Delhi High Court से मोदी सरकार को तगड़ा झटका, डॉ. निमो यादव का X अकाउंट बहाल 

दिल्ली हाईकोर्ट ने डॉ. निमो यादव के X अकाउंट को तत्काल बहाल करने का निर्देश दिया है... जस्टिस जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः क्या देश में अब सच बोलना गुनाह बनता जा रहा है.. क्या सत्ता में बैठी सरकार आलोचना से इतना डरने लगी है कि आवाज दबाने पर उतर आई है.. भाजपा सरकार अब न सिर्फ सवालों से घबरा रही है.. बल्कि उन सवालों को उठाने वालों को ही निशाना बना रही है.. जो सरकार की नाकामी को जनता के सामने दिखा रहे हैं.. सोशल मीडिया जो कभी जनता की आवाज का सबसे बड़ा मंच माना जाता था.. अब उसी पर शिकंजा कसने की कोशिश हो रही है.. यू-ट्यूब, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स पर अकाउंट ब्लॉक किए जा रहे हैं.. कंटेंट हटाया जा रहा है.. और असहमति को खतरा बताया जा रहा है.. इसी क्रम में सरकार ने व्यंग्यात्मक अकाउंट डॉ. निमो यादव समेत 12 अकाउंट्स को ब्लॉक कर दिया था.. जिसको दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी.. वहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए.. अकाउंट को तुरंत बहाल करने का आदेश दे दिया है..

आपको बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार 6 अप्रैल 2026 को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है.. कोर्ट ने व्यंग्यात्मक एक्स अकाउंट डॉ. निमो यादव को तुरंत बहाल करने का आदेश दे दिया है.. जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की सिंगल बेंच ने यह आदेश दिया.. हालांकि, कोर्ट ने कुछ खास ट्वीट्स को अभी भी ब्लॉक रखने की बात कही है.. ये वे ट्वीट्स हैं.. जिन पर केंद्र सरकार को आपत्ति थी..

वहीं कोर्ट ने खाताधारक प्रतीक शर्मा को निर्देश दिया है कि.. वे सरकार की समीक्षा समिति के सामने पेश हों.. कोर्ट ने साफ कहा कि पूरी कार्यवाही में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए.. यानी दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए.. आपको बता दें कि यह फैसला सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की आजादी.. और सरकार के ब्लॉकिंग आदेशों के बीच संतुलन का बड़ा उदाहरण बन गया है..

आपको बता दें कि डॉ. निमो यादव एक पैरोडी या व्यंग्यात्मक अकाउंट है.. इसका संचालन प्रतीक शर्मा नाम के व्यक्ति करते हैं.. इस अकाउंट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार से जुड़े मुद्दों पर व्यंग्य भरे पोस्ट किए जाते थे.. अक्सर AI टूल्स का इस्तेमाल करके मीम्स.. वीडियो और इमेज बनाए जाते थे.. वहीं कुछ पोस्ट्स में प्रधानमंत्री को खराब तरीके से दिखाया गया था.. जिसको लेकर सरकार का आरोप था कि ये पोस्ट्स झूठी कहानियां फैला रहे थे.. डीपफेक कंटेंट इस्तेमाल कर रहे थे.. और सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकते थे..

जिसके चलके 18 मार्च 2026 को केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स.. और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत आदेश जारी किया.. इसमें 12 एक्स अकाउंट्स को भारत में ब्लॉक करने को कहा गया.. इनमें @drnimoyadav मुख्य था.. जिसको लेकर सरकार ने कहा कि इन अकाउंट्स से प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक, भ्रामक.. और AI से बनी फर्जी सामग्री फैलाई जा रही थी.. इससे सार्वजनिक व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा को खतरा हो सकता था..

जानकारी के मुताबिक एक्स कंपनी ने इस आदेश को बेमेल बताया.. कंपनी ने 19 मार्च को MeitY को पत्र लिखकर कहा कि ज्यादातर कंटेंट धारा 69A के दायरे में नहीं आता.. इसलिए पूरा अकाउंट ब्लॉक करना जरूरत से ज्यादा सख्त कदम है.. जिसके बाद प्रतीक शर्मा ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की.. और उन्होंने सरकार के ब्लॉकिंग आदेश की कॉपी मांगी.. और अकाउंट बहाल करने की मांग की.. 31 मार्च 2026 को जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की अदालत में सुनवाई हुई..

एक्स कंपनी ने कोर्ट में हलफनामा देकर अपना पत्र पेश किया.. कंपनी ने कहा कि ब्लॉकिंग आदेश का पालन तो किया गया.. लेकिन हमने केंद्र से इसे दोबारा विचार करने को कहा है.. कोर्ट ने सरकार को समय दिया.. और मामले को अगली सुनवाई के लिए रखा.. वहीं 6 अप्रैल 2026 को अंतिम सुनवाई हुई.. जस्टिस कौरव ने दोनों पक्षों को सुना.. जिसके बाद कोर्ट ने फैसला दिया कि डॉ. निमो यादव अकाउंट को तुरंत बहाल किया जाए.. लेकिन जिन ट्वीट्स पर सरकार को आपत्ति थी.. वे फिलहाल ब्लॉक रहेंगे.. इन्हें अस्थायी रूप से ब्लॉक रखा जाएगा..

और कोर्ट ने कहा कि खाताधारक प्रतीक शर्मा को MeitY की समीक्षा समिति के सामने पेश होना चाहिए.. वहां उन्हें अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलेगा.. कोर्ट ने जोर दिया कि पूरी प्रक्रिया में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन होना चाहिए.. यानी किसी को बिना सुनवाई के सजा नहीं दी जा सकती.. दोनों पक्षों को सुनना जरूरी है.. आपको बता दें कि धारा 69A सरकार को कुछ खास परिस्थितियों में सोशल मीडिया कंटेंट ब्लॉक करने का अधिकार देती है.. जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, सार्वजनिक नैतिकता आदि शामिल हैं.. लेकिन कोर्ट ने पहले भी कहा है कि यह अधिकार असमान नहीं होना चाहिए.. वहीं पूरा अकाउंट बंद करना एक यूजर की पूरी आवाज को दबा देना है..

व्यंग्य अभिव्यक्ति की आजादी का हिस्सा है.. अगर व्यंग्य को भी ब्लॉक किया जाएगा.. तो लोकतंत्र में आलोचना का रास्ता बंद हो जाएगा.. जस्टिस कौरव ने इसी बात पर जोर दिया.. और उन्होंने कहा कि सरकार को समिति के जरिए सुनवाई का मौका देना चाहिए.. प्रतीक शर्मा ने याचिका में कहा कि उनका अकाउंट सिर्फ व्यंग्य के लिए था.. वे डॉक्टर या इंजीनियर नहीं हैं, बल्कि पैरोडी चलाते हैं.. सरकार ने AI जनरेटेड कंटेंट का हवाला दिया.. लेकिन शर्मा का कहना था कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है.. एक्स कंपनी ने भी कोर्ट में यही तर्क रखा कि 12 में से ज्यादातर कंटेंट ब्लॉकिंग के आधार पर नहीं आता..

 

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