राहुल गांधी केस में बड़ा ट्विस्ट: जस्टिस विद्यार्थी ने क्यों छोड़ा सुनवाई का साथ?
जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने राहुल गांधी के दोहरी नागरिकता मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने राहुल गांधी के दोहरी नागरिकता मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है.
कुछ दिन पहले उन्होंने राहुल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था और फिर बाद में अपने ही आदेश पर रोक लगा दी. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज इस सुनवाई से क्यों अलग हुए?
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे दोहरी नागरिकता मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है. जस्टिस विद्यार्थी ने पिछले हफ्ते राहुल के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था.
बाद में कोर्ट ने अपने ही इस आदेश पर रोक लगा दी. कोर्ट ने 17 अप्रैल को कहा था कि पहली नजर में मामला बनता दिख रहा है और राज्य सरकार चाहे तो इसे केंद्र सरकार के पास भेज सकती है. मगर बाद में उन्होंने खुद अपना आदेश रोक दिया.
कोर्ट ने ये भी कहा कि पुलिस को ऐसा कोई भी निर्देश देने से पहले यह सोचना चाहिए कि क्या इस मामले में राहुल गांधी का पक्ष सुना जाना चाहिए या नहीं. वहीं, अब जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने खुद इस केस की सुनवाई से हटने का फैसला किया है.
मतलब अब कोई अन्य बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी. यह मामला राहुल गांधी पर ब्रिटेन का पासपोर्ट रखने के आरोपों से जुड़ा है, जिसमें उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई थी. ऐसे में सबसे सवाल यही है कि जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग क्यों क्या?
सुनवाई से क्यों अलग हुए जज?
कोर्ट ने याचिकाकर्ता एस विग्नेश शिशिर की सोशल मीडिया पोस्ट्स पर नाराजगी जताई है. जस्टिस विद्यार्थी ने कहा कि याचिकाकर्ता ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया था कि अभी तक कोर्ट ने आदेश को वेबसाइट पर अपलोड क्यों नहीं किया है जबकि आदेश अपलोड न होने का वाजिब कारण रिकॉर्ड में दर्ज है, लेकिन याचिकाकर्ता के पोस्ट से ऐसा लग रहा है जैसे वह कोर्ट की नीयत पर शक कर रहा है और ऐसा लगा रहा कि उसका न्यायपालिका से भरोसा उठ गया है.
जस्टिस विद्यार्थी ने इस बात पर भी आपत्ति की कि याचिकाकर्ता ने सोशल मीडिया पर लोगों से सलाह मांगी कि क्या उसे अदालत से राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से पेश करने की मांग करनी चाहिए या नहीं.
कोर्ट का मानना है कि याचिकाकर्ता कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के बजाय सोशल मीडिया पर अदालत की आलोचना कर रहा है और केस से जुड़े फैसलों पर जनता की राय ले रहा है, जो कि गलत है.
उन्होंने आगे कहा कि याचिकाकर्ता के सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट से जो संकेत मिलता है कि उसने पहले कोर्ट पर आरोप लगाए हैं.
इसके बाद उसने इस संबंध में जनमत मांगा है कि क्या उसे इस मामले को इस अदालत के समक्ष आगे बढ़ाना चाहिए इसलिए इस मामले की आगे सुनवाई करना उचित नहीं होगा. जस्टिस विद्यार्थी ने कहा कि अदालतें वादियों की राय से प्रभावित नहीं होतीं.
क्या है पूरा मामला?
कर्नाटक में रहने वाले एस. विग्नेश शिशिर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. उन्होंने राहुल गांधी पर भारतीय न्याय संहिता, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम के तहत गंभीर आरोप लगाए हैं.
शिशिर का दावा है कि राहुल गांधी ब्रिटेन की एक कंपनी ‘बैकॉप्स लिमिटेड’ में डायरेक्टर थे और वहां के सरकारी दस्तावेजों में उन्होंने खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया था.
उन्होंने कहा कि अगर राहुल ने विदेशी नागरिकता ली है तो उनकी भारतीय नागरिकता खत्म होनी चाहिए. विग्नेश शिशिर ने पुलिस से राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की थी.
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने याचिका को संज्ञान में लेते हुए शुक्रवार को राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था. इस दौरान जस्टिस विद्यार्थी ने कहा था कि FIR दर्ज करके मामले को CBI को ट्रांसफर किया जाए. बाद में उन्होंने अपने ही आदेश पर रोक लगा दी और फिर सुनवाई से भी हटने का फैसला किया.



