026 तक तैयार होने की उम्मीद है..
वहीं इस मामले में दाखिल अपने विस्तृत हलफनामे में AAIB ने कहा है कि विमान दुर्घटना की जांच के दौरान एकत्र किए गए कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, रिकॉर्डिंग.. और अन्य साक्ष्य बेहद संवेदनशील प्रकृति के होते हैं.. इसलिए उन्हें किसी बाहरी समिति, संस्था या आम जनता के साथ साझा नहीं किया जा सकता.. ब्यूरो के अनुसार दुर्घटना की निष्पक्ष.. और प्रभावी जांच सुनिश्चित करने के लिए इन दस्तावेजों की गोपनीयता बनाए रखना आवश्यक है..
AAIB ने साफ किया कि जिन रिकॉर्ड्स को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता.. उनमें सबसे प्रमुख है कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग.. इसके अलावा विमान के अंदर की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग.. जांच के दौरान गवाहों के दिए गए बयान, पायलट, एयरलाइन अधिकारियों.. और अन्य कर्मचारियों के बीच हुई बातचीत.. एयर ट्रैफिक कंट्रोल की रिकॉर्डिंग, साथ ही हादसे में जान गंवाने वाले लोगों.. और घायलों से जुड़ी निजी एवं मेडिकल जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की जाएगी..
ब्यूरो ने अपने हलफनामे में कहा कि विमान दुर्घटना जांच नियम.. 2025 के नियम 17(5) के तहत कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग.. और विमान के भीतर की रिकॉर्डिंग को सार्वजनिक करने पर स्पष्ट कानूनी रोक है.. यह प्रावधान इसलिए बनाया गया है.. ताकि दुर्घटना की जांच पूरी निष्पक्षता और गोपनीयता के साथ की जा सके..
AAIB का कहना है कि यदि गवाहों, पायलटों, एयरलाइन कर्मचारियों या विमान संचालन से जुड़े अन्य लोगों को यह आशंका होगी कि उनके बयान या बातचीत बाद में सार्वजनिक कर दी जाएगी.. तो वे जांच एजेंसियों के सामने खुलकर अपनी बात रखने से बचेंगे.. इससे जांच प्रभावित होगी और दुर्घटना के वास्तविक कारणों तक पहुंचना कठिन हो जाएगा.. ब्यूरो ने कहा कि विमान दुर्घटना जांच का मुख्य उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं.. बल्कि दुर्घटना के कारणों का पता लगाना.. और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय सुझाना होता है..
AAIB ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि यह जांच केवल भारतीय कानूनों के तहत नहीं.. बल्कि अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के एनेक्स-13 और शिकागो कन्वेंशन के दिशा-निर्देशों के अनुसार भी की जा रही है.. अंतरराष्ट्रीय विमान दुर्घटनाओं की जांच के लिए यही वैश्विक मानक लागू होते हैं.. ब्यूरो ने कहा कि इस तरह की जांच में केवल भारत ही नहीं.. बल्कि विमान बनाने वाले देश, विमान के इंजन निर्माता, संबंधित एयरलाइन.. और अन्य संबद्ध देशों की जांच एजेंसियां भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत शामिल होती हैं.. इसलिए जांच से जुड़े सभी दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स की गोपनीयता बनाए रखना अंतरराष्ट्रीय नियमों का भी हिस्सा है..
AAIB ने अदालत को यह भी स्पष्ट किया कि उसकी जांच किसी पायलट, क्रू मेंबर, एयरलाइन अधिकारी या किसी अन्य व्यक्ति की आपराधिक या व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करने के लिए नहीं होती.. जांच का उद्देश्य केवल यह समझना होता है कि दुर्घटना किन कारणों से हुई.. और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए किन सुरक्षा सुधारों की आवश्यकता है..
हलफनामे में यह भी बताया गया है कि जांच का अधिकांश तकनीकी कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है.. ब्यूरो के अनुसार अगले लगभग छह सप्ताह के भीतर शेष जांच प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है.. इसके बाद जुटाए गए सभी साक्ष्यों, तकनीकी आंकड़ों.. और रिकॉर्ड्स का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा.. विश्लेषण पूरा होने के बाद ड्राफ्ट फाइनल रिपोर्ट तैयार की जाएगी.. जिसके अक्टूबर 2026 तक प्रस्तुत किए जाने की उम्मीद है.



