डिग्री लेकर निकल रहे युवा, लेकिन दिशा कौन देगा? कहकशां सिद्दीकी ने बताई शिक्षा की बड़ी जरूरत
गोरखपुर में शिक्षाविद् कहकशां सिद्दीकी ने कहा कि युवा भारत को सिर्फ डिग्री नहीं, सही दिशा चाहिए। उन्होंने AI, कौशल, आलोचनात्मक चिंतन और शिक्षक की भूमिका पर जोर दिया।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: गोरखपुर में शिक्षाविद् कहकशां सिद्दीकी ने कहा कि भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन इस ताकत को सही दिशा देने के लिए शिक्षा को केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने रटने की बजाय सोचने, सवाल पूछने, समस्याओं का समाधान खोजने और समाज के प्रति जिम्मेदारी विकसित करने पर जोर दिया।
सूचना और ज्ञान में फर्क समझना जरूरी
कहकशां सिद्दीकी के अनुसार इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने विद्यार्थियों के लिए सूचनाओं तक पहुंच आसान कर दी है, लेकिन किसी सवाल का जवाब हासिल कर लेना ज्ञान नहीं है। विद्यार्थी उस जानकारी को समझे, उसका विश्लेषण करे और वास्तविक जीवन में इस्तेमाल करे, तभी सीखने का उद्देश्य पूरा होगा। उन्होंने आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता, संवाद और सहयोग को शिक्षा का अहम हिस्सा बनाने की जरूरत बताई।
AI शिक्षक का विकल्प नहीं, सहयोगी बने
उन्होंने कहा कि AI शिक्षा में व्यक्तिगत सीखने, डिजिटल सामग्री और वर्चुअल प्रयोगशालाओं जैसे क्षेत्रों में मददगार हो सकता है, लेकिन शिक्षक की भूमिका खत्म नहीं हो सकती। उनके मुताबिक भविष्य की शिक्षा व्यवस्था में शिक्षक, विद्यार्थी और तकनीक के बीच संतुलन जरूरी है। उन्होंने शिक्षकों के नियमित प्रशिक्षण और उन्हें शोध व नवाचार के अवसर देने पर भी जोर दिया।
नीति की सफलता कक्षा तक पहुंचने से होगी
कहकशां सिद्दीकी ने NEP 2020 के तहत शिक्षा पर सार्वजनिक निवेश को GDP के 6 प्रतिशत तक ले जाने के लक्ष्य, आधारभूत साक्षरता, कौशल आधारित शिक्षा और तकनीकी समावेशन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नवाचार सिर्फ स्मार्ट क्लास तक सीमित नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों को पानी, प्रदूषण, कृषि, यातायात और स्थानीय रोजगार जैसी वास्तविक समस्याओं पर परियोजनाओं के जरिए समाधान खोजने का अवसर मिलना चाहिए। ग्रामीण-शहरी शिक्षा अंतर कम करना, भारतीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण सामग्री और रोजगार-योग्यता बढ़ाना भी जरूरी है।
रिपोर्ट – अमरेंद्र पांडेय, गोरखपुर
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