उत्तर से दक्षिण तक सुलगती सियासत
दक्षिण की सियासत में स्टालिन की गिरफ्तारी पर हंगामा

- यूपी में यूरिया पर सियासत अखिलेश यादव का योगी सरकार पर वार
- सपा विधायक सचिन यादव को सीएम को पोस्टर दिखाना पड़ा भारी सत्र से निष्कासित
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। लगता है कि देश की राजनीति अब उस मोड़ पर पहुंच गई है जहां सदन से सड़क तक की लड़ाई अब विचारों की नहीं विरोध के तरीके और उस पर होने वाली कार्रवाई की बनती जा रही है। क्या विपक्ष की हर आवाज को कानून व्यवस्था के चश्मे से देखा जा रहा है या फिर सरकारें केवल नियमों का पालन करा रही हैं। यह सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि उत्तर से दक्षिण तक दो अलग अलग राज्यों में हुई घटनाओं ने लोकतंत्र विपक्ष की भूमिका और सत्ता के रवैये पर नयी बहस छेड़ दी है।
तमिलनाडु में स्टालिन यूपी में सचिन
दक्षिण में तमिलनाडु की राजनीति उबाल पर है। डीएमके नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने किसानों के मुद््दों और अन्य वास्तविक समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए उन्हें गिरफ्तार कराया। उन्होंने यह भी कहा कि उनके साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार किया गया। सरकार की ओर से कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है लेकिन विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में पेश कर रहा है। ऐसा ही कुछ यूपी में चल रहे विधानसभा सत्र में भी देखेने को मिल रहा है जहां विपक्ष और सत्ता आमने सामने दिखाई दिए। समाजवादी पार्टी के विधायक सचिन यादव को सदन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर दिखाकर विरोध करने पर पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया। सत्ता पक्ष का तर्क है कि सदन की गरिमा बनाए रखना जरूरी है जबकि विपक्ष इसे लोकतांत्रिक विरोध की आवाज दबाने की कार्रवाई बता रहा है।
असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए सरकार ने मुझे गिरफ्तार कराया : उदयनिधि स्टालिन
तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन ने पुलिस की गिरफ्त से रिहा होने के बाद मुख्यमंत्री सी. विजय जोसेफ पर हमला बोला है। उदयनिधि ने दावा किया है कि टीवीके सरकार ने असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए मुझे गिरफ्तार कराया और उनके साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार किया गया। उदयनिधि स्टालिन से तंजावुर जिले के सेंगिपट्टी पुलिस स्टेशन में पूछताछ की गई। पूछताछ के बाद देर रात उदयनिधि को बेल पर रिहा कर दिया गया। डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने एक्स पर पोस्ट में लिखा है कि किसानों की समस्याएं दूर करने में नाकाम सोफा सरकार असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए मुझे गिरफ्तार कर रही है। मुख्यमंत्री ने मेरे खिलाफ बदनामी फैलाने के लिए सत्ताधारी पार्टी का इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि तंजावुर विरोध प्रदर्शन के दौरान मैंने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था। उन्होंने झूठे मामले दर्ज करवाकर और मुझे चेन्नई से तंजावुर के बीच बार-बार चक्कर लगवाकर किसी को खुश करने की कोशिश की है। उदयनिधि ने कहा कि अगर किसानों के लिए लड़ते हुए गिरफ्तार होना पड़े तो मैं एक बार नहीं बल्कि सौ बार गिरफ्तार होने को तैयार हूं। मैं किसानों की भलाई के लिए न सिर्फ 300 किलोमीटर बल्कि 3,000 किलोमीटर से भी ज्यादा पैदल मार्च करने को तैयार हूं। यह मुझे रोक नहीं पाएगा मैं उन नेताओं का शुक्रिया अदा करता हूं जिन्होंने मेरी गिरफ्तारी की निंदा की।
खाद के लिए कतार में किसान दोगुनी लाइन में लगकर भाजपा के खिलाफ वोट देंगे : अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गोंडा में खाद के लिए लंबी कतारों में खड़े किसानों का वीडियो साझा करते हुए भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि जिन किसानों को आज खाद के लिए लाइन में लगना पड़ रहा है वही अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ इससे भी लंबी कतार लगाकर उसे सत्ता से बाहर कर देंगे। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के कारण किसान परेशान हैं तथा कहा कि देश के सामने सबसे बड़ा संकट भाजपा है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक वीडियो जारी करते हुए लिखा कि भरी बरसात में उप्र के गोंडा में खाद लेने के लिए लगी लाइन में लगे किसान कह रहे हैं कि अगले चुनाव में इससे दोगुनी लाइन भाजपा के विरुद्ध वोट डालने के लिए लगेगी जिससे भाजपा हमेशा के लिए बाहर हो जाएगी। जब खेत मुस्कुराएगा तब देश मुस्कुराएगा। इसके पहले उन्होंने एक अन्य पोस्ट में लिखा कि भाजपाई भ्रष्टाचार का नाला जब तक बहता रहेगा कुछ भी नहीं बदलेगा। देश में सिर्फ एक संकट है और वह है भाजपा। भाजपा जाए तो सब सुधर जाए।
सिर्फ दो राज्यों की तस्वीर नहीं
इन घटनाओं को एक साथ देखने पर बहस सिर्फ दो राज्यों तक सीमित नहीं रहती। सवाल यह है कि क्या भारतीय लोकतंत्र में राजनीतिक असहमति का स्वर पहले से अधिक टकरावपूर्ण होता जा रहा है? क्या विपक्ष अपने विरोध को जनांदोलन का रूप देना चाहता है या सरकारें कानून और संस्थागत अनुशासन को प्राथमिकता दे रही हैं? इन सवालों के जवाब राजनीतिक दल अपने अपने नजरिए से दे रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि तमिलनाडु में यह सब ऐसे समय हो रहा है जब नई सरकार अपना पहला बजट पेश करने जा रही है। यानी विकास वित्तीय प्राथमिकताओं और शासन की चर्चा के समानांतर राजनीतिक टकराव भी सुर्खियों में है। उप्र में भी विस का सत्र और 27 की चुनावी तैयारियां राजनीतिक तापमान को लगातार बढ़ा रही हैं। ऐसे में यह सिर्फ दो राज्यों की कहानी नहीं रह जाती। यह उस बदलते राजनीतिक माहौल की कहानी है जहां सत्ता और विपक्ष के बीच हर टकराव अब केवल सदन की बहस नहीं बल्कि पूरे देश की बहस बनता जा रहा है। सवाल यही है कि क्या लोकतंत्र का तापमान बढ़ रहा है या राजनीति का पारा?
‘सदन की गरिमा बनाए रखना जरूरी’
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सपा विधायक सचिन यादव के सत्र निष्कासन पर कहा है कि उनका व्यवहार बहुत दुर्भाग्यपूर्ण था। मैं उनकी सभी चिंताओं को सुनने के लिए पूरी तरह तैयार था। मैंने उन्हें हर मुद्दा उठाने के लिए कहने में लगभग दो घंटे बिताए। सदन की गरिमा और मर्यादा बनाए रखते हुए मैंने उनके सामने हाथ भी जोड़े। अगर कोई अपनी बात नहीं रखना चाहता विधानसभा सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सहयोग से चलती है। विपक्ष सहयोग नहीं करेगा तो विधानसभा नहीं चल पाएगी। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष के पास मुद्दा हो तो उस पर चर्चा की जा सकती है। सिर्फ शोर शराबा करने से सदन नहीं चल सकता है। दो घंटे से अधिक समय तक मैंने लगातार बहुत प्रयास किए। इसके बावजूद मैं चाहता हूं कि विधानसभा का सत्र अच्छे तरीके से चले। विधानसभा सत्र से निष्कासित सपा विधायक सचिन यादव को लेकर स्पीकर सतीश महाना ने कहा कि मुझे उम्मीद थी कि सचिन यादव एक पढ़े-लिखे व्यक्ति होने के नाते कई अन्य सम्मानित विधायकों की तुलना में बेहतर व्यवहार करेंगे। लेकिन मुझे बहुत निराशा हुई। उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि सचिन यादव जैसे विधायक से मैं ऐसी अपेक्षा नहीं करता था। उनके आचरण से मुझे आत्मगिलानी हुई कि मेरी जो उपेक्षाएं थीं उनका आचरण बिल्कुल विपरीत था।




