गुजरात में छात्रों की आत्महत्या पर घिरी सरकार, NCRB रिपोर्ट से मचा हड़कंप, कांग्रेस ने उठाए सवाल

NCRB आंकड़ों को लेकर गुजरात की राजनीति गरमा गई है... छात्रों की बढ़ती आत्महत्याओं, शिक्षा व्यवस्था... और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः भारत में शिक्षा युवाओं के सपनों को पूरा करने का माध्यम मानी जाती है.. लेकिन आजकल यह सपना कई परिवारों के लिए दर्द बन गया है.. NCRB के हालिया आंकड़ों के अनुसार.. देश में छात्रों और युवाओं की आत्महत्याओं की संख्या लगातार बढ़ रही है.. गुजरात में भी यह स्थिति चिंताजनक है.. गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता डॉ. मनीष दोशी ने इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार पर सवाल उठाए हैं.. और उन्होंने कहा कि शिक्षा के नाम पर लूट, पेपर लीक.. और परीक्षा के दबाव के कारण छात्रों की जान जा रही है..

आपको बता दें कि यह खबर सिर्फ आंकड़ों की नहीं है.. इसके पीछे हजारों परिवारों का दर्द, माता-पिता की टूटी उम्मीदें.. और युवाओं के अधूरे सपने छिपे हैं.. NCRB के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले चार वर्षों में गुजरात में 1,063 छात्रों ने आत्महत्या कर ली.. यह संख्या साल दर साल बढ़ी है.. 2020-21 में 151 छात्रों ने यह कदम उठाया.. 2022-23 में यह संख्या 161 हो गई.. 2023-24 में 183 और 2024-25 में अकेले 568 छात्रों ने आत्महत्या की.. एक साल में इतनी बड़ी छलांग बेहद चिंताजनक है..

बता दें कि डॉ. मनीष दोशी कहते हैं कि ये आंकड़े गुजरात के लिए खतरे की घंटी हैं.. राज्य में शिक्षा व्यवस्था को ‘वाइब्रेंट’ बनाने का दावा किया जाता है.. लेकिन हकीकत कुछ और ही दिख रही है.. छात्र दिन-रात पढ़ाई करते हैं.. परिवार लाखों रुपये खर्च करते हैं.. लेकिन परीक्षा के दबाव, असफलता.. और भविष्य की अनिश्चितता उन्हें तोड़ देती है.. गुजरात में कई शहरों जैसे अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा आदि में कोचिंग सेंटर्स.. और स्कूल-कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र प्रभावित हो रहे हैं.. कई मामलों में NEET, JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र शामिल हैं.. एक रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा में फेल होने या अच्छे अंक न आने के डर से कई छात्र मानसिक तनाव में चले जाते हैं..

गुजरात की समस्या सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं है.. पूरे देश में यह संकट गहरा रहा है.. NCRB के अनुसार, 2019 से 2024 के बीच 18 साल से कम उम्र के 63,915 बच्चों.. और किशोरों ने आत्महत्या की.. इसका मतलब है कि औसतन हर दिन 40 से ज्यादा किशोर यह कदम उठा रहे हैं.. 2024 में अकेले 14,488 छात्रों ने आत्महत्या की.. जो पिछले वर्षों से ज्यादा है.. 2019 से 2024 तक बच्चों में आत्महत्या के मामलों में करीब 16% की बढ़ोतरी हुई है.. 30 साल से कम उम्र के 12,598 युवाओं ने परीक्षा असफलता के कारण आत्महत्या की.. यानी हर दिन औसतन पांच से ज्यादा युवा परीक्षा के दबाव में अपनी जान दे रहे हैं..

वहीं ये आंकड़े सिर्फ रिपोर्टेड केस हैं.. असल संख्या इससे ज्यादा हो सकती है.. क्योंकि कई मामले परिवार की इज्जत या पुलिस रिपोर्ट न होने के कारण दर्ज नहीं होते.. महाराष्ट्र, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में छात्र आत्महत्याएं सबसे ज्यादा हैं.. लेकिन हर राज्य प्रभावित है.. छात्रों की आत्महत्या के कई कारण हैं.. लेकिन मुख्य रूप से परीक्षा संबंधी दबाव, पेपर लीक, कोचिंग कल्चर, बेरोजगारी.. और मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा शामिल हैं..

 

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