नहीं बदला भाजपा ने अपना कप्तान

BJP did not change its captain

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। 
देश के सबसे बड़े दल भारतीय जनता पार्टी अपनी राष्ट्रीय कार्यकारणी में अपना राज्य हारे हुए कप्तान को फिर से पार्टी की कमान दी है। ये उनका लगातार दूसरा कार्यकाल होगा पहले कार्यकाल का समय 20 जनवरी को पूरा हो रहा है । उससे पूर्व ही पार्टी में नड्डा की  पुनः ताजपोशी कर दी । इसकी एक बड़ी वजह भाजपा की एक करिश्माई जोड़ी मोदी – शाह  के  जेपी का करीबी होना है।  ये जोड़ी चाहती है कि भाजपा में उनके खास सिपहसालार के हातों में ही बागडोर रहे यही वजह है कि एक साल से अधिक समय के लिए नड्डा को दूसरे कार्यकाल के रूप में अभयदान दे दिया गया है।  आज दिल्ली में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दूसरे दिन की बैठक हुई जिसमे एक बार फिर  जेपी नड्डा को कप्तान बनाया गया है. गौरतलब है की लोगसभा चुनाव में अब ज़्यदा वक़्त नहीं बचा है। जिसके मद्देनज़र जेपी नड्डा का  कार्यकाल जून 2024 तय कर दिया गया है. बता दें ये नड्डा का पार्टी में दूसरा कार्यकाल है. और पार्टी में ऐसा मौका पाने वाले नड्डा तीसरे ऐसे अध्यक्ष हैं। उनसे पहले राजनाथ सिंह, लालकृष्ण आडवाणी दो या उससे अधिक कार्यकाल के लिए अध्यक्ष रह चुके हैं।

बता दें मोदी सरकार में नड्डा स्वास्थ्य मंत्री  भी रह चुके है । मोदी सरकार ये बात अच्छे से जानती है कि नड्डा को संगठन का भी अच्छा अनुभव है,। भाजपा में इससे पहले नड्डा को  उत्तर प्रदेश  प्रभारी महासचिव की जिम्मेदारी दी गयी थी। वही  नड्डा को  2010 में नितिन गडकरी ने उन्हें पार्टी के  सचिव की जिम्मेदारी सौपी थी। बता दें नड्डा का गृह राज्य होते हुए भी 2022 में हिमाचल में भाजपा का कमल खिलाने में असफल रहे नड्डा । कांग्रेस से करारी हार के बाद ये विचार हो रहा था कि शायद इस बार नड्डा की कुर्सी छीन जाएगी। लेकिन आज की इस बैठक के फैसले ने सबको आश्चर्य में डाल दिया। दरअसल 2021 में मोदी कैबिनेट में बड़ा बदलाव किया जाना था जिसमे कुछ बड़े नेता को पार्टी से हटाने पर विचार किया जा रहा था।

2023 में जिन 9 राज्यों में चुनाव होने हैं, उनमें से 5 राज्यों में बीजेपी गठबंधन की सरकार है. यानी इन पांचों राज्यों में बीजेपी के सामने सरकार बचाने की भी चुनौती है. वहीं 4 राज्य तेलंगाना, राजस्थान, मिजोरम और छत्तीसगढ़ में जिताने की भी चुनौती है. नड्डा के फिर से अध्यक्ष बनने के स्थिति में बीजेपी हाईकमान सभी राज्यों में आसानी से रणनीति को अमल में ला सकती है. बता दें नड्डा अमित शाह के बहुत भरोसेमंद हैं। पार्टी को लगता है कि नड्डा के रहते भाजपा को इसका फ़ायदा कही न कही 2023 के चुनावों में मिलेगा जिसके चलते पार्टी ने उनको ये जिम्मेदारी फिर से सौप दी है। फिलहाल ये वक़्त ही बताएगा कि ये फैसला भाजपा के लिए कितना सही साबित होता है।

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