पीरियड्स हाइजीन में बिहार की स्थिति कमजोर, तमिलनाडु सबसे बेहतर राज्यों में क्यों?
भारत में 15 से 24 साल की 79.2% महिलाएं माहवारी के दौरान हाइजीनिक तरीका अपनाती हैं, लेकिन राज्यों के आंकड़े देखें तो तस्वीर काफी अलग है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भारत में 15 से 24 साल की 79.2% महिलाएं माहवारी के दौरान हाइजीनिक तरीका अपनाती हैं, लेकिन राज्यों के आंकड़े देखें तो तस्वीर काफी अलग है. तमिलनाडु में यह आंकड़ा 98.3% है, जबकि बिहार में सिर्फ 58.9% है.
माहवारी यानी पीरियड्स को लेकर स्वच्छता और सही जानकारी महिलाओं और लड़कियों की सेहत से सीधे जुड़ी है. इस बीच राज्यसभा में सरकार की ओर से दिए गए जवाब में देश में पीरियड्स के दौरान स्वच्छता से जुड़े इस्तेमाल का एक अहम आंकड़ा सामने आया है. सरकार के मुताबिक, नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे यानी NFHS-6 में 15 से 24 साल की महिलाओं में माहवारी के दौरान हाइजीनिक तरीके से सुरक्षा अपनाने वाली महिलाओं का अनुपात 79.2% है.
वहीं NFHS-5 यानी 2019-21 के आंकड़ों में अलग-अलग राज्यों के साथ अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की महिलाओं के आंकड़े भी दिए गए हैं. इन आंकड़ों से पता चलता है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में माहवारी के दौरान स्वच्छ तरीकों को अपनाने की स्थिति एक जैसी नहीं है.
कुछ राज्यों में यह आंकड़ा 90% से ऊपर है, तो कुछ राज्यों में यह काफी कम है. उदाहरण के लिए NFHS-5 में तमिलनाडु का कुल आंकड़ा 98.3%, दिल्ली का 96.9% और पंजाब तथा हरियाणा का 93.2% रहा. वहीं बिहार में यह 58.9%, मध्य प्रदेश में 60.5% और असम में 66.9% था.
सरकार की स्कीम चलाई जा रही है
सरकार ने बताया कि माहवारी से जुड़ी स्वच्छता को बेहतर करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत Menstrual Hygiene Scheme चलाई जा रही है, जिसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर लागू किया जाता है.
पानी, स्वच्छता और इससे जुड़े दूसरे संकेतकों का डेटा संबंधित मंत्रालयों की ओर से जुटाया जाता है. यानी माहवारी की स्वच्छता को केवल सैनिटरी प्रोडक्ट के इस्तेमाल तक सीमित नहीं माना गया है, बल्कि पानी और स्वच्छता से जुड़े दूसरे पहलुओं को भी अलग-अलग स्तर पर देखा जाता है.
79.2% महिलाएं 15-24 साल की उम्र में हाइजीनिक तरीका अपनाती हैं.तमिलनाडु में 98.3% महिलाओं का कुल आंकड़ा दर्ज किया गया.बिहार में कुल आंकड़ा 58.9% रहा, जो कई राज्यों से काफी कम है.SC और ST के आंकड़ों में भी राज्यों के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है.
माहवारी की स्वच्छता में राज्यों के बीच कितना अंतर?
NFHS-5 के आंकड़ों को देखें तो राज्यों के बीच काफी अंतर नजर आता है. तमिलनाडु में 15-24 साल की महिलाओं का कुल आंकड़ा 98.3% था. दिल्ली में यह 96.9%, गोवा में 96.8%, हरियाणा और पंजाब में 93.2% तथा केरल और तेलंगाना में 93.1% था.
दूसरी ओर बिहार का कुल आंकड़ा 58.9%, मध्य प्रदेश का 60.5%, मेघालय का 64.9% और गुजरात का 66.5% था. इसका मतलब है कि अलग-अलग राज्यों में माहवारी के दौरान हाइजीनिक तरीकों को अपनाने की स्थिति में काफी अंतर है.
उत्तर प्रदेश में कुल आंकड़ा 72.6% दर्ज किया गया. राज्य में SC महिलाओं का आंकड़ा 68.3% और ST महिलाओं का आंकड़ा 63% था. झारखंड में कुल आंकड़ा 74.9% रहा, जबकि SC महिलाओं के लिए यह 71.9% और ST महिलाओं के लिए 68% था. उत्तराखंड में कुल आंकड़ा 91.2% रहा और वहां ST महिलाओं का आंकड़ा 98.9% दर्ज किया गया.
SC और ST महिलाओं के आंकड़ों में भी अंतर
सरकार के जवाब की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ कुल महिलाओं का आंकड़ा नहीं दिया गया, बल्कि SC और ST महिलाओं के लिए भी अलग-अलग आंकड़े उपलब्ध हैं. उदाहरण के लिए बिहार में SC महिलाओं का आंकड़ा 49.2% और ST महिलाओं का 56.6% था. मध्य प्रदेश में SC का आंकड़ा 61% और ST का 41.2% रहा.
वहीं उत्तराखंड में SC महिलाओं का आंकड़ा 89.4% और ST महिलाओं का 98.9% दर्ज किया गया. इससे यह भी समझ आता है कि केवल राज्य का कुल आंकड़ा देखने से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती. एक ही राज्य में अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच भी अंतर हो सकता है. इसलिए सरकार की ओर से SC और ST के लिए अलग डेटा देना स्थिति को ज्यादा विस्तार से समझने में मदद करता है.
किन राज्यों में आंकड़ा सबसे ज्यादा?
NFHS-5 के उपलब्ध आंकड़ों में तमिलनाडु सबसे ऊपर नजर आता है. वहां कुल आंकड़ा 98.3% है. इसके बाद दिल्ली 96.9%, गोवा 96.8%, हरियाणा और पंजाब 93.2%, केरल और तेलंगाना 93.1% तथा हिमाचल प्रदेश 91.6% पर हैं. उत्तराखंड का कुल आंकड़ा 91.2% और अरुणाचल प्रदेश का 91.8% है.



