नीतीश कुमार को शिंदे बनाना चाहती है बीजेपी!

  • बिहार में लगातार घट रही है नीतीश की ताकत
  • अलर्ट, जदयू नेता कहीं पलट न दें बाजी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
पटना। बिहार सरकार के बहुप्रतिक्षत मंत्रीमंडल विस्तार के बाद सीएम नीतीश कुमार की चुप्पी बड़े राजनीतिक बवंडर के संकेत दे रही है। नीतीश कुमार ने विस्तार के बाद सिर्फ यह तीन शब्द बोले हैं और वह है सब को बधाई। आखिर सब में कौन—कौन शामिल है? जिस चतुराई से बिहार में भारतीय जनता पार्टी ने नीतीश कुमार को किनारे लगाने की राजनीति की है वह नीतीश भी जानते हैं।
नीतीश कुमार को पता है कि जितनी तेजी से उनकी राजनीतिक हैसियत कम हो रही है उतनी ही तेजी से उनकी मुटठी से मुख्यमंत्री पद फिसल रहा है। उनको पता है कि यदि यह इलेक्शन बीजेपी के साथ लड़ा तो स्थिति और ज्यादा खराब होगी। ऐसे में क्रीज पर संभल कर खेल रहे नीतीश कुमार ने वेट एंड वाच की पालिसी अपनाई है। वह बीजेपी से पंगा लिये बिना बीजेपी का खेल बिगाडऩा चाहते हैं।

बीजेपी का पलड़ा भारी

बिहार में जेडीयू के 45 विधायक हैं। बीजेपी के अभी 80 विधायक हैं। दोनों पार्टी में ये समझौता पहले ही हुआ था कि प्रति तीन से चार विधायक पर एक मंत्री होगा इस फॉर्मूले के तहत ही जेडीयू के 13 मंत्री पहले से हैं, लेकिन बीजेपी के कोटे से 15 मंत्री ही थे। बीजेपी छह मंत्री और बना सकती थी। दिलीप जायसवाल के इस्तीफे के बाद बीजेपी ने सात मंत्री बना दिये। यानि कि बीजेपी के कुल 21 मंत्री सरकार में हो गये। जबकि नीतिश के सिर्फ 13 मंत्री ही है।

सरकार की नाकामियों का ठीकरा भाजपा पर फोड़ सकते हैं सीएम

चुनाव में सरकारी जवाबदेही से अब बीजेपी पीछे नहीं हट सकती। क्योंकि बीजेपी आलाकमान जो कुछ नीतीश से कह रहा है नीतीश वह सबकुछ कर रहे हैं। ऐसे में निगेटिव वोटिंग और सरकार के काम—काज से नाराज मतदाता चुनाव में क्या करेंगे यह सभी को पता है। वहीं चुनाव में नीतीश कुमार सरकार की नाकामियों का ठीकरा बीजेपी पर फोड़ सकते हैं।

तेजी से बढ़ रहा है खतरा!

20 साल पहले जिस जेडीयू के बीजेपी से दोगुने से ज्यादा मंत्री सरकार में होते थे। वो गणित अब पूरी तरह पलट चुका है। 2020 में जेडीयू के 19 मंत्री थे और बीजेपी के सात। साल दर साल जेडीयू के सरकार में मंत्री घटते गए और उतनी ही तेजी से बीजेपी के मंत्री बढ़ते गए। आज स्थिति ये है कि नीतीश कुमार की कुर्सी समेत कुल 13 मंत्री उनकी अपनी सरकार में जेडीयू के हैं, और बीजेपी के 21 मंत्री हो चुके हैं वह इसलिए कि बीजेपी के विधायकों की संख्या जेडीयू के विधायकों की संख्य से ज्यादा है।

जाति और क्षेत्रीय गणित से बने मंत्री

जिन सात मंत्रियों ने शपथ ली है उनकी जाति और क्षेत्रीय गणित से नीतिश के माथे पर बल आ रहे हैं। बीजेपी के 21 मंत्रियों में एक भी यादव मंत्री नहीं बनाया गया है। वही कुर्मी जाति के तेजतर्रार बीजेपी मंत्री कृष्ण कंमार मंटू कुर्मी जाति से आते हैं और रिजल्ट देने की बात कर रहे हैं।

बिहार में जदयू का आंकड़ा

  • वर्ष 2010 के चुनाव में जेडीयू ने 141 सीटों पर चुनाव लड़ा और 115 सीटें जीती थी, जबकि बीजेपी ने 102 सीटों पर चुनाव लड़ा और 91 सीटें जीती।
  • वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार महा गठबंधन के साथ मिलकर लड़े। जेडीयू को लडऩे के लिए 101 सीटें मिलीं। जिसमें उन्होंने 71 सीटों पर जीत दर्ज की। यहां से नीतिश कुमार की सीटें घटनी शुरू हुई।
  • 2020 का विधानसभा चुनाव नीतिश कुमार ने एनडीए के साथ लड़ा। इस बार उन्हें 115 सीटें मिली। वहीं बीजेपी को 110 सीटों पर चुनाव लडऩे का मौका मिला। इस चुनाव में नीतिश कुमार को 43 सीटों पर जीत मिली जबकि पिछले चुनाव में उन्हें 71 सीटों पर जीत मिली थी। आंकड़ा साफ बताता है कि नीतिश को नुकसान हुआ।

बीजेपी से छिटक सकते हैं नीतीश

जब सबकुछ सही सही चल रहा हो तो फिर निगेटिव बात करने का क्या मतलब। नीतीश कुमार आखिर बीजेपी से क्यों छिटक जाएंगे? इस सवाल का जवाब महाराष्ट्र की राजनीति से मिल जाएगा। वहां क्या हुआ यह नीतिश को पता है । नीतीश कुमार को पता है कि सात नए मंत्री सरकार में लाकर बीजेपी ने जाति-क्षेत्र के उस गणित को साध लिया है, जिससे बीजेपी को चुनाव में और ज्यादा फायदा हासिल होगा। बीजेपी का ज्यादा फायदे का मतलब उसको चुनाव में ज्यादा सीटें मांगने का अधिकार मिल जाएगा। जेडीयू पहले से ही हाशिये पर है। ऐसे में यदि नीतिश ज्यादा सीटें देंगे तो फिर खुद उनके लिए क्या बचेगा। बस यही सोच कर नीतिश बेचैन है और बीजेपी की इस फिरकी की काट की तलाश कर रहे हैं। उन्हें पता है कि राजनीति में कब कौन सा दाव कहां पर चला जाता है।

लालू यादव मेरे अंकल : निशांत

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार इन दिनों सक्रिय हुए हैं। अक्सर मीडिया से दूरी बनाकर रहने वाले निशांत इन दिनों जब खुलकर बिहार की राजनीति और आगामी बिहार विधानसभा चुनाव पर प्रतिक्रिया देने लगे तो सियासी गलियारे में तरह-तरह के कयास भी उन्हें लेकर लगाए जाने लगे। निशांत ने एनडीए को फिर से जीत दिलाकर अपने पिता नीतीश कुमार को फिर एकबार मुख्यमंत्री बनाने की अपील की है। एक यूट्यूब न्यूज पोर्टल पर बातचीत के दौरान निशांत कुमार से जब पूछा गया कि क्या आपको लालू यादव आपको पसंद हैं? तो उन्होंने कहा कि वो मेरे अंकल हैं, पिताजी के साथ स्टूडेंट फाइटर रहे, जब से जेपी हैं, तब से साथ ही दोनों रहे हैं तो ठीक हैं। तेजस्वी यादव ने भी निशांत को अपना भाई बताया था। वहीं जब तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार की सेहत को लेकर सवाल उठाना शुरू किया तो निशांत ने मोर्चा थामा और तेजस्वी के बयान को गलत बताते हुए कहा कि उनके पिता बिल्कुल स्वस्थ हैं और आराम से वो अगले पांच साल भी सीएम बनकर सरकार चला सकते हैं। वहीं पीएम मोदी ने जब भागलपुर रैली में नीतीश कुमार को लाडला मुख्यमंत्री कहा तो इसपर प्रतिक्रिया देते हुए निशांत ने खुशी जाहिर की थी और कहा था कि गठबंधन में हैं तो वो कहेंगे ही।

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