गुजरात HC के फैसले को चुनौती, अब SC ने अब्बू बरेलवी की फांसी रोकी
सुप्रीम कोर्ट ने 2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट के दोषी अहमद बरेलवी की मौत की सजा पर रोक लगा दी है. SC ने गुजरात हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सुप्रीम कोर्ट ने 2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट के दोषी अहमद बरेलवी की मौत की सजा पर रोक लगा दी है. SC ने गुजरात हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है.
सुप्रीम कोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में मौत की सजा पाए दोषी अहमद बावा अब्बू अबूबकर बरेलवी की याचिका पर नोटिस जारी किया. इस याचिका में गुजरात हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है जिसमें उसकी सजा और मौत की सजा को बरकरार रखा गया था. जस्टिस विक्रमनाथ की बेंच से वकील ने कहा कि मुझे पूरी तरह से साजिश के आधार पर दोषी ठहराया गया है. गुजरात के फ़ैसले के अनुवाद के लिए भी एक अर्जी दी गई है.
ट्रायल कोर्ट के डॉक्यूमेंट स्थानीय भाषा में हैं. जस्टिस नाथ ने कहा कि ठीक है, सजा पर अमल रोक दिया जाएगा, फिलहाल के लिए नोटिस जारी करें. गुरुवार की सुनवाई के दौरान, बरेलवी के वकील ने गुजरात हाई कोर्ट के फैसले की अनुवादित कॉपी भी मांगी. उन्होंने बताया कि ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड गुजराती भाषा में थे.
इस हमले में 56 लोगों की हुई थी मौत
अहमदाबाद में सीरियल धमाके 26 जुलाई 2008 को हुए थे, जब शहर के अलग-अलग हिस्सों में कई धमाके हुए. इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए. गुजरात की एक स्पेशल कोर्ट ने फरवरी 2022 में इस मामले में 49 आरोपियों को दोषी ठहराया. कोर्ट ने उनमें से 38 को मौत की सजा और 11 को उम्रकैद की सजा सुनाई, जबकि 28 अन्य को बरी कर दिया.
इसके बाद गुजरात हाई कोर्ट ने दोषियों की सजा के खिलाफ अपील और राज्य की ओर से मौत की सजा की पुष्टि की कार्यवाही पर सुनवाई की. जुलाई 2026 में, हाई कोर्ट ने 38 दोषियों की सजा और मौत की सजा को बरकरार रखा. बरेल्वी ने उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी.
हाई कोर्ट ने क्या कहा था?
हाई कोर्ट ने दोषियों की सभी अपीलें खारिज कर दीं और स्पेशल कोर्ट के फरवरी 2022 के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें IM के 38 सदस्यों को मौत की सजा और 11 अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. राज्य सरकार ने मौत की सजा की पुष्टि की मांग की थी. हाई कोर्ट ने कहा कि 38 दोषियों के आपराधिक इतिहास और उनकी भूमिकाओं से यह साबित होता है कि उन्होंने ऐसी आतंकवादी घटना को अंजाम दिया था जिसके लिए मौत की सजा जरूरी थी.



