महिला आरक्षण के नाम पर बीजेपी की साजिश नाकाम, काम नहीं आए मोदी के घड़ियाले आंसू

जिसमें लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। लेकिन इसे लागू करने के लिए 2026 की जनगणना और उसके बाद परिसीमन का इंतजार था।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: इन दिनों सियासी गलियारों में एक मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है। जिसे लेकर पक्ष-विपक्ष आमने-सामने है। दरअसल महिला आरक्षण बिल को लेकर भाजपा अपने ही बनाए जाल में फंस गई है, 2023 में भाजपा सरकार ने महिला आरक्षण बिल पास करवाया था,

जिसमें लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। लेकिन इसे लागू करने के लिए 2026 की जनगणना और उसके बाद परिसीमन का इंतजार था। अब अप्रैल 2026 में संसद के विशेष सत्र में सरकार ने संविधान संशोधन बिल लाया, जिसमें आरक्षण जल्दी लागू करने और लोकसभा की सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव था।

लेकिन विपक्ष ने इस बिल का विरोध किया। उनका कहना है कि बिना नई जनगणना और जाति जनगणना के परिसीमन करना गलत है। वे आरोप लगाते हैं कि भाजपा महिलाओं के नाम पर चुनावी नक्शा बदलकर फायदा उठाना चाहती है। बिल को दो-तिहाई बहुमत चाहिए था, लेकिन वोटिंग में 298 के पक्ष में और 230 के विपक्ष में वोट पड़े, इसलिए बिल गिर गया। इसके बाद भाजपा घिर गई है।

पीएम मोदी ने देश को संबोधित कर विपक्ष को महिलाओं का सपना कुचलने वाला बताया और महिलाओं से माफी मांगी। भाजपा की महिला सांसदों ने संसद के बाहर प्रदर्शन किया और विपक्ष को महिला-विरोधी कहा। इतना ही नहीं दोस्तों अमित शाह, स्मृति ईरानी, रविशंकर प्रसाद जैसे नेता विपक्ष पर हमला बोल रहे हैं। BJP का कहना है कि विपक्ष ने महिलाओं के साथ धोखा किया।

विपक्ष का जवाब है कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन परिसीमन और जनगणना पहले होनी चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि यह बिल महिलाओं के सशक्तिकरण का नहीं, बल्कि सत्ता हथियाने का है।

वहीं इसे लेकर सहारनपुर से सांसद और कांग्रेस नेता इमरान मसूद की पीएम मोदी के संबोधन पर प्रतिक्रिया सामने आई. सांसद इमरान मसूद ने कहा कि, ये नारी शक्ति वंदन अधिनियम की आड़ में परिसीमन करके सभी की सीट खाना चाहते थे. उन्होंने दावा किया है कि वे सत्ता में बने रहने के लिए कुछ भी करने को तैयार थे, लेकिन वह नहीं होगा.

पीएम के संबोधन में बार-बार सपा, कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके का नाम लेने पर इमरान मसूद ने प्रतिक्रिया दी है. इमरान मसूद ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक दो तिहाई बहुमत के साथ ही पास होगा, तो सबके साथ बैठक में चर्चा करके क्यों नहीं कर रहे हैं.

सांसद इमरान मसूद ने चुनाव के बीच सत्र बुलाए जाने पर भी आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि चुनाव के बीच में सत्र बुलाने की क्या जल्द बाजी थी. उन्होंने पीएम मोदी के संबोधन को 10 में से जीरो नंबर दिए हैं.

विधेयक के पारित न होने पर समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि हम जश्न मनाएंगे क्योंकि इनके नापाक मंसूबे फेल हो गए. इन्होंने महिला आरक्षण बिल की आड़ में, जो बिल एक बार पास हो गया है उसके साथ एक ऐसा संशोधन विधेयक शामिल करके लाए जिसके जरिए ये अपने हिसाब से इलेक्टोरल मैप को बदल सकें. ये अपनी सत्ता को मजबूत करने के लिए ये कारनामे कर रहे थे तो उसको हमने फेल किया है. इसके लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी.

साथ ही इकरा हसन ने कहा, ”डिलिमिटेशन और सेंसस- इन दोनों को इन्होंने महिला आरक्षण बिल के साथ जोड़ दिया, जिसकी कोई आवश्यकता नहीं थी. हम सरकार से आग्रह करते हैं कि महिला आरक्षण विधेयक को जल्द से जल्द लागू करें. 2029 में चाहे सीटें बढ़े या न बढ़े, 543 सीट पर वो 33 फीसदी आरक्षण दे. विपक्ष का एक भी व्यक्ति उनके खिलाफ नहीं होगा.” गौरतलब है कि महिला आरक्षण को लेकर भाजपा अपने ही जाल में पूरी तरह फंसती हुई नजर आ रही है.

Related Articles

Back to top button