DU छात्रा पर NSA लगाना पड़ा भारी, हाई कोर्ट ने नोएडा DM की 5 गलतियां गिनाईं

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि डीएम को संविधान में असीम शक्ति दी गई है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: नोएडा की डीएम ने आकृति चौधरी के खिलाफ NSA लगाने से पहले पुलिस की रिपोर्ट को वैरिफाई नहीं किया. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इसे गंभीर बताते हुए डीएम को दोषी ठहराया.

नोएडा में मजदूर आंदोलन के दौरान छात्र नेता आकृति चौधरी पर एनएसए लगाना डीएम मेधा रूपम को भारी पड़ गया. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 15 पन्नों के फैसले में नोएडा डीएम की उन 5 गलतियों को पकड़ा, जिसके कारण आकृति पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लगाया गया था.

जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेवा की बेंच ने कहा कि नोएडा की डीएम ने पावर का गलत इस्तेमाल किया. हनक और डर दिखाने के लिए एक सामान्य लड़की के खिलाफ एनएसए का इस्तेमाल किया.

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि डीएम को संविधान में असीम शक्ति दी गई है. यह शक्ति जन कल्याण के लिए दी गई है, लेकिन इस शक्ति का इस्तेमाल अगर गलत तरीके से किया जाता है तो राज्य दमनकारी राज्य में बदल सकता है.

बंगाल की रहने वाली आकृति चौधरी डीयू की छात्रा है. नोएडा प्रशासन का आरोप है कि मजदूर आंदोलन के दौरान आकृति ने लोगों को भड़काया, जिसके कारण हिंसा भड़की.

वकील नहीं दे पाए जवाब, ऐसे फंसी नोएडा DM

1. याचिकाकर्ता के वकील ने सबसे पहले गिरफ्तारी की तारीख में हेरफेर का आरोप लगाया. वकील का कहना था कि आकृति को 11 अप्रैल को ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. याचिकाकर्ता की तरफ से इसको लेकर चैट और अन्य सबूत पेश किए गए. याचिकाकर्ता का कहना था कि 12 अप्रैल को उसकी गिरफ्तारी घोषित की गई. यानी पूरे एक दिन आकृति अवैध हिरासत में रही. याचिकाकर्ता का कहना था कि नोएडा में 13 अप्रैल को हिंसा भड़की, उस दिन आकृति पुलिस कस्टडी में थी.

2. नोटिस और जनरल डायरी को लेकर सवाल उठाया गया. जस्टिस अचल सचदेवा ने कहा कि 12 अप्रैल को 10.30 बजे जनरल डायरी तैयार किया गया. यानी उस वक्त आकृति को गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद उसे नोटिस दिया गया. नोटिस में तारीख का उल्लेख है, लेकिन समय का नहीं. नोटिस प्रिंटेड है. इसलिए यह शक गहरा जाता है कि जनरल डायरी तैयार करने से पहले उसे नोटिस थमाया गया था.

3. कोर्ट ने नोएडा डीएम से कहा कि आप यह सबूत दीजिए, जिसमें आकृति कोई देश विरोधी स्लोगन का इस्तेमाल कर रही है या किसी को हिंसा के लिए भड़का रही है. नोएडा डीएम और पुलिस की तरफ से एक वीडियो पेश किया गया, जिसमें ऐसा कुछ नहीं था. कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करना किसी भी नागरिक का अधिकार है. इसे खत्म नहीं किया जा सकता है.

4. कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा कि या तो एनएसए लगाते वक्त नोएडा डीएम ने पुलिस की रिपोर्ट को वैरिफाई नहीं किया. या उसने जानबूझकर ऐसा किया, ताकि डर से आगे कोई प्रदर्शन न कर सके. आकृति को एनएसए के तहत हिरासत में रखना अनुच्छेद 21 के तहत अपराध है. नोएडा के डीएम इसके लिए दोषी है.

5. हाई कोर्ट ने जब नोएडा डीएम पर इस मामले के लिए जब 50 लाख रुपए जुर्माना लगाने पर विचार शुरू किया, तब राज्य सरकार के वकील ने इसका विरोध किया. आखिर में कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार के वकील का यह तर्क सही है कि आकृति को सिर्फ एक दिन हिरासत में रखा गया था. वह अभी न्यायिक हिरासत में है. इसलिए 5 लाख का जुर्माना लगाया जाता है.

डीएम के खिलाफ हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने अपने फैसले में नोएडा डीएम के खिलाफ सख्त टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि अगर मनमानी करने वाली ब्यूरोक्रेसी का ‘तानाशाही’ वाला रवैया जारी रहा, तो उत्तर प्रदेश एक ऑर्वेलियन डिस्टोपिया (एक ऐसी जगह जहां सरकार का लोगों पर पूरा कंट्रोल होता है और आजादी नहीं होती) में बदल सकता है.

हाई कोर्ट ने आगे कहा कि अधिकारियों को यह याद रखनी चाहिए कि उनकी वफादारी संविधान के प्रति है, ना कि राज्य सरकार के प्रति.

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