रील्स देखने में बिहार टॉप पर, महाराष्ट्र को मिला दूसरा स्थान
बिहार में रोजाना 49.1 पेटाबाइट डेटा यूज हो रहा है, जो देश में सबसे ज्यादा है. महाराष्ट्र दूसरे और यूपी ईस्ट तीसरे नंबर पर है. यूट्यूब 24.3% डेटा यूज के साथ सबसे आगे है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बिहार में रोजाना 49.1 पेटाबाइट डेटा यूज हो रहा है, जो देश में सबसे ज्यादा है. महाराष्ट्र दूसरे और यूपी ईस्ट तीसरे नंबर पर है. यूट्यूब 24.3% डेटा यूज के साथ सबसे आगे है.
स्मार्टफोन और आईपैड की स्क्रीन पर घंटों स्क्रॉलिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया की बढ़ती सक्रियता ने देश में इंटरनेट खपत को नए मुकाम पर पहुंचा दिया है. सर्किलवार डेटा उपयोग के आंकड़े देखें तो इंटरनेट इस्तेमाल के मामले में बिहार पूरे देश में सबसे आगे निकल गया है. यानी कि रील देखने में बिहार देश में टॉप पर पहुंच गया है.
दिलचस्प बात यह है कि दूरसंचार नियामक ट्राई (TRAI) के ताजा आंकड़ों में बिहार की टेली-डेंसिटी यानी आबादी के अनुपात में फोन कनेक्शन देश में सबसे कम है, फिर भी रोजाना डेटा खपत में यह राज्य सबसे ऊपर है. साफ है कि जितने भी लोगों के पास इंटरनेट पहुंचा है, वे उसका इस्तेमाल खूब कर रहे हैं और जमकर रील देख रहे हैं.
बिहार के बाद और कौन से राज्य हैं
दूरसंचार क्षेत्र के आंकड़ों के मुताबिक बिहार में हर दिन करीब 49.1 पेटाबाइट डेटा खर्च हो रहा है, जो लगभग पांच करोड़ 14 लाख जीबी के बराबर बैठता है. इस सूची में महाराष्ट्र 48.7 पीबी के साथ दूसरे और उत्तर प्रदेश (पूर्वी क्षेत्र) 42.31 पीबी के साथ तीसरे नंबर पर है. इसके बाद गुजरात (42.2 पीबी) और मध्य प्रदेश (41.3 पीबी) का स्थान आता है.
क्या देखने में ज्यादा डेटा खर्च हो रहा है
देशभर के इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की पहली पसंद अब भी यूट्यूब बना हुआ है. कुल डेटा खपत में इसकी हिस्सेदारी 24.3 प्रतिशत है, यानी इंटरनेट पर खर्च होने वाले डेटा का करीब एक चौथाई हिस्सा सिर्फ यूट्यूब पर वीडियो देखने में जाता है. इंस्टाग्राम 21.7 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे और फेसबुक 17.5 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर है. इसके बाद गूगल पर सर्चिंग और अन्य ऑनलाइन गतिविधियों (5.2 प्रतिशत) और वॉट्सऐप (3.5 प्रतिशत) का नंबर आता है.
डेटा खर्च होने की तीन बड़ी वजहें हैं
वीडियो स्ट्रीमिंग- यूट्यूब, नेटफ्लिक्स जैसे ओटीटी ऐप्स पर वीडियो देखने से सबसे ज्यादा डेटा खर्च होता है. सोशल मीडिया- इंस्टाग्राम और फेसबुक पर रील्स व फोटो देखने में भी लगातार मेगाबाइट खर्च होते रहते हैं. डाउनलोडिंग और ऑटो-अपडेट- बड़ी फाइलें डाउनलोड करने या ऐप्स को ऑटो-अपडेट पर छोड़ने से डेटा तेजी से खत्म होता है.
महीने में कितना डेटा खर्च करता है भारतीय
एरिक्सन की जून 2026 की मोबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर स्मार्टफोन उपयोगकर्ता औसतन 37 जीबी डेटा प्रति माह खर्च कर रहा है और अगले पांच साल में यह आंकड़ा बढ़कर 70 जीबी तक पहुंचने का अनुमान है. रिपोर्ट यह भी बताती है कि सस्ते 5G डिवाइस, बेहतर नेटवर्क कवरेज और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA) सेवाओं की बढ़ती मांग के चलते 2031 तक देश में 5G सब्सक्रिप्शन एक अरब 10 करोड़ से ज्यादा तक पहुंच सकता है, यानी करीब 81 प्रतिशत सब्सक्रिप्शन पैठ.
2025 के अंत तक 5G सब्सक्रिप्शन 43 करोड़ था, जो कुल मोबाइल सब्सक्रिप्शन का 35 प्रतिशत था, जबकि 4G सब्सक्राइबरों की संख्या 2025 के करीब 57 करोड़ से घटकर 2031 तक लगभग 16 करोड़ रह जाने का अनुमान है, क्योंकि उपयोगकर्ता तेजी से 5G की ओर शिफ्ट हो रहे हैं. इसकी झलक ट्राई के ताजा आंकड़ों में भी दिखती है. जुलाई 2026 में देश में कुल ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबरों की संख्या 1094.48 मिलियन तक पहुंच गई, जिसमें 5G फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस सब्सक्राइबरों की संख्या जून के 12.94 मिलियन से बढ़कर जुलाई में 13.21 मिलियन हो गई.
इसके अलावा जुलाई महीने में करीब 1598 करोड़ के आसपास यानी 15.98 मिलियन उपयोगकर्ताओं ने मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (MNP) के लिए आवेदन किया, जो बताता है कि उपयोगकर्ता बेहतर नेटवर्क और डेटा सुविधा की तलाश में लगातार सेवा प्रदाता बदल भी रहे हैं. आंकड़े साफ इशारा करते हैं कि भारत में इंटरनेट सिर्फ कनेक्टिविटी का जरिया नहीं रह गया, बल्कि मनोरंजन और सोशल मीडिया इसे लगातार बढ़ा रहे हैं. आने वाले सालों में 5G की पहुंच बढ़ने के साथ यह डेटा खपत और तेजी से बढ़ने की उम्मीद है, जिससे यूट्यूब, इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म की हिस्सेदारी और मजबूत हो सकती है.



