ममता की गुगली में फंस गयी ईडी ?

  • आईपैक तो बहाना है दरअसल ममता को निपटाना है
  • सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी, कोर्ट ने ईडी के आरोपों को गंभीर माना
  • डीजीपी राजीव कुमार को हटाने के लिए ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। जो लड़ाई लोकतंत्र की पिच पर लड़ी जानी चाहिए थी वह लड़ाई इस वक्त सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर है। आज की बड़ी खबर यही है कि सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ईडी के खिलाफ दायर याचिका निबटा दी गयी है। यानि की ईडी वर्सेज सीएम के मैच में ईडी एक गोल से आगे है। ईडी द्वारा राज्य के डीजीपी को हटाने वाली याचिका सूचिबद्ध है और उस पर फैसला आना बाकी है। पश्चिम बंगाल में आई-पैक पर ईडी की छापेमारी विवाद के बाद एजेंसी ने राज्य के डीजीपी राजीव कुमार को हटाने के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है। ईडी का आरोप है कि ममता बनर्जी और डीजीपी राजीव कुमार ने उसकी जांच में बाधा डालने का काम किया।

ईडी की मांग निलंबित हो डीजीपी

ईडी की कहानी के मुताबिक यह कोई साधारण फील्डिंग नहीं थी बल्कि सीधा सीधा नो बॉल और फाउल प्ले था। एजेंसी का दावा है कि रेड के जांच बाधित हुई। ईडी इसे सिर्फ जांच में रुकावट नहीं बल्कि कानून की अवमानना और गंभीर अपराध बता रही है। इसी आधार पर अब ईडी ने सीधा सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है और मांग की है कि बंगाल के डीजीपी राजीव कुमार को निलंबित किया जाए।

ममता बनर्जी का क्लियर स्टैंड

एक ओर से ईडी पूरी रफ्तार में बाउंसर फेंक रही है तो दूसरे छोर पर ममता बनर्जी गुगली पर गुगली डालकर खेल पलटने में जुटी हैं। पश्चिम बंगाल की राजनीतिक लड़ाई का रोमांच इस समय सुप्रीम कोर्ट में महसूस किया जा सकता है जहां अंपायर का फैसला ही मैच का नतीजा तय करेगा। आई पैक पर ईडी की छापेमारी से शुरू हुआ यह मुकाबला अब महज एक जांच नहीं रहा। यह सीधा सीधा संघीय ढांचे बनाम केंद्रीय एजेंसी राज्य की सत्ता बनाम दिल्ली का हुक्म और चुनावी रणनीति बनाम जांच की राजनीति का महायुद्ध बन चुका है। ईडी का आरोप है कि जब उसने आई पैक पर रेड मारी तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद डीजीपी राजीव कुमार के नेतृत्व में पुलिस बल के साथ मैदान में उतर आयीं और ईडी की गेंदबाजी को बीच ओवर में ही रोक दिया।

ईडी के आरोपों पर कोर्ट गंभीर

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह जरूर स्पष्ट किया कि आरोपों की प्रकृति गंभीर है लेकिन किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पक्षों को सुनना आवश्यक है। यही वजह है कि अदालत ने तत्काल कोई आदेश पारित करने से परहेज किया। यह रुख बताता है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है। जहां एक ओर केंद्रीय एजेंसी की जांच का अधिकार है वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार और संघीय ढांचे की मर्यादा भी दांव पर लगी है। फिलहाल फैसला टल गया है लेकिन लड़ाई खत्म नहीं हुई। अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को जांच के दायरे तक सीमित रखता है या इसे केंद्र-राज्य टकराव की बड़ी संवैधानिक बहस में बदल देता है।

क्या है हकीकत

ईडी ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने और जांच के निर्देश दिए जाएं। साथ ही राज्य सरकार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और डीजीपी राजीव कुमार के साथ कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा और अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। मतलब साफ है कि ईडी इस मैच को ड्रा पर छोडऩे के मूड में नहीं हैं वह सीधा नाक आउट चाहती है। लेकिन दूसरी तरफ सीएम ममता बनर्जी भी पूरी तैयारी से उतरी हैं। उनका नैरेटिव यह है कि आई-पैक पर रेड महज जांच नहीं बल्कि चुनावी रणनीति पर हमला है। ममता के मुताबिक ईडी बंगाल चुनाव से पहले उनकी टीम की प्लेबुक, डेटा और रणनीति हथियाना चाहती थी। यही वजह है कि मुख्यमंत्री खुद मैदान में उतरीं क्योंकि उनके लिए यह सिर्फ़ जांच नहीं बल्कि लोकतंत्र की आखऱिी ओवर की लड़ाई थी।

ममता पर बीजेपी का प्रहार

भारतीय जनता पार्टी के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने आई-पैक के कार्यालय और सह-संस्थापक प्रतीक जैन के घर छापेमारी से जुड़े मामले में सुनवाई से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने संविधान की नींव को कमजोर करने की कोशिश की है। वह अपने इरादों में कभी कामयाब नहीं होंगी। भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि देश में पहली बार ऐसा हुआ है कि जब ईडी या किसी सरकारी जांच एजेंसी ने छापेमारी की तो उस राज्य के मुख्यमंत्री ने राज्य पुलिस को लाकर दखल दिया और कार्रवाई में रुकावट डाली। यह संवैधानिक परंपराओं और मर्यादा का साफ उल्लंघन है।

फैसला नहीं आया, सुनवाई जारी

आई-पैक पर ईडी की छापेमारी से उपजा बंगाल का राजनीतिक कानूनी संघर्ष अब सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर पूरी गंभीरता के साथ दर्ज हो चुका है। शीर्ष अदालत ने ईडी द्वारा लगाए गए आरोपों को हल्के में लेने से साफ इनकार करते हुए यह संकेत दिया है कि मामला सिर्फ़ प्रक्रिया का नहीं बल्कि संवैधानिक और संस्थागत टकराव का है। हालांकि कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है और मामले की सुनवाई जारी रखने का संकेत दिया है। सुप्रीम कोर्ट में ईडी की ओर से यह दावा किया गया कि आई-पैक पर छापेमारी के दौरान राज्य की मशीनरी ने जांच में सीधी बाधा डाली। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मौके पर पहुंचने पुलिस बल की मौजूदगी और कथित तौर पर दस्तावेज व इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए जाने के आरोपों को एजेंसी ने गंभीर अपराध और कानून की अवमानना बताया। इन्हीं दलीलों के आधार पर ईडी ने डीजीपी राजीव कुमार पर कार्रवाई और सीबीआई जांच की मांग की है।

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