मीरजापुर: गोपालपुर टोल प्लाजा पर इमरजेंसी लेन को लेकर विवाद, टोलकर्मी से धक्का-मुक्की का वीडियो वायरल
मीरजापुर के गोपालपुर टोल प्लाजा पर इमरजेंसी लेन से वाहन निकालने को लेकर विवाद हो गया। टोलकर्मी ने धक्का-मुक्की, धमकी और मारपीट का आरोप लगाया है। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: राष्ट्रीय राजमार्गों पर बने टोल प्लाजा केवल शुल्क वसूली के केंद्र नहीं होते, बल्कि यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में जब नियमों को लेकर विवाद सामने आते हैं, तो वे अक्सर चर्चा का विषय बन जाते हैं। मीरजापुर के विंध्याचल थाना क्षेत्र स्थित गोपालपुर टोल प्लाजा पर रविवार को हुई एक घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला सुर्खियों में आ गया है।
आरोप है कि इमरजेंसी लेन से वाहन निकालने को लेकर हुए विवाद के दौरान एक टोलकर्मी के साथ धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार किया गया। घटना के बाद कर्मचारी मानसिक रूप से आहत बताया जा रहा है और उसने नौकरी छोड़ने की बात भी कही है।
इमरजेंसी लेन से गुजरने को लेकर हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार गोपालपुर टोल प्लाजा पर कार्यरत बबुरा निवासी अरुण मोदनवाल ने आरोप लगाया है कि रविवार दोपहर इमरजेंसी लेन से वाहन निकालने को लेकर विवाद शुरू हुआ। उनका कहना है कि समाजवादी पार्टी से जुड़े नेता सतीश मिश्रा के भाई आशीष मिश्रा इमरजेंसी लेन से गुजरना चाहते थे, लेकिन निर्धारित नियमों के तहत उन्हें ऐसा करने से रोका गया। अरुण मोदनवाल का आरोप है कि इसके बाद विवाद बढ़ गया और उनके साथ धक्का-मुक्की की गई।
टोल प्रबंधन ने लगाए गंभीर आरोप
टोल प्लाजा के प्रतिनिधि भावेश प्रताप सिंह ने बताया कि संबंधित वाहनों को पहले से ही बिना किसी पास के निशुल्क आवागमन की सुविधा दी जाती है। इसके बावजूद इमरजेंसी लेन के इस्तेमाल को लेकर लगातार दबाव बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी लेन विशेष परिस्थितियों के लिए निर्धारित होती है, जहां आमतौर पर एंबुलेंस, आपातकालीन सेवाओं से जुड़े वाहन और अधिकृत वीआईपी वाहन ही प्रवेश कर सकते हैं। निर्धारित प्रक्रिया और सुरक्षा मानकों के तहत ही इस लेन का उपयोग किया जाता है। भावेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि विवाद के दौरान टोलकर्मी को धमकी दी गई, उसका गला दबाने का प्रयास किया गया और धक्का देकर सड़क पर गिरा दिया गया। उन्होंने कहा कि घटना के बाद कर्मचारी काफी तनाव में है और नौकरी छोड़ने की बात कर रहा है।
सपा नेता ने रखा अपना पक्ष
विवाद को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता सतीश मिश्रा ने भी अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है कि उनके वाहनों पर टोल टैक्स लागू नहीं होता और उन्हें निशुल्क आवागमन की सुविधा प्राप्त है। उन्होंने कहा कि उनके वाहन नियमित रूप से बिना शुल्क के टोल प्लाजा से गुजरते हैं। हालांकि, इमरजेंसी लेन के उपयोग को लेकर लगाए गए आरोपों पर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं, जिसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
थाने में दी गई तहरीर, जांच शुरू
मामले को गंभीरता से लेते हुए टोल प्रबंधन की ओर से विंध्याचल थाने में लिखित शिकायत दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्राप्त तहरीर के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार वायरल वीडियो, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नियमों और जिम्मेदारियों के बीच संतुलन जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि इमरजेंसी लेन का उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में यातायात को बाधारहित बनाए रखना होता है। ऐसे में इस लेन के उपयोग से जुड़े नियमों का पालन सभी पक्षों के लिए आवश्यक है। वहीं किसी भी विवाद की स्थिति में कानून व्यवस्था और सम्मानजनक व्यवहार बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी, लेकिन वायरल वीडियो ने एक बार फिर टोल प्लाजा पर नियमों के पालन और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है।
रिपोर्ट: संतोष देव गिरि
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