पहले हादसा, फिर चेतावनी! गोरक्षघाट पर दो मौतों के बाद सामने आया दरारों का दावा
गोरखपुर के गोरक्षघाट पर ढांचा गिरने से दो अधिवक्ताओं की मौत के बाद चेतावनी पोस्टर लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों ने कई चबूतरों में दरार का दावा करते हुए तकनीकी जांच की मांग की है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: राप्ती नदी के किनारे बने घाटों पर अब चेतावनी के पोस्टर नजर आ रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि ये चेतावनी दो जिंदगियां जाने से पहले क्यों नहीं दिखाई गई? रविवार को गोरक्षघाट पर गुंबदनुमा ढांचा अचानक भरभराकर गिरने से दो अधिवक्ताओं की मौत के बाद नगर निगम ने मलबा हटाया और कई जगह लोगों को निर्माणों से दूर रहने की हिदायत दी है।
ढांचा गिरा, दो अधिवक्ताओं की चली गई जान
रविवार सुबह करीब 11:30 बजे दोनों अधिवक्ता गोरक्षघाट पर चबूतरे पर बैठे थे। इसी दौरान उनके ऊपर बना गुंबदनुमा ढांचा अचानक गिर गया। मलबे में दबने से आलोक अस्थाना और संजय सिंह गंभीर रूप से घायल हुए।
आलोक अस्थाना ने हादसे के करीब 30 मिनट बाद दम तोड़ दिया। वहीं, संजय सिंह की मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद परिवारों में मातम और स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
पोस्टर लगे तो सवाल भी उठे
हादसे के बाद नगर निगम ने मलबा हटाने के साथ मौके पर खड़े पिलर भी तोड़ दिए। घाट के आसपास चेतावनी पोस्टर और बैनर लगाए गए हैं, जिनमें बारिश और बाढ़ की आशंका को देखते हुए गेट और चबूतरों से दूरी बनाए रखने की अपील की गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि घाट पर रोज बड़ी संख्या में लोग योग, टहलने और घूमने आते हैं। ऐसे में यदि निर्माणों में खतरे की आशंका थी तो पहले ही सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
7-8 चबूतरों में दरार का दावा, जांच की मांग
स्थानीय लोगों ने गोरक्षघाट के करीब 7-8 चबूतरों में दरारें होने का दावा किया है। राजघाट के प्रवेश द्वार के एक पिलर में भी दरार दिखने की बात कही जा रही है।
लोगों की मांग है कि गोरक्षघाट, राजघाट समेत राप्ती किनारे सभी घाटों के निर्माणों की विशेषज्ञों से तकनीकी जांच कराई जाए। जहां खतरा हो, वहां बैरिकेडिंग कर आवाजाही रोकी जाए। लोगों का कहना है कि केवल चेतावनी पोस्टर काफी नहीं, समय रहते तकनीकी जांच और कार्रवाई ही हादसे रोक सकती है।
रिपोर्ट- अमरेंद्र पांडेय, गोरखपुर
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