राजनीति में बड़ा उलटफेर, Shinde को मात देने के लिए BJP-Congress आए साथ!

भाजपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन हो गया है......अरे घबराइए या गुस्साइए मत....ये कोई झूठी खबर नहीं है....न ही कोई Propaganda...माना की सुनने में थोड़ा अजीब लग रहा होगा कि भाजपा और कांग्रेस के बीच में कैसे गठबंधन हो सकता है?.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन हो गया है……अरे घबराइए या गुस्साइए मत….ये कोई झूठी खबर नहीं है….न ही कोई Propaganda…माना की सुनने में थोड़ा अजीब लग रहा होगा कि भाजपा और कांग्रेस के बीच में कैसे गठबंधन हो सकता है?.

..जिसमें साफ-साफ लिखा है कि बीजेपी-कांग्रेस ने कर लिया गठबंधन….और इस खबर के सामने आते ही देश की राजनीति में हंगामा मच गया है…तो भाजपा और कांग्रेस ने गठबंधन क्यों किया?….इसके पीछे की वजह क्या है?….और आखिर देश की राजनीति में इतना बड़ा फेरबदल कैसे हुआ..

कहते हैं कि राजनीति में कब क्या हो जाए…कुछ कहा नहीं जा सकता…कब एक दूसरे की थाली में खाना खाने वाले….एक दूसरे के धुर विरोधी बन जाएं….और कब एक दूसरे के धुर विरोधी कहे जाने वाले….एक दूसरे के सगे बन जाएं…..ये कोई भी प्रिडिक्ट नहीं कर सकता…ऐसे बहुत से राजनीतिक फेरबदल हम सबने कई बार देखे हैं…बिहार और झारखंड तो इसका जीता-जागता सबूत है…जहां अगर हम बात सीएम नीतीश कुमार की करें…तो सीएम नीतीश ने कई बार दल-बदले….

झारखंड में बाबूलाल मरांडी तो आपको याद ही होंगे…जो कहते थें कि कुतुबमीनार से कूदना पसंद करूंगा…लेकिन भाजपा में जाना नहीं…लेकिन, आज वो झारखंड में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने बैठे हैं……….हालांकि, इन दोनों ही सियासी घटनाक्रमों से तो आप बखूबी वाकीफ होंगे…लेकिन, अगर मैं ये कहूं कि देश की सियासत के दो टक्कर के विरोधी दल यानी… भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस साथ आ जाएं और मिलकर सरकार बना लें…..तो आप क्या कहना होगा?………..बेशक आप कहेंगे कि ये Possilbe ही नहीं है….ये तो हो ही नहीं सकता…….लेकिन अगर मैं कहूं कि ऐसा हुआ है, तो?…….

जिस कांग्रेस को भाजपा ने देश विरोधी और न जाने क्या क्या कह कर हमेशा…निशाने पर लिया…आज उसी कांग्रेस के साथ भारतीय जनता पार्टी ने हाथ मिला लिया है…गठबंधन कर लिया है….सुनकर झटका लगा ना?….लेकिन ये सच है…..जिस कांग्रेस को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से लेकर भाजपा के न जाने कितने नेता कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते थें…और ये वही कांग्रेस है…जिसे बीजेपी भ्रष्टाचार, वंशवाद और नकारात्मक राजनीति का प्रतीक बताती रही है……..उसी भाजपा का…कांग्रेस से गठबंधन करना किसी को भी हजम नहीं हो रहा है…….यानी कि जो कभी भी नहीं हुआ….इतिहास तक गवाह है जिस चीज के लिए…लेकिन अब वो सच हो गया है…जिसपर यकीन कर पाना सभी के लिए मुश्किल है…

तो सबसे पहले बात करते हैं कि भाजपा और कांग्रेस ने कहां और क्यों गठबंधन किया?….ये पूरा खेल महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव से जुड़ा हुआ है…जहां ठाणे जिले की अंबरनाथ म्युनिसिपल काउंसिल में सियासी खेल ने सभा को चौंका दिया है…दरअसल, महायुति के सहयोगी और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 20 दिसंबर के चुनावों में सबसे ज्यादा 27 सीटें जीती….लेकिन 60 सदस्यों वाली इस काउंसिल में बहुमत से सिर्फ 4 सीटें पीछे रह गई थी….जहां BJP को 14….कांग्रेस को 12…अजित पवार की NCP को 4 और 2 इंडिपेंडेंट जीते थे….यानी एक तरह से बहुमत किसी के पास नहीं था….ऐसे में आमतौर पर दुश्मन मानी जाने वाली BJP और कांग्रेस ने हाथ मिलाकर शिवसेना को सत्ता से दूर करने की ऐसी रणनीति बनाई की पूरा समीकरण ही बदल गया…

इस चुनाव में शिवसेना सिंगल लार्जेस्ट पार्टी थी…लेकिन BJP ने कांग्रेस और NCP के साथ अंबरनाथ विकास अघाड़ी नाम से गठबंधन बनाया…तो उनके पास सीटों की संख्या हो गई 32 यानी बहुमत से ज्यादा और इस तरह से प्रेसिडेंट चुनाव में BJP की तेजश्री करंजुले पाटिल ने शिवसेना की मनीषा वालेकर को हरा दिया…BJP पार्षद अभिजीत करंजुले पाटिल को ग्रुप लीडर बनाया गया है….उन्होंने कहा कि ये गठबंधन शिवसेना के करप्शन और डर वाले शासन को खत्म करने के लिए है और अंबरनाथ में विकास लाने के लिए है…ये इलाका MP श्रीकांत शिंदे जोकि, एकनाथ शिंदे के बेटे हैं उनका है….जो शिवसेना का गढ़ माना जाता है…यानीकि शिंदे को किनारे लगाने के लिए बीजेपी ने अपनी धुर विरोधी कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लिया है…

भाजपा का ये फैसला शिंदे गुट के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है….क्योंकि लंबे समय से अंबरनाथ नगर परिषद पर शिवसेना का कब्जा रहा है…….वहीं अब बीजेपी-कांग्रेस गठबंधन को लेकर शिवसेना (शिंदे गुट) में गहरी नाराजगी देखने को मिली….पार्टी नेताओं ने इसे न सिर्फ अप्रत्याशित बल्कि अभद्र गठबंधन करार दिया….शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक डॉ. बालाजी किनीकर ने इस गठबंधन को शिवसेना के साथ विश्वासघात बताया….उन्होंने कहा कि…कांग्रेस मुक्त भारत की बात करने वाली बीजेपी का अंबरनाथ की सत्ता के लिए कांग्रेस के साथ गठबंधन करना शिवसेना (शिंदे) की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है…जो बीजेपी देशभर में कांग्रेस के खिलाफ राजनीति करती है…वही पार्टी सत्ता के लिए कांग्रेस के साथ समझौता कर रही है…

बीजेपी ने शिंदे गुट के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया…पार्टी के नेताओं का कहना है कि सत्ता के लिए किसी भी तरह का समझौता करना अभद्र नहीं…बल्कि व्यावहारिक राजनीति है…बीजेपी उपाध्यक्ष गुलाबराव करंजुले पाटिल ने कहा है कि…अगर पिछले 25 सालों से भ्रष्टाचार करने वाले शिंदे गुट के साथ अंबरनाथ की सत्ता में बैठते….तो वही असली अभद्र गठबंधन होता…इसके साथ ही उन्होंने ये भी दावा किया कि…अंबरनाथ नगर परिषद में महायुति के लिए शिंदे गुट से कई बार बातचीत करने की कोशिश की गई…लेकिन उनके नेताओं की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली….

यानी कि, एक ओर बीजेपी-कांग्रेस गठबंधन से अंबरनाथ नगर परिषद की सत्ता समीकरण साफ होता दिखाई दे रहा है…तो वहीं दूसरी ओर इस गठबंधन ने महायुति के भीतर तनाव बढ़ा दिया है…लेकिन, अंबरनाथ की ये घटना महायुति के भीतर गहराते तनाव को सामने लाती है….जहां राज्य की सत्ता में साथ रहने वाले सहयोगी दल स्थानीय स्तर पर एक-दूसरे के खिलाफ खड़े नजर आ रहे हैं….ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या महायुति सिर्फ सत्ता की मजबूरी है….या फिर साझा विचारधारा का गठबंधन?…..अंबरनाथ में कांग्रेस और बीजेपी का गठबंधन बताता है कि जब बात सत्ता की आती है…तो बड़े राजनीतिक दावे और गठबंधन की मर्यादाएं पीछे छूट जाती हैं…..

सोचिए, जिस कांग्रेस को बाजपा के बड़े-बड़े नेता पानी पी-पीकर कोसते थें…आरोप लगाते थें….उसी के साथ आज गठबंधन कर लिया ये दिखाता है कि भाजपा सत्ता हासिल करने के लिए कुछ भी कर सकती है…….हालांकि, सवाल सिर्फ भाजपा पर नहीं कांग्रेस पर उठता है कि आखिर एक विचारधारा को फॉलो करने वाली कांग्रेस ने ये गठबंधन कैसे कर लिया?….हालांकि, कुछ लोग से कांग्रेस की जीत बता रहे हैं कि आज विपक्ष इतना मजबूत हो गया है कि बाजपा को उनसे हाथ मिलाना पड़ रहा है….

वहीं इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा बीजेपी के दोहरे चरित्र को लेकर हो रही है…एक ओर बीजेपी राष्ट्रीय मंच पर कांग्रेस को देश की सारी समस्याओं की जड़ बताती है…वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर उसी कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता का सुख भोगने में कोई हिचक नहीं दिखाती…अबे सवाल उठता है कि क्या बीजेपी की कांग्रेस-विरोधी राजनीति सिर्फ चुनावी भाषणों तक सीमित है?….अगर कांग्रेस इतनी ही खतरनाक है…तो फिर उसके साथ सत्ता साझा करना कैसे जायज ठहराया जा सकता है?…

अंबरनाथ का मामला एक बार फिर भारतीय राजनीति के उस पुराने सच को उजागर करता है…जहां सिद्धांत अक्सर सत्ता की जरूरतों के आगे कमजोर पड़ जाते हैं….बीजेपी ने ये दिखा दिया कि जब बात राजनीतिक फायदे की हो…तो वैचारिक शुद्धता से ज्यादा अहम….सत्ता का गणित हो जाता है…यही वजह है कि विपक्षी दल और राजनीतिक विश्लेषक….बीजेपी पर अवसरवादी राजनीति का आरोप लगा रहे हैं….

अंबरनाथ में बीजेपी-कांग्रेस का ये गठबंधन आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों और यहां तक कि विधानसभा चुनावों पर भी असर डाल सकता है….साथ ही, ये बीजेपी के लिए भी एक चुनौती है कि वो अपने कांग्रेस-विरोधी नैरेटिव को आगे कैसे बनाए रखेगी…अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी-कांग्रेस गठबंधन को कोई राजनीतिक मजबूरी कहे या खुला अवसरवाद….ये बहस अभी लंबी चलेगी…लेकिन इतना तो तय है कि इस गठबंधन ने बीजेपी के दोहरे चरित्र को उजागर कर दिया है….

सत्ता के लिए वैचारिक विरोध को दरकिनार करना भारतीय राजनीति में नया नहीं है….लेकिन जब ऐसा देश की सबसे बड़ी पार्टी करती है….तो सवाल और भी ज्यादा गंभीर हो जाते हैं…….अंबरनाथ ने ये दिखा दिया कि भारतीय राजनीति में स्थायी कुछ भी नहीं है….न दोस्ती और न ही दुश्मनी…..सिर्फ सत्ता ही सर्वोपरि है…..जिसके लिए जनता को पहले ये पार्टियां आपस में लड़ाती हैं और फिर खुद एक-दूसरे से हाथ मिला लेती हैं..

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