BJP जॉइन करते ही घिरे Harbhajan Singh, घर के बाहर भारी विरोध, दीवार पर लिखा ‘गद्दार’ 

पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह के भाजपा में शामिल होते ही पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो गई है... उनके घर के बाहर विरोध प्रदर्शन हुए...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः पंजाब की राजनीति इन दिनों काफी उथल-पुथल भरे दौर से गुजर रही है.. आम आदमी पार्टी के कुछ राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद.. राज्य में सियासी माहौल गरमा गया है.. इस घटनाक्रम ने न केवल राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप को तेज कर दिया है.. बल्कि इसका असर सड़कों पर भी साफ दिखाई दे रहा है.. जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी खुलकर सामने आ रही है.. इसी कड़ी में पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन.. और दीवारों पर आपत्तिजनक नारे लिखे जाने की घटना ने इस विवाद को और अधिक गंभीर बना दिया है..

आपको बता दें कि हरभजन सिंह के भाजपा में शामिल होने के बाद उनके आवास के बाहर कुछ लोगों ने काले रंग से ‘पंजाब का गद्दार’ लिख दिया.. यह घटना सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि उस गुस्से का प्रतीक बन गई है.. जो आम आदमी पार्टी के समर्थकों और कुछ स्थानीय लोगों के मन में उभर रहा है.. इस दौरान आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन भी किया.. यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण था.. लेकिन इसमें शामिल लोगों के नारों और बैनरों से उनकी नाराजगी साफ झलक रही थी..

वहीं इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है.. जिसमें कुछ लोग स्प्रे पेंट से दीवार पर नारे लिखते नजर आ रहे हैं.. वीडियो में यह भी देखा गया कि मौके पर पुलिस मौजूद थी.. लेकिन उन्होंने हस्तक्षेप करने की कोई खास कोशिश नहीं की.. इससे प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं.. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है.. चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस वार्ता में उन्होंने पार्टी छोड़ने वाले सांसदों को ‘गद्दार’ करार दिया.. और उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने सिर्फ आम आदमी पार्टी ही नहीं, बल्कि पंजाब की जनता के विश्वास के साथ भी धोखा किया है..

आपको बता दें कि भगवंत मान ने कहा कि जिन लोगों को बिना संघर्ष के बड़े पद मिले.. उन्होंने निजी स्वार्थ के लिए पार्टी छोड़ दी.. उन्होंने यह भी कहा कि जनता ने आम आदमी पार्टी को भारी बहुमत देकर सत्ता में पहुंचाया था.. और ऐसे में पार्टी छोड़ना जनता के जनादेश का अपमान है.. मुख्यमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि.. भाजपा पंजाब में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत नहीं कर पा रही है.. इसलिए वह दलबदल की राजनीति कर रही है.. उन्होंने दावा किया कि भाजपा आम आदमी पार्टी को तोड़ने की कोशिश कर रही है.. और इसके लिए डर, लालच.. और दबाव जैसी रणनीतियों का इस्तेमाल कर रही है..

मान ने कहा कि यह सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं है.. बल्कि देशभर में भाजपा का यही तरीका रहा है.. और उन्होंने उदाहरण देते हुए पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों का जिक्र किया.. जहां क्षेत्रीय दलों को कमजोर करने के प्रयास किए गए.. भगवंत मान ने अपने बयान में ‘बेअदबी’ के मुद्दे को भी उठाया.. उन्होंने कहा कि पंजाब में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून लागू होने के बाद भाजपा असहज महसूस कर रही है.. उनका कहना था कि इस कानून के चलते भाजपा की राजनीतिक रणनीति प्रभावित हुई है.. इसलिए वह राज्य में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रही है..

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर भी आरोप लगाए.. उन्होंने कहा कि जब पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी.. तब केंद्र ने राज्य के ग्रामीण विकास के लिए मिलने वाली फंडिंग रोक दी.. उनके मुताबिक, यह कदम राजनीतिक द्वेष के कारण उठाया गया.. इसके अलावा उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कृषि कानूनों के मुद्दे पर पीछे हटना पड़ा था.. और इसके बाद से भाजपा पंजाब के प्रति नाराज है.. मान का आरोप है कि यही वजह है कि पार्टी राज्य में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रही है..

मुख्यमंत्री ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर व्यक्तिगत तौर पर भी निशाना साधा.. और उन्होंने कहा कि ये वे लोग हैं जिन्हें बिना जनता के बीच गए.. बिना चुनाव लड़े, बड़े पद मिल गए.. लेकिन जब जिम्मेदारी निभाने का समय आया.. तो उन्होंने निजी हितों को प्राथमिकता दी.. उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि विज्ञान ने बहुत प्रगति कर ली है.. लेकिन अभी तक ऐसी कोई मशीन नहीं बनी है.. जो नेताओं के मन की बात पढ़ सके.. इस बयान के जरिए उन्होंने नेताओं की नीयत पर सवाल उठाया.. भगवंत मान ने राघव चड्ढा पर भी तंज कसा.. उन्होंने कहा कि जो नेता आज पार्टी में घुटन महसूस करने की बात कर रहे हैं.. वे लंबे समय तक सत्ता का लाभ उठाते रहे.. उन्होंने आरोप लगाया कि इन नेताओं ने पंजाब की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करने के बजाय अपनी कुर्सी बचाने को प्राथमिकता दी..

 

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