BJP सरकार की खुली पोल | सब्सिडी में डूबा गुजरात बजट, विकास पर चल रही कैंची!
गुजरात सरकार का बजट अब विकास से ज्यादा वेतन-पेंशन और सब्सिडी के बोझ में दबता जा रहा है... वर्ष 2025-26 के बजट में कुल 3.70 लाख करोड़...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात भारत का एक प्रमुख औद्योगिक राज्य है.. जो अपनी तेज विकास दर के लिए जाना जाता है.. लेकिन हाल के वर्षों में राज्य के बजट पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है.. बजट का बड़ा हिस्सा अब विकास कार्यों की बजाय कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और विभिन्न सब्सिडी पर खर्च हो रहा है.. यह स्थिति राज्य की वित्तीय सेहत को कमजोर कर सकती है.. और भविष्य की बड़ी योजनाओं को प्रभावित कर सकती है.. वर्ष 2025-26 के बजट में कुल व्यय अनुमानित रूप से 3.32 लाख करोड़ रुपये है.. जो पिछले वर्ष की तुलना में 17 प्रतिशत अधिक है.. लेकिन इसमें से एक बड़ा हिस्सा कमिटेड एक्सपेंडिचर यानी प्रतिबद्ध व्यय पर जा रहा है.. जिसमें वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान शामिल हैं.. सब्सिडी को मिलाकर यह हिस्सा कुल राजस्व प्राप्तियों का लगभग 46 प्रतिशत तक पहुंच गया है..
गुजरात सरकार हर साल अपना बजट पेश करती है.. जिसमें राज्य की आय और खर्च का ब्योरा होता है.. बजट दो मुख्य हिस्सों में बंटा होता है.. जिसमें राजस्व व्यय और पूंजीगत व्यय शामिल होता है.. राजस्व व्यय में रोजमर्रा के खर्च जैसे वेतन, पेंशन, सब्सिडी और ब्याज भुगतान आते हैं.. वहीं पूंजीगत व्यय में सड़कें, अस्पताल, स्कूल जैसी नई संपत्तियां बनाने पर खर्च होता है.. जो विकास को बढ़ावा देता है..
वर्ष 2025-26 के बजट में कुल व्यय (ऋण चुकौती को छोड़कर) 3 लाख 32 हजार 150 करोड़ रुपये अनुमानित है.. यह 2024-25 के संशोधित अनुमान 2 लाख 83 हजार 902 करोड़ रुपये से 17 प्रतिशत अधिक है.. राज्य की कुल प्राप्तियां (उधार को छोड़कर) 2 लाख 73 हजार 753 करोड़ रुपये हैं.. जो पिछले वर्ष से भी 17 प्रतिशत ज्यादा हैं.. लेकिन यहां समस्या यह है कि राजस्व अधिशेष (सरप्लस) घट रहा है.. 2025-26 में यह जीएसडीपी का सिर्फ 0.7 प्रतिशत है.. जबकि 2024-25 में 0.8 प्रतिशत था.. जीएसडीपी गुजरात की कुल अर्थव्यवस्था का माप है.. जो 2025-26 में 29 लाख 82 हजार 32 करोड़ रुपये अनुमानित है..
जानकारी के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में बजट का आकार बढ़ा है.. लेकिन खर्च का पैटर्न चिंताजनक है.. 2023-24 में कुल व्यय 2 लाख 70 हजार 270 करोड़ रुपये था.. जो 2022-23 के 2 लाख 29 हजार 950 करोड़ से 18 प्रतिशत अधिक था.. इसी तरह 2024-25 में यह 2 लाख 99 हजार 362 करोड़ रुपये पहुंच गया.. लेकिन इस बढ़ोतरी में विकास पर खर्च की बजाय प्रतिबद्ध व्यय का हिस्सा ज्यादा बढ़ रहा है..
कर्मचारियों का वेतन राज्य बजट का एक बड़ा हिस्सा होता है.. गुजरात में लाखों सरकारी कर्मचारी हैं.. जिनके वेतन और भत्तों पर हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं.. हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि यह खर्च लगातार बढ़ रहा है.. 2024-25 के बजट में वेतन पर 48 हजार 980 करोड़ रुपये का प्रावधान है.. जो 2023-24 के संशोधित अनुमान 44 हजार 528 करोड़ से 10 प्रतिशत अधिक है.. यह कुल राजस्व प्राप्तियों का 21 प्रतिशत है.. 2023-24 में वेतन 45 हजार 94 करोड़ रुपये था.. जो 2022-23 के 40 हजार 513 करोड़ से 11 प्रतिशत ज्यादा था.. अगर हम पिछले पांच वर्षों को देखें.. तो 2020-21 में वेतन खर्च 32 हजार 680 करोड़ रुपये था.. जो 2019-20 के 31 हजार 845 करोड़ से थोड़ा अधिक था.. 2022-23 से 2024-25 तक यह खर्च 40 हजार 513 करोड़ से बढ़कर 48 हजार 980 करोड़ हो गया.. यानी लगभग 21 प्रतिशत की वृद्धि हुई..
वहीं यह वृद्धि क्यों हो रही है.. मुख्य कारण पे कमीशन की सिफारिशें, महंगाई भत्ता.. और नई भर्तियां हैं.. लेकिन समस्या यह है कि वेतन पर इतना खर्च होने से अन्य क्षेत्रों के लिए पैसे कम बचते हैं.. वहीं अगर राज्य को नई सड़कें बनानी हों या अस्पताल सुधारने हों, तो बजट का यह हिस्सा विकास को रोकता है.. पेंशन भी बजट का एक बड़ा हिस्सा है.. सरकारी कर्मचारी रिटायर होने के बाद पेंशन पाते हैं.. और यह खर्च राज्य पर हमेशा रहता है.. 2024-25 में पेंशन पर 26 हजार 424 करोड़ रुपये का प्रावधान है.. जो 2023-24 के 25 हजार 180 करोड़ से 5 प्रतिशत अधिक है.. 2023-24 में यह 21 हजार 529 करोड़ रुपये था.. जो 2022-23 के 23 हजार 543 करोड़ से 9 प्रतिशत कम था.. लेकिन कुल मिलाकर ट्रेंड बढ़ता हुआ है..
आपको बता दें कि पिछले पांच वर्षों में पेंशन खर्च में लगभग 20-25 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है.. फाइनेंस कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार.. 2015-16 में पेंशन राजस्व प्राप्तियों का 10.22 प्रतिशत थी.. जो 2005-06 के 8.38 प्रतिशत से बढ़ी थी.. हाल के वर्षों में यह हिस्सा 12 प्रतिशत तक पहुंच गया है.. जिसका कारण है बढ़ती उम्र की आबादी और पुरानी पेंशन स्कीम.. वहीं नई पेंशन स्कीम से कुछ राहत मिली है.. लेकिन पुराने कर्मचारियों का बोझ अभी भी बड़ा है..
वहीं यह बोझ राज्य की वित्तीय सेहत पर असर डालता है.. अगर पेंशन पर इतना पैसा जाए, तो नए कर्मचारियों की भर्ती या विकास योजनाओं पर कम ध्यान जाता है.. सब्सिडी सरकार की एक महत्वपूर्ण नीति है.. जो किसानों, गरीबों और उद्योगों को मदद देती है.. लेकिन यह भी बजट का बड़ा हिस्सा खा रही है.. 2024-25 में सब्सिडी पर 31 हजार 330 करोड़ रुपये का प्रावधान है.. जो 2023-24 के 28,003 करोड़ से 12 प्रतिशत अधिक है.. इसमें से 39 प्रतिशत कृषि के लिए बिजली सब्सिडी है.. अन्य में टेक्सटाइल उद्योग (1,600 करोड़), रोड ट्रांसपोर्ट (1,155 करोड़) और बड़े उद्योगों को सहायता (1,145 करोड़) शामिल हैं..
2023-24 में सब्सिडी 30 हजार 481 करोड़ रुपये थी.. जो 2022-23 के 26 हजार 511 करोड़ से 15 प्रतिशत ज्यादा थी.. इसमें कृषि को 46 प्रतिशत मिला.. पिछले पांच वर्षों में सब्सिडी खर्च में औसतन 10-15 प्रतिशत सालाना वृद्धि हुई है.. एनआईटीआई आयोग की रिपोर्ट के अनुसार.. 2022-23 में सब्सिडी जीएसडीपी का 1.2 प्रतिशत.. और कुल व्यय का 11.5 प्रतिशत थी.. जो 2018-19 से थोड़ी बढ़ी है.. फाइनेंस कमीशन के अनुसार, 2006-07 से 2015-16 तक सब्सिडी का सीएजीआर 6.65 प्रतिशत था.. और पावर सेक्टर इसमें 50 प्रतिशत से ज्यादा था..



