कॉकरोच जनता पार्टी का अनोखा प्रदर्शन, समर्थक पहुंचा कलेक्टर ऑफिस, सिस्टम के खिलाफ खोला मोर्चा

सूरत में एक युवक ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम से कलेक्टर ऑफिस पहुंचा... और अपने अनोखे अंदाज़ में सिस्टम के खिलाफ विरोध जताया...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः इन दिनों सोशल मीडिया पर एक अनोखा नाम कॉकरोच जनता पार्टी छाया हुआ है..  यह नाम सुनकर पहले तो हंसी आती है.. लेकिन इसके पीछे युवाओं का गहरा दर्द.. और सरकार के खिलाफ नाराजगी छिपी है.. गुजरात के सूरत शहर में परेश कुमार महाले नाम के एक व्यक्ति ने इस ट्रेंड को असल जिंदगी में उतार दिया.. वे हाथ में पोस्टर लिए हुए कलेक्टर ऑफिस पहुंचे.. जिसमें एक तरफ कॉकरोच का चित्र.. और दूसरी तरफ उनकी अपनी तस्वीर थी.. उन्होंने खुद को इस पार्टी का समर्थक बताया.. वहीं यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं है.. यह पूरे देश के युवाओं की आवाज बन गई है.. भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी और परीक्षा पेपर लीक जैसे मुद्दों पर युवा इतने परेशान हैं.. कि वे अब व्यंग्य के जरिए अपनी बात रख रहे हैं..

आपको बता दें कि कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने अदालत में एक टिप्पणी की.. वे फर्जी डिग्री वाले वकीलों या व्यवस्था पर सवाल उठाने वालों की बात कर रहे थे.. और उन्होंने उन्हें कॉकरोच जैसे शब्दों से जोड़ा.. यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.. युवाओं ने इसे अपमान के रूप में लिया.. उनका कहना है कि बेरोजगार युवा.. आरटीआई दाखिल करने वाले.. या सिस्टम के खिलाफ बोलने वाले लोग गंदगी में रहने वाले कॉकरोच जैसे हो गए हैं.. इस बयान से युवाओं में आक्रोश फैल गया.. अमेरिका में रहने वाले अभिजीत दीपके नाम के एक युवा ने इस गुस्से को एक व्यंग्यात्मक अभियान में बदल दिया.. और उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी नाम से सोशल मीडिया अकाउंट बनाया..

कुछ ही दिनों में यह पार्टी इंस्टाग्राम पर बेहद लोकप्रिय हो गई.. खबरों के अनुसार, यह BJP के आधिकारिक अकाउंट से भी ज्यादा फॉलोअर्स हासिल कर चुकी थी.. लाखों युवा इससे जुड़े.. वेबसाइट बनाई गई जहां लोग सदस्यता ले रहे थे.. यह एक मीम और व्यंग्य का आंदोलन बन गया.. 21 मई 2026 को सूरत के परेश कुमार महाले कलेक्टर ऑफिस पहुंचे.. उनके हाथ में एक पोस्टर था.. पोस्टर पर कॉकरोच का सिंबल और उनकी फोटो थी.. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार और व्यवस्था ने लोगों को कॉकरोच बनने पर मजबूर कर दिया है..

उन्होंने NEET परीक्षा का मुद्दा भी उठाया.. पिछले हफ्ते हुई NEET परीक्षा में पेपर लीक की खबरें आईं.. लाखों छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ गया.. जिन परिवारों ने सालों की मेहनत और पैसे लगाकर बच्चों को डॉक्टर बनाने का सपना देखा था.. उनका भरोसा टूट गया.. परेश महाले ने कहा कि जब युवा सोशल मीडिया पर या सड़क पर सरकार के खिलाफ बोलते हैं.. तो उन्हें कॉकरोच कहकर अपमानित किया जाता है.. हम इसी अपमान के खिलाफ इस प्रतीक को अपना रहे हैं.. अब हम कॉकरोच बनकर लड़ेंगे..

उन्होंने यह भी बताया कि वे अनाज माफियाओं के खिलाफ एक साल से लड़ रहे हैं.. उन्होंने तहसीलदार, डिप्टी कलेक्टर, गृह मंत्री, मुख्यमंत्री.. और प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायतें की हैं.. उनके पास रसीद की कॉपियां भी हैं.. लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.. उल्टा उन्हें धमकियां मिल रही हैं.. परेश महाले आम आदमी पार्टी से जुड़े हुए हैं.. उनका मानना है कि शिक्षित और ईमानदार उम्मीदवार ही देश में बदलाव ला सकते हैं.. भारत में युवा आबादी बहुत बड़ी है.. करोड़ों युवा 18-35 साल के बीच हैं.. लेकिन नौकरियां कम हैं.. शिक्षा महंगी है.. परीक्षाएं लीक हो रही हैं.. NEET, NET, UPSC जैसी परीक्षाओं में घोटाले की खबरें बार-बार आती हैं..

युवा कहता है कि हम दिन-रात पढ़ते हैं.. कोचिंग में लाखों रुपये खर्च करते हैं.. फिर पेपर लीक हो जाता है.. सरकार क्या कर रही है.. महंगाई ने आम आदमी को परेशान कर रखा है.. पेट्रोल, रसोई गैस, सब्जी-फल सब महंगे हो गए हैं.. नौकरी नहीं मिल रही है जिससे शादी भी मुश्किल हो गई है.. वहीं कॉकरोच का प्रतीक इसलिए चुना गया.. क्योंकि कॉकरोच बहुत मुश्किल से मरता है.. गंदगी में भी जीवित रहता है.. और उसे कुचला जाए तो भी फिर से उठ खड़ा होता है.. युवा कह रहे हैं कि व्यवस्था हमें कुचल रही है.. लेकिन हम हार नहीं मानेंगे.. हम कॉकरोच बनकर लड़ेंगे..

कॉकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया को हिला दिया.. इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) और यूट्यूब पर मीम्स, रील्स.. और पोस्ट्स वायरल हो रहे हैं.. कुछ लोग इसे मजाक मान रहे हैं.. तो कुछ इसे असली आंदोलन की शुरुआत बता रहे हैं.. एक रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी की वेबसाइट पर लाखों युवाओं ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के लिए साइन किए.. बाद में वेबसाइट बंद कर दी गई.. जिस पर संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाया.. देश भर में युवा सड़कों पर, कॉलेजों में और बाजारों में इस बारे में चर्चा कर रहे हैं.. सूरत, जयपुर, दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में लोग इस ट्रेंड पर अपनी राय दे रहे हैं.. कुछ कहते हैं कि यह सिर्फ मजाक है.. कुछ कहते हैं कि यह युवाओं का असली गुस्सा है जो चुनाव में भी दिख सकता है..

 

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