कानपुर थाने में बवाल! महिला कार्यकर्ताओं ने थानेदार को दिखाई चूड़ियां
कानपुर में बीजेपी महिला कार्यकर्ताओं ने थाने में हंगामा कर थानेदार को चूड़ियां दिखाईं। दहेज उत्पीड़न मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध हुआ। पुलिस ने कोर्ट आदेश का हवाला दिया, जांच एडीसीपी को सौंपी गई।

4pm न्यूज नेटवर्क: कानपुर के एक थाने में उस वक्त माहौल गर्म हो गया, जब बीजेपी की महिला कार्यकर्ताओं ने थानेदार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। गुस्से में आई महिलाओं ने थाने के अंदर ही थानेदार को चूड़ियां दिखाकर विरोध जताया। यह प्रदर्शन दहेज उत्पीड़न के एक मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर किया गया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है।
क्या है पूरा मामला?
बताया जा रहा है कि दहेज उत्पीड़न से जुड़े एक केस में पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट होकर बीजेपी महिला कार्यकर्ता और बर्रा मंडल के पदाधिकारी थाने पहुंचे थे। उनका आरोप था कि पीड़िता को न्याय नहीं मिल रहा और पुलिस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही। इसी बात को लेकर थाने में हंगामा शुरू हो गया और विरोध तेज हो गया।
थानेदार को दिखाई चूड़ियां, लगाए नारे
प्रदर्शन के दौरान महिला कार्यकर्ताओं ने थानेदार को चूड़ियां दिखाईं, जो आमतौर पर विरोध का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान एसओ के खिलाफ नारेबाजी भी हुई और “भ्रष्टाचार के आरोप हटाने” की मांग उठाई गई। स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गई थी।
पुलिस का पक्ष: कोर्ट के आदेश पर हो रही कार्रवाई
मामले पर डीसीपी साउथ दीपेंद्रनाथ चौधरी ने सफाई देते हुए कहा कि दहेज उत्पीड़न के इस केस में पुलिस पहले ही अपनी आख्या न्यायालय को भेज चुकी है। उन्होंने बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद ही FIR दर्ज करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। यानी पुलिस का कहना है कि वह कानून के तहत ही कार्रवाई कर रही है।
डीसीपी और एडीसीपी ने संभाला मोर्चा
थाने में बढ़ते हंगामे की सूचना मिलते ही डीसीपी और एडीसीपी साउथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने दोनों पक्षों को समझाकर स्थिति को नियंत्रित किया और मामला शांत कराया। इसके साथ ही पुलिस पर लगे आरोपों की जांच के लिए एडीसीपी को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राजनीति और कानून के बीच फंसा मामला
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि कैसे संवेदनशील मामलों में राजनीति और कानून आमने-सामने आ जाते हैं। एक तरफ पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग है, तो दूसरी तरफ पुलिस प्रक्रिया और कोर्ट के नियमों का पालन करने की बात कर रही है।
सबसे बड़ा सवाल, न्याय कब और कैसे?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि पीड़िता को कब तक न्याय मिलेगा और क्या जांच निष्पक्ष तरीके से होगी? साथ ही यह भी जरूरी है कि ऐसे मामलों में कानून का पालन करते हुए संवेदनशीलता भी बनी रहे।
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