सीएम मान की मुसीबत, पंथ की पीड़ा और राजनीतिक घेराबंदी
आस्था के नाम पर सत्ता को झुकाने की कोशिश या पंजाब की सियासत का नया खेल?

मुख्यमंत्री भगवंत मान को श्री अकाल तख्त का नोटिस 15 जनवरी को हाजिर होने का निर्देश
ईशनिंदा जैसे गंभीर आरोप, अब पंजाब में आपरेशन लोटस!
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। नया विवाद पुरानी सियासत और बीच में एक मुख्यमंत्री। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। इस बार मामला सिर्फ राजनीति का नहीं बल्कि आस्था पंथ और सत्ता के टकराव का है। सिख पंथ की सर्वोच्च संस्था श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से जारी नोटिस ने मान सरकार को असहज ही नहीं बल्कि संवेदनशील मोड़ पर ला खड़ा किया है।
सीएम भगवंत मान पर आस्था का मज़ाक उड़ाने के गंभीर लगाये गये हैं। यह विवाद ऐसे वक्त पर सामने आया है जब पंजाब पहले ही नशा, क़ानूनव्यवस्था और वित्तीय संकट के साथ केंद्र से टकराव के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री के बयान को लेकर उठा यह बवंडर केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है बल्कि सीधे-सीधे सरकार की वैधता संयम और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर रहा है। भगवंत मान का राजनीतिक व्यक्तित्व शुरू से ही परंपरागत सियासत से अलग रहा है। व्यंग्य, कटाक्ष और मंचीय भाषा उनकी पहचान रही है। लेकिन सत्ता में आने के बाद वही भाषा अब जोखिम बनती जा रही है। सवाल यह नहीं कि बयान क्या था सवाल यह है कि उस बयान को किस तरह और किस मकसद से पेश किया जा रहा है।

सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं है मामला
बीजेपी इस पूरे घटनाक्रम को सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं देख रही। यह लड़ाई राष्ट्रीय नैरेटिव की बन चुकी है। एक ओर राष्ट्रवाद और आस्था की राजनीति तो दूसरी ओर संवैधानिक जनादेश और चुनी हुई सरकार। बीजेपी के लिए भगवंत मान क्या एक आसान निशाना हैं लगता तो कुछ ऐसा ही है इस मुद्दे को हवा देना बीजेपी की रणनीति का हिस्सा है ताकि आप को अपरिपक्व और असंवेदनशील दिखाया जा सके। लेकिन यह रणनीति भी जोखिम से खाली नहीं। क्योंकि सवाल यह भी उठता है कि क्या केंद्र ने हमेशा धार्मिक संस्थाओं की स्वायत्तता का सम्मान किया है? यह टकराव सिर्फ पंजाब का नहीं बल्कि 2026 की राजनीति की रिहर्सल भी है।
मान का मीडिया ट्रायल शुरू हो चुका है
पंजाब के सीएम भगवंत मान का मीडिया ट्रायल शुरू हो चुका है। बीजेपी ने उनके इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। विपक्ष उन पर हमलावर है और बीच में खड़ा है एक ऐसा मुख्यमंत्री जिसे जनता ने बदलाव के नाम पर चुना था। क्या यह बदलाव अब खुद सवालों के घेरे में है या फिर यह वही पुराना खेल है जहां आस्था को ढाल बनाकर राजनीति की तलवार चलाई जाती है? अकाल तख्त का नोटिस अपने आप में गंभीर है और इसे हल्के में लेना किसी भी सरकार के लिए आत्मघाती होगा। लेकिन राजनीति में सवाल पूछने का हक़ सिर्फ संस्थाओं को ही नहीं जनता और मीडिया को भी है। सवाल महत्पूर्ण है कि क्या हर विवाद का अंत इस्तीफे से ही होगा? क्या भावनाओं की राजनीति लोकतांत्रिक निर्णयों पर हावी हो जाएगी? यहीं से यह कहानी सिर्फ भगवंत मान की नहीं रहती यह बन जाती है पंजाब की राजनीतिक आत्मा की परीक्षा।
पंजाब की अंदरूनी राजनीति
आम आदमी पार्टी पंजाब में सत्ता में है लेकिन भीतर से पूरी तरह सहज नहीं दिखती। पार्टी के भीतर एक गुट ऐसा है जो मान की अतिसहज शैली को नुकसानदेह मानता है जबकि दूसरा गुट इसे ही उनकी ताक़त समझता है। यही द्वंद्व आज पार्टी की सबसे बड़ी कमजोरी बनता जा रहा है। दिल्ली माडल बनाम पंजाब की ज़मीनी हक़ीक़त यह टकराव अब खुलकर सामने है। पार्टी हाईकमान और स्थानीय नेतृत्व के बीच संवाद की कमी है फैसलों में देरी और संदेशों की अस्पष्टता ने विपक्ष को हमला करने का मौका दिया है। मान का विवाद इसी शून्य में फूटा है।आप के भीतर यह सवाल भी गूंज रहा है कि क्या मुख्यमंत्री को अधिक संस्थागत भाषा अपनानी चाहिए थी। लेकिन कोई यह सवाल नहीं पूछता कि क्या यही विपक्ष तब भी इतना संवेदनशील था जब पिछली सरकारों के दौरान बेअदबी की घटनाएं हुई और दोषी खुले घूमते रहे? आप के लिए यह क्षण आत्ममंथन का है। या तो पार्टी इस विवाद को संवाद, विनम्रता और राजनीतिक परिपक्वता से संभाले या फिर यह मामला लंबा खिंचकर सरकार की साख पर स्थायी दाग़ छोड़ सकता है।
बीजेपी ने मांगा इस्तीफा
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा है कि श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय द्वारा मुख्यमंत्री को तलब किया जाना कोई सामान्य या औपचारिक प्रक्रिया नहीं है बल्कि यह सिख पंथ की सर्वोच्च तख्त संस्था और सिख रहत मर्यादा के प्रति बार-बार किए गए कथित अनादर का असाधारण और गंभीर आरोप है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट करते हुए आरपी सिंह ने लिखा है कि भले ही सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो की पुष्टि न हुई हो लेकिन मुख्यमंत्री भगवंत मान के अपने शब्द और आचरण ही सिख समुदाय की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाने के लिए पर्याप्त हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी कॉमेडी नशा या घमंड सिख पंथ की सर्वोच्च लौकिक सत्ता के प्रति अनादर को सही नहीं ठहरा सकता। भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि एक ऐसा मुख्यमंत्री जो आस्था का मजाक उड़ाए सिख संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास करे और फिर संवैधानिक पद की आड़ लेकर जवाबदेही से बचे वह पंजाब का शासन करने के योग्य नहीं है। उन्होंने इसे सत्ता का दुरुपयोग करार दिया और कहा कि इस तरह का व्यवहार न केवल निंदनीय है बल्कि राज्य की गरिमा के भी खिलाफ है। आरपी सिंह ने आगे कहा कि नैतिक और नैतिकता की वैधता खो चुके मुख्यमंत्री भगवंत मान को तत्काल अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
सोनिया गांधी की तबियत बिगड़ी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। मंगलवार को अचानक सोनिया गांधी की तबीयत बिगडऩे की खबर से सनसनी फैल गई। सोनिया को दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी की तबीयत अब पूरी तरह स्थिर है। उन्हें 5 जनवरी 2026 की रात करीब 10 बजे दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल के अध्यक्ष डॉ. अजय स्वरूप ने बताया कि सोनिया गांधी को सांस लेने में कुछ तकलीफ हो रही थी।
सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों की जांच में पता चला कि दिल्ली में ठंड और प्रदूषण के मिले-जुले असर से सोनिया की तबीयत बिगड़ी थी. सोनिया गांधी का ब्रोंकियल अस्थमा थोड़ा बढ़ गया था. एहतियात के तौर पर उन्हें अस्पताल में रखा गया ताकि उनकी पूरी निगरानी हो सके और सही इलाज दिया जा सके। सोनिया गांधी पिछले कई सालों से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही हैं, वे समय-समय पर नियमित जांच और इलाज के लिए अस्पताल जाती रही हैं। अभी सोनिया गांधी को एंटीबायोटिक्स और अन्य जरूरी दवाइयां दी जा रही हैं. डॉक्टरों ने कहा है कि इलाज का उन पर बहुत अच्छा असर हो रहा है. उनकी हालत अब बिल्कुल स्थिर है और वे खतरे से बाहर हैं. डॉक्टरों का कहना है कि उनकी स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है. अगर सब ठीक रहा तो एक-दो दिन में उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है. यह फैसला इलाज करने वाले डॉक्टर ही अंतिम रूप से लेंगे।
आलमबाग में सीवर ओवरफ्लो से पोल में उतरे करंट से कुत्ते की मौत
लोगों का फूटा गुस्सा
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लखनऊ के आलमबाग क्षेत्र में सीवर व्यवस्था की बदहाली एक बार फिर सामने आई है। रामप्रसाद खेड़ा इलाके में सडक़ पर भरा सीवर का गंदा पानी अब जानलेवा साबित हो रहा है। सीवर का पानी सडक़ पर फैलने के कारण पास लगे बिजली के खंभे में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से एक कुत्ते की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि रामप्रसाद खेड़ा में पिछले कई दिनों से सीवर जाम है, जिसकी शिकायत नगर निगम और जलकल विभाग से कई बार की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सडक़ पर लगातार भरे गंदे पानी के कारण लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। मजबूरी में कुछ घरों के लोग उसी दूषित पानी के संपर्क में आने को विवश हैं, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। करंट फैलने की घटना के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत विरोध प्रदर्शन किया और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सीवर की सफाई और बिजली व्यवस्था की जांच कर ली जाती, तो यह हादसा टाला जा सकता था। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। घटना की सूचना मिलने के बाद बिजली विभाग ने क्षेत्र की बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद कर जांच शुरू की। वहीं नगर निगम अधिकारियों ने जल्द सीवर की सफाई कराने और पानी निकासी का आश्वासन दिया है।
दिल्ली मेट्रो के स्टाफ क्वार्टर में लगी आग पति-पत्नी और बच्ची की जलकर मौत
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। बाहरी दिल्ली के आदर्श नगर इलाके में दिल्ली मेट्रो स्टाफ क्वार्टर में आग लग गई। यहां एक कमरे सो रहे पति-पत्नी और मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत हो गई। दमकल विभाग के मुताबिक, उन्हें बीती रात को 2:39 पर डीएमआरसी क्वार्टर के घरेलू सामान में आग लगने की जानकारी मिली थी, जिसके बाद छह गाडिय़ों को मौके पर आग बुझाने के लिए भेजा गया था।
दमकल विभाग के अनुसार, पांचवें फ्लोर पर आग लगी थी। इस आग में जब दमकल की टीम अंदर पहुंची तो वहां पर तीन लोगों के शव जली हालत में मिले। मृतकों की पहचान 42 वर्षीय अजय, 38 वर्षीय नीलम और 10 वर्षीय जान्ह वी के रूप में हुई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। आग के कारणों का अभी पता नहीं चल सका है। सुबह 06:40 बजे आग पर काबू पा लिया गया है। दमकल अधिकारी ने बताया कि आग एक कमरे में घरेलू सामान में लगी थी, जिससे कमरे में तीन जली हुई लाशें मिलीं। आग बुझाने के दौरान एक फायरकर्मी राकेश के हाथ में चोट लग गई, उसे जगजीवन अस्पताल ले जाया गया, जिन्हें प्राथमिक उपचाल के बाद छुट्टी दे दी गई।
तेजस्वी यादव की याचिका पर सीबीआई को नोटिस
दिल्ली हाईकोर्ट ने आईआरसीटीसी के कथित घोटाले में आरोप लिया फैसला
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को आईआरसीटीसी के कथित घोटाले में आरोप तय किए जाने के आदेश के खिलाफ तेजस्वी यादव की याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी किया। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने तेजस्वी की याचिका और मुकदमे पर रोक लगाने की मांग पर सीबीआई से जवाब दाखिल करने को कहा है। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 14 जनवरी तय की है।
इसी दिन तेजस्वी यादव के पिता और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की इसी तरह की याचिका पर भी सुनवाई होगी। इससे पहले निचली अदालत ने 13 अक्टूबर 2025 को लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और 11 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। इन पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने का आदेश दिया गया था। तेजस्वी यादव और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने निचली अदालत के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है. यह मामला भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) के दो होटलों का संचालन एक निजी कंपनी को दिए जाने में हुई कथित गड़बडय़िों से जुड़ा है। अदालत ने लालू यादव के अलावा प्रदीप कुमार गोयल, राकेश सक्सेना, भूपेंद्र कुमार अग्रवाल, राकेश कुमार गोगिया और विनोद कुमार अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) और धारा 13(1)(डी)(दो) व (तीन) के तहत आरोप तय किए थे।
इन धाराओं में तय किए गए थे आरोप
अदालत ने कहा था कि सभी 14 आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), धारा 420 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) व धारा 13(1)(डी)(दो) और (तीन) के तहत एक जैसे आरोप तय किए जाएंगे. भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत अधिकतम सजा 10 साल तक की हो सकती है, जबकि धोखाधड़ी के मामले में सात साल तक की सजा का प्रावधान है.



