विरासत पर भ्रष्टाचार का प्रहार, मौन है सरकार
हुसैनाबाद का पूरा संचालन निजी हाथों में सौंपने का खेल? लखनऊ विकास प्राधिकरण के नए टेंडर में करोड़ोंं की धांधली

विरोध प्रदर्शन करके मामले को करेंगे उजागर
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लखनऊ के हुसैनाबाद ट्रस्ट के अंतर्गत आने वाली ऐतिहासिक संपत्तियों और स्मारकों को निजी हाथों में देने या उनके प्रबंधन के निजीकरण की खबरें समय-समय पर चर्चा में रही हैं। इसबार फिर वह सुर्खियों में है। अबकी बार एक टेंडर के लिए जिस पर भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
लखनऊ के स्थानीय अधिवक्ता रोहितकांत ने लखनऊ मंडलायुक्त व लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष से इस टेंडर प्रक्रिया को रोकने की मांग की है। बता दें विधानिक आपत्ति ने लखनऊ विकास प्राधिकरण के गलियारों में हडक़ं प मचा दिया है। अब इसके विरोध का फैसला किया गया है। दावा किया गया है तक हुसैनानाबाद के टूरिस्ट फैसिसलटेशन सेंटर के सचालन लिए जो नया टेंडर तनकाला गया है, उसमें ऐसी शर्ते जोड़ी गई है जो न केवल सरकारी खजाने को चूना लगा रही हैं, बल्कि किसी खास कंपनी को फायदा पहुुंचाने के लिए फिट की गई हंै। दो महीने के भीतर एक ही काम के लिए दो अलग-अलग टेंडर तनकाले गए। जब दोनों टेंडरों में तुलना की गई तो धंाधली की बू आने लगी। अमीरों के लिए रास्ता खोला-पुराने टेंडर में कंपनी का सालाना टर्नओवर 4 करोड़ था उसे नए टेंडर में बिना कोई कारण बताए 1० करोड़ कर दिया गया। वहीं काम के अनुभव की शर्तों को ढीला कर दिया गया। पहले सररकारी विभाग ों के लिए काम का अनुभव अनिवार्य था, लेकिन नए टेंडर में हटाकर किसी भी प्राइवेट अनुभव क मान्य कर दिया गया है। पुराने टेंडर में सरकार को 2० लाख का सालाना किराया मिलना था। नए टेंडर में इसे घटाकर 8 लाख कर दिया गया है। यानि सरकार को लगभग 4० लााख का नुकसान। ये सीधे भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। वहीं याचिकक र्ता ने प्रमुख सचिच और कमिश्नर से मांग की है इस संदिग्ध टेंडर प्रक्रिया तुरंत रोक लगाई जाए। उन फाइलों की जांच हों जिन्होंने इन बदलावों को मंजूरी दी है। साथ ही चेतावनी दी गई है तक अगर 48 घंटे के भीतर कार्रवाई नही हुई,तो मामला हाई कोर्ट और जनहित याचिका जाएगा । अब देखना यह है तक शासन इस सफेद हाथी बन चुके टेंडर की जांच करवाता है या हुसैनाबाद की विरासम को खामोशी से निजी स्वार्थ की भेंट चढ़ा दिया जाता है।
पूर्व आईएएस की पत्नी पर मेहरबानी
पूरे मामले में एक नाम बार-बार उभरा राष्टï्रीय वंदना कला केंद्र जो तक पूर्व आईएएस की पत्नी की कम्पनी है। इस पर आरोप कि इस कंपनी ने पहली निविदा में भाग नहीं लिया था। दूसरी निविदा में पात्रता और वित्तीय ढांचे को इस प्रकार पुनगार्ठित किया गया यह संस्था सहज रूप से योग्य हो जाए। यह केवल एक अनुमान नहीं, बल्कि साक्ष्यों के आधार पर दर्शाता है कि संबंधित को लाभ देने की कोशिश की गई है।
चहेतो को दिया रेड कार्पेट वेलकम
आर ोप है तक टेंडर की शर्तों का इस तरह बदला गया है कि छोटे और काबिल स्थानीय ठेकेदार रेस से बाहर हो जाए और ताकि किसी खास बड़ी मछली को एंट्री दिलाई जा सके।



