ऑपरेशन टाइगर की सुगबुहागट पर राउत आगबबूला, भाजपा का असली चेहरा कर दिया बेनकाब!
संजय राउत ने उद्धव ठाकरे के आवास मातोश्री पर बुलाई गई सांसदों की मीटिंग पर कहा, "आज पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सांसदों की बैठक बुलाई है, जो एक नियमित संगठनात्मक प्रक्रिया है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: एक बार फिर देश में भाजपा की फूट दालों और राज करो की राजनीति चरम पर है। आलम ये है कि विकास और जनता को अहम मुद्दों को छोड़कर अब भाजपा दूसरे दलों के नेताओं को तोड़कर अपने दल में शामिल करने में जुटी हुई है।
फिर चाहे वो पक्षिम बंगाल को या फिर महाराष्ट्र। जब से बंगाल चुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज की है तबसे ही ममता की पार्टी के नेताओं को तोड़ने की साजिशें चलने लगी हैं। इसी बीच खबर है कि सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से मिलने वाले हैं। उनकी इस मुलाकात के बाद की प्रगति देखकर महाराष्ट्र में भी शिवसेना (यूबीटी) और राकांपा (शरदचंद्र पवार) के सांसद कोई नया कदम उठा सकते हैं।
हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में चल रही भगदड़ को मद्देनजर रखते हुए शिवसेना (यूबीटी) ने सोमवार को ही अपने संसदीय दल की बैठक बुलाई है। पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे निवास मातोश्री पर बुलाई गई इस बैठक में उद्धव ठाकरे स्वयं सांसदों से बात कर उनके मन की भावनाएं जानने का प्रयास करेंगे।
पता चला है कि हाल ही में एकनाथ शिंदे की दिल्ली यात्रा के दौरान इन सांसदों ने उनसे मुलाकात की थी। इससे पहले भी सात सांसदों के पार्टी छोड़ने की चर्चा छिड़ी थी। तब दक्षिण मुंबई के सांसद अरविंद सावंत ने पत्रकारों के सामने ही एक लंबा शपथ पत्र अपने हाथ से से लिखकर गारंटी दी थी कि वह कहीं नहीं जाने वाले। यूबीटी से जुड़े सूत्रों की मानें तो मुंबई के दो सांसदों अरविंद सावंत एवं अनिल देसाई को छोड़कर बाकी सभी सांसद अपने बेहतर भविष्य की चाह में पार्टी छोड़ने का मन बना चुके हैं।
ताकि किसी न किसी रूप में सत्तापक्ष के साथ आकर अपने क्षेत्र के काम करवा सकें। जिससे अगले चुनाव में जनता के सामने जाने लायक स्थिति बन सके। क्योंकि पिछले कई दिनों से चर्चा चल रही है कि यूबीटी के नौ में से सात सांसद पार्टी छोड़कर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का दामन थामने वाले हैं। इस प्रक्रिया को ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम दिया जा रहा है।
अब बात करें आखिर ये बीजेपी की ‘ऑपरेशन’ वाली राजनीति क्या है?बीजेपी और उसके सहयोगी अक्सर विपक्षी दलों को तोड़ने की रणनीति अपनाते हैं। इसे ‘ऑपरेशन लोटस’ भी कहते हैं। महाराष्ट्र में शिंदे गुट के साथ मिलकर यह ‘ऑपरेशन टाइगर’ बन गया। उद्देश्य है उद्धव ठाकरे की शिवसेना को कमजोर करना ताकि महायुति की सत्ता मजबूत रहे।
दूसरी ओर शरद पवार की पार्टी के भी आठ सांसदों में से अधिसंख्य पार्टी छोड़ने का मन बना रहे हैं। इस भगदड़ को रोकने के लिए ही शरद पवार किसी बेहतर दल में विलय की संभावनाएं खोज रहे हैं। एक दिन पहले ही महाराष्ट्र कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नाना पटोले यह तथ्य उजागर कर चुके हैं कि शरद पवार अपने दल राकांपा (शरदचंद्र पवार) का विलय कांग्रेस में करने का प्रस्ताव दे चुके हैं। उनके इस बयान का अभी तक कोई खंडन स्वयं शरद पवार या उनकी पार्टी की तरफ से नहीं आया है। उनकी पुत्री सुप्रिया सुले ने भी संजय राउत के एक बयान पर बोलते हुए ऐसे किसी प्रस्ताव का खंडन नहीं किया। बल्कि उन्होंने संजय राउत के बयान को ‘अच्छा सुझाव’ बताते हुए कहा कि ‘पता नहीं ऐसा होगा कि नहीं होगा’।
वहीं इस मामले को लेकर शिवसेना UBT नेता संजय राउत ने भी जोरदार हमला बोला है। संजय राउत ने भारतीय जनता पार्टी के कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया दी है. इस दौरान उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा, “जिस दिन हमारी सत्ता आएगी, उस दिन बीजेपी नहीं बचेगी. हम उसे टुकड़े-टुकड़े कर देंगे और उनके नेताओं का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा.”
संजय राउत ने उद्धव ठाकरे के आवास मातोश्री पर बुलाई गई सांसदों की मीटिंग पर कहा, “आज पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सांसदों की बैठक बुलाई है, जो एक नियमित संगठनात्मक प्रक्रिया है. जिस तरह विधायकों की बैठकें होती हैं, उसी तरह आज सांसदों की बैठक बुलाई गई है. हमारे सभी सांसद बैठक में उपस्थित रहेंगे. जो सांसद किसी कारणवश नहीं आ पाएंगे, उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक से जोड़ा जाएगा और उनसे चर्चा की जाएगी.”
उन्होंने कहा कि “ऑपरेशन टाइगर” की चर्चा पिछले दो वर्षों से लगातार हो रही है, लेकिन ऐसा कोई ऑपरेशन नहीं हुआ है. हाल ही में महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा जोरों पर है. इसके तहत शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसदों और नेताओं के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की अटकलें लगाई जाती रही हैं. राउत का कहना है कि कि अमित शाह ने सौ बार ऐसे ऑपरेशन किए हैं। पार्टियों को तोड़ना, नेताओं को खरीदना और सत्ता में बने रहना यह बीजेपी की आदत बन गई है। इससे लोकतंत्र कमजोर होता है। लोग चुने हुए प्रतिनिधियों पर भरोसा खो देते हैं।
2024 के विधानसभा चुनावों के बाद महाराष्ट्र में महायुति की सरकार बनी। उद्धव ठाकरे की एमवीए यानी शिवसेना यूबीटी, कांग्रेस, शरद पवार एनसीपी विपक्ष में है। लेकिन शिंदे गुट लगातार उद्धव के सांसदों को लक्ष्य कर रहा है।कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि सात सांसद दिल्ली गए और शिंदे-अमित शाह से मिले। उद्धव ठाकरे ने तुरंत सांसदों की बैठक बुलाई।
संजय राउत ने कहा कि यह बैठक सामान्य संगठनात्मक बैठक है, कोई घबराहट नहीं। सभी सांसद एकजुट हैं।लेकिन हकीकत यह है कि सत्ता पक्ष विपक्ष को कमजोर करने के लिए हर तरकीब आजमा रहा है। पैसा, पद, दबाव – कुछ भी नहीं छोड़ा जाता। यह लोकतंत्र के लिए खतरा है।
संजय राउत ने सिर्फ एक बयान नहीं दिया। उन्होंने बीजेपी की पूरी राजनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा नहीं लिया, संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन में भी नहीं था। वे “कायर” हैं जो दूसरों की मेहनत पर सत्ता कब्जा करते हैं।राउत ने कांग्रेस को “डूबता जहाज” कहने वाले देवेंद्र फडणवीस पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कांग्रेस कभी डूबने वाली नहीं। पूरे विपक्ष को एक होना चाहिए बीजेपी की “विकृत” राजनीति के खिलाफ। शरद पवार से अपील की कि वे नेतृत्व करें।उन्होंने मोदी सरकार पर भी निशाना साधा। कहा कि सत्ता के नशे में बीजेपी भूल गई है कि जनता असली मालिक है। जब विपक्ष की सत्ता आएगी तो जवाबदेही होगी।
महाराष्ट्र में बीजेपी की रणनीति पूरे देश की तस्वीर है। एक के बाद एक राज्य में विपक्षी पार्टियां तोड़ी जा रही हैं। झारखंड, बिहार, महाराष्ट्र – हर जगह यही खेल। अगर विपक्ष बंटा रहा तो बीजेपी आसानी से सत्ता में रह जाएगी। संजय राउत ने ठीक कहा – कांग्रेस को मजबूत करो, सभी पुराने साथी वापस आएं। एमवीए को और मजबूत बनाओ। महाराष्ट्र की जनता विकास चाहती है, न कि सत्ता के खेल। महंगाई, बेरोजगारी, किसान मुद्दे, बाढ़-सूखा – ये असली मुद्दे हैं। लेकिन बीजेपी इन्हें छोड़कर सिर्फ तोड़-फोड़ पर लगी है।
उद्धव ठाकरे ने बाला साहेब की विचारधारा को निभाने की कोशिश की। हिंदुत्व के साथ विकास, आम आदमी की बात। लेकिन 2022 में शिंदे विद्रोह के बाद पार्टी टूट गई।बीजेपी ने इस फूट का फायदा उठाया। अब उद्धव गुट अकेला लड़ रहा है लेकिन जनता के बीच मजबूत है। सिविक पोल में भी प्रदर्शन अच्छा रहा।राउत कहते हैं कि असली शिवसेना उद्धव के साथ है। शिंदे गुट बीजेपी का गुलाम बन गया है।
वहीं बात की जाए अगर भविष्य की अगर विपक्ष एक हुआ तो 2029 में बीजेपी को बड़ा झटका लग सकता है। महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य में बदलाव पूरे देश को प्रभावित करेगा।संजय राउत की चेतावनी सिर्फ शब्द नहीं, चेतावनी है। जनता देख रही है। सत्ता हमेशा नहीं रहती। जब बदलाव आएगा तो जवाब देना पड़ेगा।बीजेपी को सोचना चाहिए – क्या सिर्फ सत्ता के लिए लोकतंत्र को कमजोर करना सही है? विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य – ये मुद्दे छोड़कर सिर्फ खेल खेलना कब तक चलेगा?
वहीं आम जनता के नजरिये से अगर देखा जाए तो सामान्य व्यक्ति को राजनीति के इन खेलों से क्या फर्क पड़ता है? महंगाई से परेशान किसान, बेरोजगार युवा, छोटा व्यापारी – वे चाहते हैं कि नेता उनके लिए काम करें। लेकिन बीजेपी और सहयोगी सत्ता बचाने में लगे हैं। राउत जैसे नेता इन आवाजों को उठाते हैं। उनका बयान तेज है लेकिन सच्चाई को छूता है। संजय राउत का बयान बीजेपी के खिलाफ विपक्षी गुस्से का प्रतीक है। ऑपरेशन टाइगर जैसी चालें लोकतंत्र के दुश्मन हैं। विपक्ष को एकजुट होकर लड़ना होगा।
जनता अंतिम फैसला करेगी।महाराष्ट्र की राजनीति में यह सिर्फ शुरुआत है। आने वाले दिनों में और हलचल होगी। लेकिन एक बात साफ है – जनता अब जाग चुकी है। सत्ता का घमंड टिकने वाला नहीं। और बंगाल से लेकर महाराष्ट्र तक चल रहे भाजपा के इस खेल को विपक्ष जल्द से जल्द उखाड़ फेंकने का काम करेगा।



