डॉग लवर्स पर SC में तकरार, भैंस का उदाहरण दिया
तुषार मेहता ने कहा कि एनिमल लवर्स का मतलब डॉग लवर्स नहीं होता. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई गेटेड सोसायटी में भैंस पालना चाहे तो क्या होगा?

4पीएम न्यूज नेटवर्क: आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में रोचक बहस देखने को मिली. जस्टिस संदीप मेहता, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अपनी-अपनी बात रखी. तुषार मेहता ने कहा कि एनिमल लवर्स का मतलब डॉग लवर्स नहीं होता. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई गेटेड सोसायटी में भैंस पालना चाहे तो क्या होगा?
आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई. इस दौरान आवारा कुत्तों और पशु-प्रेम को लेकर एक रोचक बहस देखने को मिली. जस्टिस संदीप मेहता ने समस्या की गंभीरता पर बात रखी तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एनिमल लवर्स का मतलब डॉग लवर्स नहीं होता. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई गेटेड सोसायटी में भैंस पालना चाहे तो क्या होगा?
जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि पिछले 20 दिनों में राजस्थान हाई कोर्ट के दो जज आवारा जानवरों से जुड़े हादसों का शिकार हुए हैं. इनमें से एक जज अभी तक ठीक नहीं हो पाए हैं. उन्हें रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आई हैं. यह एक बेहद गंभीर मुद्दा है.
‘सारे बाघों को नहीं मार सकते’
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि यह कोई प्रतिद्वंद्वी मामला नहीं है. हम यहां कुत्तों से प्रेम करने वालों के रूप में हैं. अगर कोई एक बाघ आदमखोर हो जाए तो हम सारे बाघों को नहीं मार सकते. हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नसबंदी हो और प्रदूषण कम हो. इसके लिए एक प्रक्रिया है, जिसे CSVR मॉडल कहा जाता है, कैप्चर (पकड़ना), स्टरलाइज़ (नसबंदी), वैक्सीनेट (टीकाकरण) और रिलीज़ (छोड़ना). यह मॉडल पूरी दुनिया में स्वीकार किया गया है.
सिब्बल ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में इससे कुत्तों की आबादी लगभग शून्य तक आ गई है. अगर ऐसे कुत्ते, जिन्हें रेबीज़ है और जिन्हें नहीं है, एक ही शेल्टर में रखे जाएं तो सभी को रेबीज़ हो जाएगा. जब भी मैं मंदिरों आदि में गया हूं, मुझे कभी किसी कुत्ते ने नहीं काटा. इसपर कोर्ट ने कहा कि आप भाग्यशाली हैं. लोगों को काटा जा रहा है, बच्चों को काटा जा रहा है.
‘भैंस को लेकर कौन फैसला करेगा’
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एनिमल लवर्स का मतलब डॉग लवर्स नहीं होता. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई गेटेड सोसायटी में भैंस पालना चाहे तो क्या होगा? इसका फैसला कौन करेगा? इस पर पार्टी-इन-पर्सन याचिकाकर्ता ने दूसरे देशों का हवाला देते हुए कुछ आंकड़े पेश किए.
तब सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब आप दूसरे देशों की बात कर रहे हैं, तो बताइए सिंगापुर या नीदरलैंड्स में आपको कितने आवारा कुत्ते दिखते हैं? इसपर वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि यह मामला विरोधी नहीं होना चाहिए. मैं सिर्फ कुत्तों से प्रेम करने वालों का नहीं, बल्कि इंसानों से प्रेम करने वालों का भी प्रतिनिधित्व कर रहा हूं. जस्टिस संदीप मेहता ने पूछा कि दूसरे जानवरों का क्या? जैसे मुर्गी या बकरी?
सिब्बल बोले- मैंने चिकन छोड़ दिया
इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि मैंने चिकन खाना छोड़ दिया है, क्योंकि उन्हें पिंजरों में रखा जाता है. उन्होंने यह भी कहा कि समुदाय कुत्तों की देखभाल करता है और वे कई बार खान मार्केट गए हैं, जहां उन्हें कभी कुत्ते ने नहीं काटा. इसपर कोर्ट ने कहा कि आप और हम शायद खुशकिस्मत हों, लेकिन हर कोई नहीं. नेहरू पार्क में भी लोगों को कुत्तों ने काटा है. कपिल सिब्बल ने कुत्तों के काटने की घटनाओं से निपटने और आक्रामक कुत्तों के पुनर्वास के लिए कुछ सुझाव गिनाए. इस पूरी बहस पर अंत में न्यायमूर्ति मेहता ने हल्के-फुल्के अंदाज़ में टिप्पणी करते हुए कहा कि अब तो बस काउंसलिंग ही बाकी रह गई है. किसी को कुत्तों को भी समझाना चाहिए कि वे लोगों को न काटें.
एमिकस क्यूरी ने क्या कहा?
एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि NHAI को एक SOP तैयार करने के लिए कहा गया था, जिसे NHAI ने तैयार कर लिया है. लगभग 1400 किलोमीटर के ऐसे संवेदनशील हिस्सों की पहचान की गई है. पहचान के बाद NHAI का कहना है कि आगे की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है.
इसपर कोर्ट ने कहा, लेकिन NHAI स्वयं भी घेराबंदी, फेंसिंग आदि जैसे कदम उठा सकता है. पिछले 20 दिनों में जानवरों के कारण न्यायाधीशों के साथ दो दुर्घटनाएं हुई हैं. उनमें से एक न्यायाधीश अभी भी रीढ़ की गंभीर चोटों से पीड़ित हैं. यह एक अत्यंत गंभीर मुद्दा है. कोर्ट ने एमिकस क्यूरी से पूछा कि कौन-कौन से राज्य है, जिन्होंने जवाब दाखिल नही किया है. मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटका, पंजाब ने हलफनामा दाखिल नही किया है. उन्होंने कोर्ट राजस्थान और ओडिसा सहयोग नहीं कर रहे है.
एमिकस क्यूरी ने कहा कि कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि मवेशियों, आवारा कुत्तों आदि को शेल्टर होम में रखा जाना है. इसके लिए बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) का विकास आवश्यक होगा. पशु कल्याण बोर्ड (AWB) का कहना है कि भविष्य में प्रजनन को नियंत्रित करने के लिए पहले नर कुत्तों की नसबंदी की जानी चाहिए. इसके अलावा, एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) केंद्रों में पर्याप्त मानव संसाधन (मैनपावर) की भी आवश्यकता है. राज्यों को हलफनामे दाखिल करने के निर्देश दिए गए थे. अब तक प्राप्त 10 हलफनामों को मैंने संकलित कर लिया है.


