अभागी अंकिता रेप प्रकरण पर सवालों के घेरे में धामी सरकार

  • अब दिये सीबीआई जांच के आदेश, सबूत हो चुके हैं नष्ठ!
  • जेन जी ने संभाला मोर्चा सेलेब्स आये मैदान में
  • आर्मी अफसर रहीं खुशबू पाटनी की ललकार लड़कियां अपनी सुरक्षा स्वंय करें
  • एक लड़की इंसाफ मांगती रही, सरकार वक्त खरीदती रही

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। आखिकार धामी सरकार ने अंकिता भंडारी रेप प्रकरण में सीबीआई जांच के लिए केन्द्र सरकार से सिफारिश कर दी है। यह सिफारिश तब कि गयी है जब उत्तराखंड में हरीश रावत पूरे दल-बल के साथ पदयात्रा पर निकले हैं और पूरे देश के जेन जी सच्चाई को सामने लाने के लिए सड़कों पर नारे लगा रहे हैं। इस प्रकरण में बीजेपी के एक बड़े नेता को बचाने का धामी सरकार पर आरोप लग रहा है। अंकिता भंडारी रेप प्रकरण मधुमिता से लेकर सेंगर तक के प्रकरण से अलग नजर आ रहा है। बाकी के प्रकरण में व्यक्तियों पर आरोप लगे थे। लेकिन अभागि अंकिता की सीधी लड़ाई सरकार से है। एक तरफ जेन जी अंकिता के आरोपियों को सजा दिलाने के लिए सड़कों पर लड़ाई लड़ रहा है तो दूसरी तरफ सरकार पर सीधे आरोप लग रहे हैं कि वह असली गुनहागार को उसको बचाने के लिऐ अपना सबकुछ दांव पर लगा चुकी है। जेन जी को पहली सफलता हाथ लगी है कि इस प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग सरकार ने मान ली है।

अलग है अंकिता का केस

अंकिता भंडारी का मामला इसलिए अलग है क्योंकि यह किसी एक आरोपी किसी एक दरिंदे या किसी एक रसूखदार व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। यह मुकदमा सीधे सत्ता के खिलाफ खड़ा दिखाई देता है। मधुमिता से लेकर कुलदीप सेंगर तक देश ने देखा है कि कैसे वक्त के साथ नाम सामने आए आरोप तय हुए और जेल के दरवाजे खुले। लेकिन अंकिता के मामले में कहानी उलटी है यहां आरोप किसी व्यक्ति तक सीमित नहीं रहे है बल्कि उंगलियां सरकार की ओर उठती चली गयीं। इसीलिए यह प्रकरण असहज करता है। इसीलिए यह सरकार को चुभता है। और इसी वजह से हर कदम पर यह सवाल तैरता रहा कि क्या धामी सरकार बीजेपी के एक बड़े नेता को बचाने में अपनी साख दांव पर लगा चुकी है? जिस रिसार्ट में अंकिता के साथ वह सब हुआ वह सबूतों का केंद्र होना चाहिए था। लेकिन वहां बुलडोजऱ चला और तभी से यह धारणा मजबूत होती चली गई कि कार्रवाई अपराध के खिलाफ नहीं बल्कि सबूतों के खिलाफ है। सरकार कहती रही कानून अपना काम कर रहा है लेकिन सड़कें पूछती रहीं तो फिर सीबीआई से डर क्यों? आज जब सीबीआई जांच का आदेश आया है तो यह सरकार की नैतिक जीत नहीं बल्कि सार्वजनिक दबाव के आगे किया गया स्वीकार है। यह मानो सरकार ने यह कबूल कर लिया हो कि राज्य पुलिस पर भरोसा जनता का नहीं रहा। और लोकतंत्र में इससे बड़ा आरोप किसी सरकार पर नहीं हो सकता।

जेन जी ने कर दिया कमाल

यह आदेश किसी सहज प्रशासनिक विवेक का परिणाम नहीं है यह दबाव में लिया गया फैसला है। ऐसा दबाव जो न विपक्ष ने बनाया न संसद ने बल्कि जेन जी ने सड़कों पर उतरकर पैदा किया। जिस जेनरेशन को रील्स और रीलों में उलझा बताकर खारिज किया जा रहा था यही जनरेशन अंकिता के नाम पर यही सड़कों पर उतरी नारे लगाए सवाल पूछे और सरकार से वह मंगवाया जिसे वह हर हाल में टालना चाहती थी। सीबीआई जांच जेन जी की पहली बड़ी जीत है।

सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में हो सीबीआई जांच : हरीश रावत

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में सीबीआई जांच हो और जिन लोगों के नाम सामने आए हैं उन्हें तत्काल गिरफ्तार किया जाए। साथ ही उन्होंने मांग की है कि जिन लोगों ने सबूत मिटाने के लिए रिजार्ट में आग लगाई उन पर भी मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। दरअसल तीर्थनगरी ऋ षिकेश के रेलवे रोड पर स्थित एक होटल से हरीश रावत और पूर्व कैबिनेट मंत्री शूरवीर सिंह साजवान ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ यह पदयात्रा शुरू की। इस पद यात्रा में भारी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं। इस दौरान हरीश रावत ने कहा कि वे इस संघर्ष को एक निर्णायक मोड़ तक पहुंचाएंगे।

देर से ही सही जेल का रास्ता खुलता जरूर है

भारत में यह पहली बार नहीं है कि किसी प्रभावशाली व्यक्ति पर यौन अपराध के आरोप लगे हों। अमरमणि त्रिपाठी, कुलदीप सिंह सेंगर इन नामों ने साबित किया कि देर से ही सही जेल का रास्ता खुलता है। लेकिन अंकिता भंडारी के मामले में एक अजीब सा ठहराव है। मुख्य आरोपी का नाम सबको पता है उसके राजनीतिक रिश्ते भी जगजाहिर हैं लेकिन फिर भी वह नाम आज भी खुली हवा में सांस ले रहा है। यह अंतर क्यों है? क्या इसलिए कि सत्ता उसी पार्टी की है जिससे आरोपी जुड़ा रहा है? या इसलिए कि पहाड़ों की गूंज दिल्ली तक उतनी तेज नहीं जाती?

‘सरकार पर नहीं खुद पर भरोसा करें लड़कियां’

आर्मी अफसर रहीं खुशबू पाटनी जोकि वालीवुड एक्ट्रेस दिशा पाटनी की बहन है ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सनसनी फैला दी है। वह अभी तक सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग के वीडियो पोस्ट करती रही हैं। इस बार उन्होंने वीडिया शेयर करते हुए जोर देकर कहा है कि लड़कियों को सरकार या प्रशासन के भरोसे न रहकर खुद अपनी सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए खुशबू पाटनी ने बैक टू बैक वीडियो पोस्ट करते हुए कहा है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड का केस बहुत दिखाया जा रहा है क्योंकि सोशल मीडिया का माना है। ऐसा पहले भी होता था। पहले भी समाज लड़कियों के प्रति ऐसा था लेकिन अब कुछ लड़कियों के मैसेज आ रहे हैं कि हमें डर लगता है। खुशबू ने अपनी आर्मी ट्रेनिंग का किस्सा साझा करते हुए बताया कि सुरक्षा के लिए हमेशा आत्मनिर्भर रहना चाहिए। अपनी जरूरत का सामान खुद लेकर चलो। उन्होंने लड़कियों को भी हर वक्त तैयार रहने की सलाह देते हुए कहा है कि अपने साथ कुछ नुकीली चीज या काली मिर्च का स्प्रे जरूर रखना चाहिए, ताकि जरूरत पडऩे पर काम आ सके। खुशबू पाटनी एक फिटनेस फ्र ीक हैं जो सोशल मीडिया पर लड़कियों को मोटिवेट करती हैं और सेल्फ डिफेंस के तरीके भी बताती हैं।

 

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