ममता को इश्वरीय मदद बेनकाब हुए हुमायूं कबीर

- आर्थिक डील का वीडियो आया समाने
- मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण के लिए बीजेपी से 1 हजार करोड़ की मांग!
- बाबरी मस्जिद बनवाने को लेकर चर्चा में आये थे हुमायूं कबीर
- दिल के अरमा आसुओं में बह गये न सनम मिला, न विसाल-ए-सनम
- कभी ममता के सिपाहसलार थे कुछ दिन पहले बागवत कर बनाई थी अपनी पार्टी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति वैसे भी तीखे रंगों तेज बयानों और भारी आरोपों के लिए जानी जाती है लेकिन इस बार जो सामने आया है उसने सियासी गलियारों में भूचाल खड़ा कर दिया है। बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण के बयान के बाद चर्चा में आये हुमायूं कबीर का एक वायरल वीडियो ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में उथल पुथल शुरू हो गयी है। कभी ममता के सिपाहसलार रहे हुमांयू कबीर ने पिछले दिनों पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने का न सिर्फ एलान किया बल्कि उसकी संगे बुनियाद भी रख दी। उनके इस कदम से मुस्लमानों में उनका क्रेज बड़ गया। बाद में उन्हें तृणमूल कांग्रेस से निकाल दिया गया और उन्होंने अपनी खुद पालिटिक्ल पार्टी बना ली जिसका नाम रखा गया जनता उन्नयन पार्टी। तृणमूल कांग्रेस ने हुमांयू कबीर पर बीजेपी से 1 हजार करोड़ रूपये और डिप्टी सीएम के पद की डील का वीडियो जारी किया है। यही नहीं टीएमसी का कहना है कि वह मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव और पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के सम्पर्क में हैं। हुमांयू कबीर ने इस वीडियो को एआई से बना हुआ बताया है। वीडियो सामने आते ही आरोपों सफाइयों और राजनीतिक दूरी बनाने का सिलसिला शुरू हो गया। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताते हुए हमला तेज कर दिया है वहीं सहयोगी दलों ने भी असहजता दिखानी शुरू कर दी है।

सहयोगियों की दूरी और बढ़ता दबाव
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हुमायूं कबीर के सियासी पार्टनर असदुद्दीन औवेसी ने वीडियो वायरल होने के बाद उनसे अपने संबध तोड़ दिये हैं और अकेले ही चुनाव लडऩे का एलान कर दिया है। राजनीति में अक्सर सहयोग और दूरी दोनों रणनीति का हिस्सा होते हैं। लेकिन इस मामले में दूरी इतनी जल्दी बन जाना यह संकेत देता है कि वीडियो ने सहयोगियों को भी असहज स्थिति में डाल दिया है।
बंगाल की राजनीति में नया तूफान
वायरल वीडियो में जनता उन्नयन पार्टी प्रमुख हुमायूं कबीर चुनावी माहौल में ध्रुवीकरण की रणनीति और उससे जुड़े भारी पैसों की चर्चा करते दिखाई देते हैं। यह क्लिप जैसे ही सार्वजनिक हुई है पूरे पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई। विपक्षी दलों ने तुरंत इसे मुद्दा बनाते हुए सवाल उठाए है कि क्या चुनावी राजनीति में मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए इस तरह की रणनीतियां बनाई जाती हैं। सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर वीडियो की चर्चा तेजी से फैल गई जिससे मामला और गर्म हो गया है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी लंबे समय से विपक्ष के आरोपों का सामना करती रही हैं कि राज्य की राजनीति में ध््राुवीकरण का माहौल बनाया जाता है। इस वीडियो के सामने आने के बाद टीएमसी को जैसे नया हथियार मिल गया।
बड़े राजनीतिक खेल की झलक है वीडियो : टीएमसी
टीएमसी नेता फिरहाद हकीम, अरूप विश्वास और कुणाल घोष ने संयुक्त रूप से वीडियो को दिखाते हुए आरोप लगाया है कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि एक बड़े राजनीतिक खेल की झलक है। पार्टी का दावा है कि वीडियो में हुमायूं कबीर यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि वह भाजपा नेताओं के समर्थन से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। टीएमसी का कहना है कि भाजपा धर्म के आधार पर राजनीति को हवा देने की कोशिश कर रही है और इसके लिए ऐसे चेहरों का इस्तेमाल किया जा रहा है जो पहले अलग अलग दलों से जुड़े रहे हैं। फिरहाद हकीम ने कहा है कि भाजपा हुमायूं कबीर का इस्तेमाल कर रही है और उन्हें दल बदलू करार दिया। वायरल वीडियो में कुछ बेहद विवादित बयान भी सामने आए हैं जिनमें समुदायों के वोटों को लेकर टिप्पणियां और सत्ता परिवर्तन के लिए रणनीतिक बातचीत का दावा किया गया है। अगर यह बातें सही साबित होती हैं तो यह न केवल राजनीतिक आचरण पर सवाल उठाती हैं बल्कि चुनावी नैतिकता को भी कटघरे में खड़ा करती हैं। सवाल बड़ा है कि क्या यह सिर्फ एक व्यक्ति की बयानबाजी है या फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहे उस अदृश्य खेल का हिस्सा जहां आरोप वीडियो और नैरेटिव मिलकर चुनावी जमीन तैयार करते हैं। फिलहाल इतना तय है कि यह वीडियो केवल एक क्लिप नहीं बल्कि एक ऐसा सियासी हथियार बन चुका है जिसने बंगाल की राजनीति में तापमान कई डिग्री बढ़ा दिया है। इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।



