एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स की दीवारों के रंग पर विवाद, केसरिया से सफेद और फिर केसरिया होने से गरमाई सियासत

कोलकाता के एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स में दीवारों को कलर करने को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: कोलकाता के एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स में दीवारों को कलर करने को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है. दरअसल, तीन दिन में एकेडमी की दीवारों का रंग 3 बार बदला गया, जिससे सियासी घमासान मच गया है.

कोलकाता की ऐतिहासिक एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स में जबरदस्त विवाद खड़ा हो गया है. यहां के कॉरिडोर और स्टाफ-रूम की दीवारों को तीन दिनों में तीन बार अलग-अलग रंगों (ओरिजिनल रंग- केसरिया और सफेद) में रंगा गया.

कभी भारत के महान कलाकारों का घर और संस्कृति का बड़ा संरक्षक रही यह एकेडमी अब एक गरमा-गरम राजनीतिक विवाद के केंद्र में है. एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स एक ऐसी जगह है, जिसने रबींद्रनाथ टैगोर से लेकर एम.एफ. हुसैन जैसे दिग्गजों की कला को दुनिया के सामने पेश किया, लेकिन इस हफ्ते एक अजीब नजारे की गवाह बनी.

स्टाफ और आने वाले लोगों का कहना है कि सिक्योरिटी और स्टाफ एरिया की दीवारों को तीन दिनों में तीन बार अलग-अलग रंगों में रंगा गया. पहले दिन ओरिजिनल भूरे-लाल रंग की जगह केसरिया रंग से रंग दिया गया. फिर दूसरे दिन रंग बदलकर सफेद किया गया और तीसरे दिन फिर से केसरिया रंग से रंग दिया गया. इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि ये बदलाव करने का आदेश किसने दिया और क्यों?

संस्था पर कब्जा करने की कोशिश’

कलाकारों और एकेडमी के पुराने सदस्यों ने इस इमारत को संस्कृति का एक ऐसा केंद्र बताया, जो राजनीति से दूर है. एक सीनियर पेंटर ने कहा, ‘इस जगह ने पीढ़ियों से कला की आजादी को बचाकर रखा है.

अचानक और बार-बार रंग बदलने से राजनीति के दखल का संकेत मिलता है, जो एकेडमी के लिए ठीक नहीं है’. वहीं, एक अन्य स्थानीय कलाकार ने भी कहा कि कला की जगहों का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए. इस तरह के पैटर्न में भगवा रंग करना ऐसा लगता है जैसे संस्था पर कब्जा करने की कोशिश हो.

इस घटना से तुरंत राजनीतिक विवाद शुरू हो गया. तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने रंग बदलने को ‘अपमानजनक और अनावश्यक’ बताया और मांग की कि एकेडमी को किसी भी पार्टी के असर से दूर रखा जाए. सीनियर आर्टिस्ट रुद्रनील घोष, जो इस घटना के दौरान वहां मौजूद थे, उन्होंने कहा कि स्टाफ सदस्यों ने ही पेंटिंग का काम किया और जोर देकर कहा कि यह किसी संस्थागत आदेश के तहत नहीं किया गया था.

मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप

वहीं, बीजेपी की तरफ से विधायक सजल घोष ने इस बदलाव का बचाव किया. उन्होंने तर्क दिया कि एकेडमी का रंग-रूप उसकी पारंपरिक पहचान के हिसाब से ही रहना चाहिए और विरोधियों पर फायदे के लिए इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया.

कैमरे के सामने विरोध-प्रदर्शन

कई पेंटरों और एकेडमी के सदस्यों ने कैमरे के सामने विरोध-प्रदर्शन किया और रंग बदलने की इस कार्रवाई को संस्था की निष्पक्षता पर हमला बताया. उन्होंने राजनीतिक मकसद से किए जा रहे किसी भी बदलाव को तुरंत रोकने की मांग की और भविष्य में सजावट से जुड़े बदलावों पर फैसला लेने के लिए कलाकारों और ट्रस्टियों की एक कमिटी बनाने को कहा.

एकेडमी की ओर से अभी तक कोई बयान नहीं

इस मामले में ‘एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स’ के मैनेजमेंट ने अभी तक कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है, जिसमें यह बताया गया हो कि रंगने की मंजूरी किसने दी या पुराने रंगों को वापस लाने की क्या योजना है. हालांकि कलाकारों और राजनीतिक नेताओं ने विवाद को सुलझाने के लिए ट्रस्टियों, सदस्यों और सांस्कृतिक विशेषज्ञों की एक जरूरी बैठक बुलाने की मांग की है.

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