चिकित्सा क्षेत्र में AI का बढ़ता इस्तेमाल: एम्स गोरखपुर ने शुरू की स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने की पहल
कार्यशाला में मेडिकल डेटा के विश्लेषण के साथ ही एक्स-रे और रेडियोलॉजी समेत विभिन्न चिकित्सा प्रक्रियाओं में एआइ की उपयोगिता पर चर्चा की जा रही है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के चिकित्सा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए एम्स गोरखपुर में दो दिवसीय ‘एआइ इन हेल्थकेयर’ कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।
कार्यशाला में आइआइटी मुंबई के विशेषज्ञ चिकित्सकों, फैकल्टी सदस्यों और मेडिकल छात्रों को स्वास्थ्य सेवाओं में एआइ के संभावित उपयोग की जानकारी और प्रशिक्षण दे रहे हैं।
कार्यशाला में मेडिकल डेटा के विश्लेषण के साथ ही एक्स-रे और रेडियोलॉजी समेत विभिन्न चिकित्सा प्रक्रियाओं में एआइ की उपयोगिता पर चर्चा की जा रही है। विशेषज्ञों ने बताया कि बड़ी मात्रा में मेडिकल डेटा का कम समय में विश्लेषण करने में एआइ चिकित्सकों की मदद कर सकता है। एक्स-रे और रेडियोलॉजी जांच में संभावित असामान्यताओं की पहचान कर आवश्यक बिंदुओं की ओर चिकित्सकों का ध्यान आकर्षित करने में भी इसका उपयोग किया जा सकता है।
चिकित्सकों का विकल्प नहीं, तकनीकी सहयोगी बनेगा एआइ
कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि एआइ चिकित्सकों का विकल्प नहीं होगा। इसका इस्तेमाल चिकित्सकों को निर्णय लेने में तकनीकी सहयोग देने वाले सपोर्ट सिस्टम के रूप में किया जाएगा। मरीज के निदान और उपचार का अंतिम निर्णय चिकित्सक ही करेंगे।
डेटा सुरक्षा और गोपनीयता पर भी मंथन
एआइ के इस्तेमाल से जुड़े जोखिम और चुनौतियों पर भी कार्यशाला में चर्चा हो रही है। इसमें मरीजों की गोपनीयता, मेडिकल डेटा की सुरक्षा, तकनीकी परिणामों की सटीकता और जवाबदेही जैसे विषय प्रमुख हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में एआइ के सुरक्षित और प्रभावी इस्तेमाल के लिए इन पहलुओं पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
एम्स गोरखपुर की निदेशक प्रो. विभा दत्ता ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। एआइ चिकित्सकों को बेहतर तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसका उद्देश्य चिकित्सकों का स्थान लेना नहीं, बल्कि उन्हें बेहतर निर्णय लेने में तकनीकी सहायता देना है।
एम्स प्रशासन के अनुसार आने वाले महीनों में चिकित्सा प्रक्रियाओं में एआइ के संभावित इस्तेमाल की दिशा में आगे कदम उठाए जा सकते हैं। इसके लिए तकनीकी प्रशिक्षण, विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श और मरीजों के डेटा की गोपनीयता एवं सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
रिपोर्ट- अमरेंद्र पांडेय, गोरखपुर



