नंदुरबार में बर्ड फ्लू की दस्तक? 8 लोगों के सैंपल जांच के लिए भेजे जाएंगे

जिला स्वास्थ्य अधिकारी रविंद्र सोनवणे ने कल सोमवार को बताया कि ये 8 सैंपल उन लोगों के हैं जो नंदुरबार जिले में पोल्ट्री और दूसरे पक्षियों के संपर्क में आए थे. नंदुरबार राज्य में बर्ड फ्लू से सबसे अधिक प्रभावित जिला है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: जिला स्वास्थ्य अधिकारी रविंद्र सोनवणे ने कल सोमवार को बताया कि ये 8 सैंपल उन लोगों के हैं जो नंदुरबार जिले में पोल्ट्री और दूसरे पक्षियों के संपर्क में आए थे. नंदुरबार राज्य में बर्ड फ्लू से सबसे अधिक प्रभावित जिला है.

महाराष्ट्र में नंदुरबार जिले के नवापुर से एवियन इन्फ्लूएंजा के पहले संदिग्ध ह्यूमन केस सामने आए हैं. इसके चलते राज्य प्रशासन ने बर्ड फ्लू प्रभावित क्षेत्र में पक्षियों को मारने और रोकथाम के काम में लगे सभी कर्मचारियों की RT-PCR जांच के आदेश दिए हैं. राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि नंदुरबार में बर्ड फार्म पर काम करने वाले या पक्षियों को मारने (Culling Process) के काम में शामिल पोल्ट्री कर्मचारियों के 8 सैंपल, एवियन फ्लू की जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) भेजे जाएंगे.

जिला स्वास्थ्य अधिकारी रविंद्र सोनवणे ने कल सोमवार को बताया कि ये 8 सैंपल उन लोगों के हैं जो नंदुरबार जिले में पोल्ट्री और दूसरे पक्षियों के संपर्क में आए थे. नंदुरबार राज्य में बर्ड फ्लू से सबसे अधिक प्रभावित जिला है.

पुणे स्थित NIV लैब भेजे जाएंगे सैंपल
सोनवणे ने बताया, “8 लोगों के सैंपल इसलिए लिए गए हैं क्योंकि वे पक्षियों के लगातार संपर्क में थे या उन्हें मारने की प्रक्रिया में शामिल थे. उनमें एवियन फ्लू का किसी तरह का कोई लक्षण नहीं दिखा है. इन सैंपलों को, जिनमें नाक के स्वैब भी शामिल हैं, आज मंगलवार को पुणे स्थित NIV भेजा जाएगा.” उन्होंने आगे बताया कि एहतियात के तौर पर इन कर्मचारियों को टैमीफ्लू (Tamiflu) की गोलियां दी जा रही हैं.

स्वास्थ्य अधिकारी सोनवणे ने यह भी बताया कि किसी भी सरकारी कर्मचारी का कोई सैंपल नहीं भेजा गया है. नवापुर से एवियन इन्फ्लूएंजा के पहले संदिग्ध ह्यूमन केस सामने आने के बाद प्रशासन अलर्ट हो गया है. इसके चलते बर्ड फ्लू प्रभावित क्षेत्र में पक्षियों को मारने और रोकथाम के काम में लगे सभी कर्मचारियों की RT-PCR जांच के आदेश दिए हैं.

इससे पहले जिले में 2 संदिग्ध मामले पशु चिकित्सा विभाग के कर्मचारियों अशोक लालसिंग पवार (49) और इंदस गोवल्या वाल्वी (36) से जुड़े हैं. ये दोनों ही लोग बर्ड फ्लू की रोकथाम के उपायों में सीधे तौर पर शामिल थे. पवार में 2 मई को फ्लू के लक्षण दिखे और उन्हें 4 मई को नवापुर सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि वाल्वी में 3 मई को लक्षण दिखे और 5 मई को अस्पताल में भर्ती किया गया.

17 दिनों में मारी गईं 4 लाख से अधिक मुर्गियां
अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. कीर्ति वासावे का कहन है कि दोनों मरीजों में शुरुआती दौर के हल्के लक्षण थे, जिनमें बुखार, गले में खराश, नाक बहना और बदन दर्द शामिल हैं. उन्हें एहतियातन अस्पताल में भर्ती किया गया था. हालांकि बाद में दोनों को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया.

दावा किया जा रहा है कि महाराष्ट्र में अब तक एवियन इन्फ्लूएंजा की वजह से किसी भी इंसान की मौत का कोई मामला सामने नहीं आया है. 1 मई से 17 मई के बीच, रोकथाम टीमों (Containment Teams) ने 15 संक्रमित पोल्ट्री फार्मों में 4,06,682 मुर्गियों को मार दिया, जबकि नवापुर में 24.9 लाख अंडे और 5.48 लाख किलोग्राम से अधिक पोल्ट्री फ़ीड नष्ट कर दिया गया.

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