74 साल में पहली बार राज्यसभा में घटेगा कांग्रेस का दबदबा, इस राज्य से नहीं जाएगा एक भी सांसद
राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है... 74 साल में पहली बार ऐसी स्थिति बनती दिख रही है...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं.. राज्य की चार राज्यसभा सीटें रिक्त हो रही हैं.. इन सीटों पर 18 जून को चुनाव होने वाला है.. नामांकन की प्रक्रिया चल रही है और 8 जून इसकी आखिरी तारीख है.. अभी तक न तो सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने और न ही विपक्षी कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं.. लेकिन माना जा रहा है कि जल्द ही बड़े ऐलान हो सकते हैं..
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 जून को गुजरात.. और दमन के दौरे पर रहेंगे.. जिसको लेकर सूत्रों का कहना है कि पीएम मोदी के इस दौरे के दौरान.. या उसके ठीक बाद बीजेपी अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर सकती है.. बीजेपी से जुड़े सूत्र बताते हैं कि पार्टी के संसदीय बोर्ड की बैठक में उम्मीदवारों के नाम तय हो चुके हैं.. नामांकन की सारी तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं.. 6 जून को बीजेपी उम्मीदवारों की घोषणा कर सकती है..
गुजरात में बीजेपी की स्थिति बहुत मजबूत है.. पार्टी के पास विधानसभा में भारी बहुमत है.. ऐसे में चारों राज्यसभा सीटों पर बीजेपी की जीत लगभग तय मानी जा रही है.. विपक्षी दल कांग्रेस या आम आदमी पार्टी अपने उम्मीदवार नहीं उतार सकते.. क्योंकि उनके पास पर्याप्त संख्या नहीं है.. इसलिए यह संभव है कि चारों सीटें निर्विरोध बीजेपी के खाते में चली जाएं.. गुजरात विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 182 है.. लेकिन एक सीट खाली होने के कारण फिलहाल 181 सदस्य हैं.. बीजेपी के पास 161 विधायक हैं.. कांग्रेस के पास सिर्फ 12 विधायक हैं.. और आम आदमी पार्टी के पास 4 विधायक हैं.. AAP ने एक विधायक को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निकाल दिया है.. इसके अलावा दो निर्दलीय विधायक भी हैं..
जानकारी के मुताबिक राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार जिताने के लिए पर्याप्त वोट चाहिए होते हैं.. कांग्रेस के पास इतने वोट नहीं हैं कि वह अपना उम्मीदवार जिता सके.. इसलिए कांग्रेस इस बार गुजरात से राज्यसभा में कोई सांसद नहीं भेज पाएगी.. गुजरात राज्य की स्थापना के बाद यह पहला मौका होगा.. जब कांग्रेस का कोई राज्यसभा सांसद गुजरात से नहीं होगा.. शक्ति सिंह गोहिल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं.. और उनकी राज्यसभा सीट का कार्यकाल खत्म हो रहा है.. उनके साथ ही बीजेपी के तीन सांसदों नरहरि अमीन, रामभाई मोकरिया और रमीलाबेन बारा का भी कार्यकाल पूरा हो रहा है.. इन चार सीटों पर नए चुनाव हो रहे हैं..
वहीं बीजेपी इस बार स्थानीय चेहरों पर ज्यादा जोर दे सकती है.. पिछले चुनाव में पार्टी ने जेपी नड्डा और विदेश मंत्री एस. जयशंकर जैसे बड़े नेताओं को गुजरात से राज्यसभा भेजा था.. लेकिन इस बार जमीनी स्तर के नेताओं को मौका मिल सकता है.. पार्टी के स्थानीय नेताओं का कहना है कि.. उम्मीदवारों का फैसला केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा.. फिर भी चर्चा है कि बीजेपी गुजरात के बाहर के एक या दो नेताओं को भी यहां से राज्यसभा भेज सकती है.. हालांकि, ज्यादातर संभावना यही है कि स्थानीय चेहरों को प्राथमिकता दी जाएगी..
आपको बता दें कि 2027 में गुजरात विधानसभा चुनाव होने हैं.. ऐसे में बीजेपी उन नेताओं को राज्यसभा भेजना चाहेगी.. जो पार्टी को संगठन स्तर पर मजबूत कर सकें.. और आगामी चुनाव में मदद करें.. बीजेपी गुजरात में सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर फैसले लेती है.. माना जा रहा है कि अगर चारों उम्मीदवार गुजरात से ही चुने गए तो इनमें से एक पाटीदार (पटेल) समाज से हो सकता है.. इसके अलावा एक ओबीसी, एक अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति.. और एक महिला उम्मीदवार भी हो सकती है..
पाटीदार समाज गुजरात की राजनीति में बहुत महत्वपूर्ण है.. बीजेपी इस वर्ग को संतुष्ट रखना चाहेगी.. महिला उम्मीदवार को मौका देकर पार्टी महिला मतदाताओं को भी संदेश देना चाहेगी.. कांग्रेस के लिए यह चुनाव बहुत निराशाजनक है.. शक्ति सिंह गोहिल के जाने के बाद कांग्रेस गुजरात से पूरी तरह शून्य पर पहुंच जाएगी.. कांग्रेस गुजरात में पहले भी कमजोर रही है.. लेकिन राज्यसभा में एक सीट उसके पास थी.. अब वह भी चली जाएगी..
बता दें कि कांग्रेस के पास 12 विधायक हैं.. जो नामांकन तो करा सकते हैं.. लेकिन जीतने लायक वोट नहीं हैं.. इसलिए कांग्रेस शायद अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी.. आम आदमी पार्टी के पास तो और भी कम ताकत है.. ऐसे में चारों सीटें बीजेपी के पास बिना मुकाबले चली जा सकती हैं.. राज्यसभा चुनाव अप्रत्यक्ष चुनाव होता है.. जिसमें विधायक ही वोट डालते हैं.. गुजरात में बीजेपी के 161 विधायकों के कारण पार्टी आसानी से चारों उम्मीदवारों को जिता सकती है.. नामांकन 8 जून तक होगा.. अगर कोई विपक्षी उम्मीदवार नहीं उतरा तो 18 जून को चुनाव की बजाय निर्विरोध जीत हो सकती है..
बीजेपी ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है.. उम्मीदवारों के नाम लगभग तय हैं.. अब सिर्फ आधिकारिक घोषणा का इंतजार है.. पीएम मोदी के 5 जून के दौरे को इस घोषणा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.. गुजरात लंबे समय से बीजेपी का गढ़ रहा है.. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह दोनों गुजरात से आते हैं.. यही वजह है कि पार्टी यहां बहुत मजबूत है.. राज्यसभा में भी गुजरात बीजेपी के लिए सुरक्षित रास्ता रहा है.. पिछले कई चुनावों में बीजेपी ने यहां से अपने बड़े नेताओं को राज्यसभा भेजा है.. इस बार भी पार्टी गुजरात की राजनीति को और मजबूत करने के लिए नए चेहरों को मौका दे सकती है..



