पढ़ाई के लिए मिला मोबाइल, बदल गया बच्चे का व्यवहार; गोरखपुर में स्कूल तक पहुंचा मामला

गोरखपुर में कक्षा चार के छात्र के मोबाइल और इंटरनेट इस्तेमाल को लेकर परिवार और स्कूल चिंतित हुए। विशेषज्ञ ने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर निगरानी और काउंसिलिंग की सलाह दी।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: गोरखपुर में एक परिवार उस समय चिंता में पड़ गया, जब ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बच्चे को दिया गया मोबाइल उसके व्यवहार में बदलाव की वजह बन गया। परिवार के मुताबिक, कक्षा चार में पढ़ने वाले छात्र की मोबाइल और इंटरनेट पर निर्भरता धीरे-धीरे बढ़ती गई। बाद में उसके व्यवहार को लेकर घर और स्कूल दोनों जगह चिंता सामने आई। मामले के बाद परिवार ने विशेषज्ञ से मदद लेने का फैसला किया।

ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मिला मोबाइल, बढ़ती गई निर्भरता

परिवार के अनुसार, कोरोना काल में ऑनलाइन कक्षाओं के लिए बच्चे को मोबाइल दिया गया था। शुरुआत में पढ़ाई के लिए इस्तेमाल होने वाला फोन धीरे-धीरे गेम और इंटरनेट की आदत का माध्यम बन गया। करीब छह महीने बाद मोबाइल नहीं मिलने पर बच्चा जिद और गुस्सा करने लगा।

परिजनों को उसके लंबे समय तक मोबाइल लेकर अकेले रहने पर शक हुआ। फोन की जांच में आपत्तिजनक ऑनलाइन सामग्री मिलने के बाद परिवार ने बच्चे को समझाने के साथ विशेषज्ञ से सलाह ली।

स्कूल में भी सामने आई व्यवहार संबंधी शिकायत

करीब दो महीने पहले स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों को बुलाकर बच्चे के व्यवहार से जुड़ी शिकायतों की जानकारी दी। परिवार के मुताबिक, स्कूल में शिक्षिका को लेकर आपत्तिजनक चित्र बनाने और सहपाठियों के साथ अनुचित व्यवहार की शिकायत सामने आई थी।

इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने बच्चे का नाम स्कूल से हटा दिया और परिवार को विशेषज्ञ की मदद लेने की सलाह दी। परिवार अब उसकी काउंसिलिंग करा रहा है।

विशेषज्ञ बोले- डांटने के बजाय समझना जरूरी

मनोवैज्ञानिक डॉ. आकृति पांडेय के अनुसार, कम उम्र में बिना निगरानी इंटरनेट और आपत्तिजनक सामग्री तक पहुंच बच्चों के व्यवहार को प्रभावित कर सकती है। ऐसे मामलों में बच्चे को शर्मिंदा या प्रताड़ित करने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अभिभावकों को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर उम्र के अनुरूप निगरानी रखनी चाहिए और उनसे खुलकर बातचीत करनी चाहिए। समस्या गंभीर हो तो बाल मनोवैज्ञानिक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लेना बेहतर है।

रिपोर्ट – अमरेंद्र पांडेय, गोरखपुर

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