डीजल संकट से किसान बेहाल, मोदी के गुजरात में तेल का अकाल!
डीजल की भारी किल्लत से किसान परेशान हैं। खेतों में काम ठप होने की नौबत आ गई है... किसानों ने प्रशासन से तत्काल व्यवस्था की...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः जूनागढ़ जिले में इन दिनों किसानों में गुस्सा.. और मायूसी दोनों देखने को मिल रही है.. बुआई का मौसम चल रहा है.. लेकिन खेतों में ट्रैक्टर चलाने के लिए डीजल नहीं मिल पा रहा है.. जिसको लेकर कई किसान बैलगाड़ी लेकर जूनागढ़ जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे.. और एक प्रार्थना पत्र सौंपा.. और उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए.. तत्काल डीजल उपलब्ध कराने और बैंक किश्तों में छूट देने की मांग की..
जूनागढ़ जिला एवं शहर कांग्रेस कमेटी की ओर से दायर इस याचिका में कहा गया है कि.. पूरे गुजरात में डीजल की कमी ने किसानों.. और आम जनता दोनों को मुश्किल में डाल दिया है.. खासकर जूनागढ़ जैसे कृषि प्रधान जिले में यह समस्या और गंभीर हो गई है.. किसान कह रहे हैं कि अगर समय पर डीजल नहीं मिला.. तो इस साल की फसल की तैयारी पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी..
आपको बता दें कि बुधवार को किसान कलेक्टर कार्यालय पहुंचे.. उनमें ज्यादातर छोटे और मध्यम किसान थे.. जगतनाथ गांव के एक किसान ने बताया कि उनकी एकमात्र आजीविका खेती है.. मानसून की बुआई से पहले उन्हें अपनी कृषि भूमि को पांच बार ट्रैक्टर से जोतना पड़ता है.. लेकिन डीजल न मिलने के कारण ट्रैक्टर खड़ा पड़ा है.. और उन्होंने कहा कि हमारे पास बैलगाड़ी है, उसी से यहां आए हैं.. अगर डीजल मिल जाता तो ट्रैक्टर से आते.. लेकिन अब मजबूरी में बैलगाड़ी का सहारा लेना पड़ा है..
कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि डीजल की कमी सिर्फ जूनागढ़ तक सीमित नहीं है.. पूरे राज्य में पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं.. कई जगहों पर लोग दो-दो दिन लाइन में खड़े रहकर भी डीजल नहीं पा रहे हैं.. किसानों के साथ-साथ ट्रक, बस, टैक्सी.. और अन्य व्यावसायिक वाहनों के मालिक भी बुरी तरह फंस गए हैं..
गुजरात में मानसून आने वाला है.. किसान खेत तैयार करने में जुटे हुए हैं.. लेकिन डीजल की कमी ने सारी तैयारियां ठप कर दी हैं.. एक किसान ने बताया कि ट्रैक्टर में डीजल नहीं है तो खेत कैसे जोतेंगे.. अगर खेत नहीं जुते तो बीज कैसे बोएंगे.. पूरी फसल प्रभावित हो जाएगी..
जगतनाथ के किसानों की स्थिति और भी खराब है.. वे बताते हैं कि हर किसान को कम से कम 10 लीटर डीजल मिल जाए तो उनकी 80 प्रतिशत जरूरतें पूरी हो सकती हैं.. लेकिन फिलहाल इतना डीजल भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है.. केंद्र सरकार पर आरोप है कि उसने इस बार डीजल की आपूर्ति पर ध्यान नहीं दिया.. नतीजा यह है कि किसान संकट में हैं..
आजकल ज्यादातर किसान बैंक से लोन लेकर ट्रैक्टर खरीदते हैं.. हर महीने ईएमआई चुकानी पड़ती है.. किसान बताते हैं कि ट्रैक्टर चलाने से जो अतिरिक्त समय मिलता है.. उसी में वे दूसरों के खेत जोतकर किराया कमाते हैं.. और किश्त चुकाते हैं.. लेकिन डीजल न मिलने से ट्रैक्टर खड़ा है, कमाई बंद है और किश्त का बोझ बढ़ गया है..
कांग्रेस की याचिका में मांग की गई है कि सरकार किसानों को कम से कम 6 महीने तक ट्रैक्टर की किश्त चुकाने से छूट दे.. अगर ऐसा नहीं किया गया तो कई किसान बैंक की किश्त नहीं दे पाएंगे.. और उनके ट्रैक्टर जब्त हो सकते हैं.. एक किसान ने भावुक होकर कहा कि ट्रैक्टर हमारी पूंजी है.. अगर वह छिन गया तो परिवार कैसे चलेगा..
डीजल की कमी का असर सिर्फ किसानों तक नहीं.. बल्कि छोटे-बड़े व्यावसायिक वाहन मालिकों पर भी पड़ रहा है.. ट्रक, टेंपो, बस, ऑटो और अन्य यात्री वाहन मालिक मुश्किल में हैं.. वे माल ढुलाई और यात्री परिवहन से परिवार चलाते हैं.. और बैंक की किश्तें भरते हैं.. जूनागढ़ में कई ट्रक ड्राइवर और मालिक बताते हैं.. कि डीजल न मिलने से वाहन खड़े पड़े हैं.. कमाई बंद है, लेकिन बैंक की किश्त और टैक्स जमा करना जरूरी है.. अगर किश्त नहीं भरी गई तो बैंक वाहन जब्त कर सकता है.. कांग्रेस कमेटी ने इन सभी वाहनों के लिए भी 6 महीने की छूट की मांग की है..



