इजरायल के चक्कर में फंसे ट्रंप! Mojtaba Khamenei की होर्मुज बंद करने की चेतावनी

मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है... US, ईरान और इजरायल के बीच हालात और गंभीर होते दिख रहे हैं...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः मध्य-पूर्व में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है.. ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहा टकराव अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है.. जिसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है.. ईरान की ओर से जारी हालिया संदेश और सैन्य दावों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है.. ईरान ने दावा किया है कि उसने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों.. और जहाजों को निशाना बनाया है.. इसके साथ ही उसने दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक होर्मुज जलसंधि को बंद करने की चेतावनी भी दी है.. वहीं यह चेतावनी इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है.. क्योंकि होर्मुज जलसंधि से होकर दुनिया के लगभग एक-पांचवां हिस्सा कच्चे तेल का परिवहन होता है.. अगर यह मार्ग बंद होता है.. तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है.. और तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है..

ईरान के नए सुप्रीम लीडर के रूप में चर्चाओं में आए मोजतबा खामेनेई के नाम से जारी संदेश ने इस पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बना दिया है.. संदेश में कहा गया है कि ईरान पर किसी भी तरह के सैन्य हमले या दबाव का कड़ा जवाब दिया जाएगा.. संदेश में यह भी दावा किया गया कि ईरान की सेना ने अमेरिकी सैन्य लक्ष्यों पर जवाबी कार्रवाई की है.. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है.. लेकिन इस बयान के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया.. और विश्लेषकों का ध्यान एक बार फिर मध्य-पूर्व की ओर गया है.. आपको बता दें कि ईरान लंबे समय से यह कहता रहा है कि वह अपनी संप्रभुता.. और क्षेत्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा.. ईरान की सत्ता संरचना में सुप्रीम लीडर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है.. और उनके नाम से जारी बयान को देश की रणनीतिक नीति का संकेत माना जाता है..

ईरान की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उसने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों.. और नौसैनिक संसाधनों को निशाना बनाया है.. ईरान का दावा है कि उसकी कार्रवाई में एक अमेरिकी विमानवाहक पोत को नुकसान पहुंचाया गया है.. जिस जहाज का नाम लिया गया है.. वह अमेरिकी नौसेना का विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln (CVN‑72) है.. यह पोत अमेरिका के सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों में से एक माना जाता है.. और अक्सर मध्य-पूर्व में अमेरिकी नौसैनिक उपस्थिति का प्रमुख हिस्सा रहता है.. ईरान के अनुसार, हमले के दौरान अमेरिकी सैन्य विमानों को हवा में ईंधन देने वाले एक टैंकर विमान को भी निशाना बनाया गया… यह विमान Boeing KC‑135 Stratotanker प्रकार का बताया गया है..

ईरान का कहना है कि इस हमले में अमेरिकी सेना को नुकसान हुआ.. और कुछ सैनिक मारे गए.. हालांकि अमेरिकी अधिकारियों की ओर से इन दावों की पुष्टि नहीं की गई है.. कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों का कहना है कि.. इस तरह के दावों की स्वतंत्र जांच अभी जारी है.. अमेरिका ने ईरान के दावों पर अभी तक विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है.. लेकिन अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से संकेत दिया गया है कि.. क्षेत्र में उसकी सेना पूरी तरह सतर्क है.. अमेरिका ने पहले भी कई बार कहा है कि वह अपने सैनिकों और सहयोगियों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा..

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का इतिहास कई दशकों पुराना है.. 1979 की ईरानी क्रांति के बाद से दोनों देशों के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण रहे हैं.. समय-समय पर यह तनाव सैन्य टकराव के करीब भी पहुंचा है.. मध्य-पूर्व में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना.. और अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा करना बताया जाता है.. वहीं ईरान इसे अपने खिलाफ दबाव की रणनीति मानता है.. ईरान की ओर से दी गई सबसे गंभीर चेतावनी होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की है..

आपको बता दें कि यह जलसंधि फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी.. और अरब सागर से जोड़ती है.. दुनिया के कई बड़े तेल उत्पादक देश जैसे सऊदी अरब, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात.. अपने तेल का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से निर्यात करते हैं.. विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया में समुद्री रास्ते से भेजे जाने वाले कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी जलसंधि से गुजरता है.. इस कारण इसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है.. वहीं अगर यह मार्ग किसी कारण से बंद हो जाता है.. तो तेल की कीमतों में अचानक भारी उछाल आ सकता है.. इससे दुनिया की अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है..

ईरान की चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों में अस्थिरता की आशंका बढ़ गई है.. निवेशक और ऊर्जा कंपनियां इस स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए हैं.. अगर होर्मुज जलसंधि में जहाजों की आवाजाही बाधित होती है.. तो तेल की आपूर्ति कम हो सकती है.. इससे पेट्रोल, डीजल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की कीमतों पर असर पड़ सकता है.. जिसको लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की कीमतों में अचानक वृद्धि से वैश्विक महंगाई भी बढ़ सकती है.. ऊर्जा लागत बढ़ने से परिवहन, उद्योग और खाद्य उत्पादन पर भी प्रभाव पड़ता है.. भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति खास तौर पर महत्वपूर्ण है.. क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करता है..

 

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