कोट-पैंट में यारी बेसमेंट की तैयारी फिर नियमों की क्या लाचारी ?
घनी आबादी के बीच गंभीर सवाल खड़ा करता फहद इसलाही का अस्पताल

- जहां होनी चाहिए पार्किंग वहां चल रही है नर्सिंग छात्रों की क्लास
- अस्पताल के बेसमेंट में मरीजों का इलाज, लगी आग तो क्या होगा?
- यूपी के शीर्ष नौकरशाही की फहद इसलाही के साथ बेहद निजी तस्वीरें वायरल उठे सवाल
- फायर विभाग के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है अस्पताल में
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लखनऊ के चर्चित चेहरों में शुमार फहद इसलाही की सूबे के शीर्ष अधिकारियों के साथ आयी बेहद निजी तस्वीरों ने लखनऊ का तामपान बेहद खतरनाक स्तर तक बड़ा दिया है। यूपी के शीर्ष ब्यूरोक्रेट की यह तस्वीरें खुद फहद इसलाही के सोशल मीडिया से सामने आयी है। तस्वीरों के बाद पब्लिक डोमेने में पहले से मौजूद सवालों से रहस्यमयी गुबार और ज्यादा काला हो चुका है और लोग पूछ रहे हैं कि क्या रिश्तों की चमक के बीच नियमों की निगरानी खत्म हो जाती है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर फहद इसलाही के अस्पताल के ऊपर उठ रहे गंभीर सवाल प्रशासन को इसलिए नहीं दिख रहे क्योंकि उनके संबध यूपी के शीर्ष अधिकारियों के साथ हैं और गलबहलियां करती तस्वीरे इस बात की साफ गवाही दे रही हैं।
फहद इसलाही के लखनऊ मेट्रोसिटी अस्पताल पर आरोप है कि वहां बेसमेंट बना कर न सिर्फ मरीजों का इलाज किया जा रहा है बल्कि छात्रों की पढ़ाई भी हो रही है। यह गभीर सवाल इसलिए उठ रहे हैं कि कुछ दिनों पहले लखनऊ में इसी तरह की इमारत में आग लगी थी और 15 जिंदगियों को हाथ धोने के लिए मजबूर होना पड़ा था। हादसे के बाद पूरे शहर की इल्लीगल बेसमेंट और अवैध निर्माण पर कार्रवाई की बात सरकार की तरफ से जोरशोर से कही गयी थी। लेकिन ढाक के वही तीन पात वाली कहावत चरितार्थ है और बिना नक्शा पास कराए अस्पताल, कोचिंग संस्थान और व्यापारिक प्रतिष्ठान अधिकारियों की मिलीभगत और दोस्ती के बल पर खुलेआम चलाए जा रहे हैं। लखनऊ के गोमतीनगर में स्थित लखनऊ मेट्रोसिटी अस्पताल को लेकर उठ रहे सवाल अब सिर्फ अस्पताल की इमारत और उसकी व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं रह गए हैं। सवाल यह भी है कि जिन व्यवस्थाओं पर नियम कायदे लागू होते हैं उन पर निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी निभाने वाले तंत्र की नजर आखिर कितनी दूर तक जाती है। हम पहले भी अस्पताल में अनियमित निर्माण और बेसमेंट से जुड़े सवालों को सामने रख चुके हैं। पार्किंग व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। अब हमारे हाथ लगी कुछ तस्वीरें इस पूरे मामले में एक और सवाल जोड़ती हैं।
टॉप ब्यूरोक्रेट के साथ फहद की तस्वीरें
इन तस्वीरों में अस्पताल से जुड़े फहद इसलाही कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नजर आ रहे हैं। तस्वीर अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है। किसी अधिकारी के साथ खड़े होना या व्यक्तिगत परिचय होना भी अपराध नहीं है। लेकिन जब उसी संस्थान की भवन व्यवस्था बेसमेंट और पार्किंग को लेकर सवाल सार्वजनिक रूप से उठ चुके हों तब प्रभावशाली लोगों के साथ नजदीकी की तस्वीरें स्वाभाविक रूप से यह सवाल जरूर पैदा करती हैं कि क्या नियमों की निगरानी भी उतनी ही सहजता से हो रही है जितनी सहजता से तस्वीरों में मेल मुलाकात दिखाई देती है। सवाल सीधा है अगर अस्पताल का निर्माण स्वीकृत नक्शे और निर्धारित मानकों के मुताबिक है तो फिर संबंधित विभाग सामने आकर स्थिति साफ क्यों नहीं करते। बेसमेंट स्वीकृत है या नहीं? अगर स्वीकृत है तो किस नक्शे के तहत? पार्किंग के लिए स्वीकृत प्रावधान क्या हैं और मौके पर उनकी वास्तविक स्थिति क्या है? क्योंकि अस्पताल कोई सामान्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं होता। यहां मरीज उनके परिजन और कर्मचारी रोजाना आते जाते हैं। इसलिए भवन सुरक्षा अग्नि सुरक्षा पार्किंग और आपातकालीन पहुंच जैसे सवाल कागजों की खानापूर्ति भर नहीं हो सकते।
रिश्तों की चमक के बीच नियमों की निगरानी कहां है
लखनऊ के गोमतीनगर स्थित लखनऊ मेट्रोसिटी अस्पताल को लेकर उठ रहे सवालों की कड़ी में यह तस्वीरे उस ज्वालामुखी की तरफ फंटी है जिसका लावा तहस नहस करने के लिए काफी है। तस्वीरों में फहद इसलाही यूपी के शीर्ष अधिकारियों के साथ नजर आ रहे हैं। खास बात यह है कि इनमें से ज्यादातर तस्वीरें किसी गुप्त कैमरे या छिपे हुए स्रोत से हासिल नहीं की गई हैं इन्हें खुद फहद इसलाही अथवा उनसे जुड़े सार्वजनिक सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर साझा किया गया है। यानी तस्वीरों की तलाश में 4PM को कोई खास मशक्कत नहीं करनी पड़ी। जो तस्वीरें सार्वजनिक की गयी वही अब सार्वजनिक सवालों का हिस्सा बन गई हैं।
महत्वपूर्ण सवाल तस्वीरों के साथ रिकॉर्ड का भी है
फहद इसलाही की अधिकारियों के साथ तस्वीरें अगर सामान्य सामाजिक या आधिकारिक मुलाकात हैं तो इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। लेकिन अगर अस्पताल से जुड़े निर्माण और पार्किंग के सवालों पर संबंधित विभागों ने कोई जांच की है कोई नोटिस दिया है कोई स्वीकृति जारी की है या कोई कार्रवाई की है तो वह रिकॉर्ड भी सार्वजनिक होना चाहिए। क्योंकि सवाल यह नहीं कि कौन किसके साथ फोटो में खड़ा है सवाल यह है कि किसके अस्पताल में कौन सी व्यवस्था नियमों के मुताबिक है और कौनसी नहीं। और अगर सब कुछ नियमों के मुताबिक है तो तस्वीरें बेअसर हैं लेकिन अगर नियमों पर सवाल हैं तो फिर तस्वीरें एक और सवाल जरूर पूछती हैं कोतवाल साहब का साथ तो फिर सैंय्या को नहीं लगता डर।
तस्वीरों के बल पर रौब झाडऩे की परम्परा
किसी अधिकारी की किसी व्यक्ति के साथ तस्वीर अगर आधिकारिक बैठक, सरकारी कार्यक्रम, सार्वजनिक समारोह या पेशेवर मुलाकात की हो तो उसका संदर्भ स्पष्ट होता है। मगर जब तस्वीरों में व्यक्तिगत मेलजोल दिखाई देती है और उसी व्यक्ति से जुड़े संस्थान की भवन व्यवस्था बेसमेंट तथा पार्किंग को लेकर गंभीर सवाल सार्वजनिक रूप से उठ चुके हों तब संबंधित अधिकारियों से पारदर्शिता की अपेक्षा स्वाभाविक है। क्या इन अधिकारियों का अस्पताल से जुड़े किसी प्रशासनिक नियामकीय या निरीक्षण संबंधी काम से कोई संबंध रहा है। क्या उन्होंने कभी अस्पताल के निर्माण स्वीकृत नक्शे पार्किंग व्यवस्था या अग्नि सुरक्षा से जुड़े मामलों में कोई भूमिका निभाई है। यदि हां तो क्या उस भूमिका का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है। और यदि नहीं तो फिर अस्पताल से जुड़े सवालों पर संबंधित विभागों की कार्रवाई की स्थिति क्या है। यहां एक बात साफ होनी चाहिए। किसी अधिकारी के साथ तस्वीर खिंचवाना कोई अपराध नहीं है। किसी से सामाजिक संबंध होना भी अपने आप में अनियमितता नहीं है। मगर सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों से यह अपेक्षा जरूर की जाती है कि उनके निजी संबंधों का इस्तेमाल सरकारी प्रक्रियाओं को प्रभावित करने के लिए न हो। इसी तरह किसी अस्पताल के संचालक की अधिकारियों के साथ तस्वीरें भी अपने आप में उसके भवन या व्यवस्थाओं की वैधता का प्रमाण नहीं बनतीं।




