बांदा में लू बनी ‘मौत का साया’: जनगणना ड्यूटी के दौरान महिला कर्मी सड़क पर गिरी, प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल
बांदा में 46 डिग्री की भीषण गर्मी और लू के बीच जनगणना ड्यूटी कर रही महिला कर्मी सरिता निर्मल सड़क पर बेहोश होकर गिर गईं। सहकर्मियों और समाजसेवी ने समय पर मदद कर उनकी जान बचाई, प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल उठे।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बांदा में पड़ रही भीषण गर्मी अब सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि जानलेवा साबित होने लगी है। बुंदेलखंड के तापमान ने इस समय 46 डिग्री का आंकड़ा पार कर लिया है और लगातार चल रही लू ने हालात और भी गंभीर बना दिए हैं। इसी बीच जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य के दौरान एक महिला कर्मी के बेहोश होकर गिरने की घटना ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनगणना कार्य में लगी अनुदेशिका एवं प्रगणक सरिता निर्मल शनिवार को फील्ड ड्यूटी के दौरान अचानक सड़क पर गिर पड़ीं। लगातार तेज धूप और लू के बीच घंटों काम करने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गईं।
46 डिग्री की तपिश में फील्ड ड्यूटी बनी चुनौती
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सरिता निर्मल सुबह से ही घर-घर जाकर जनगणना का कार्य कर रही थीं। तपती सड़कों और झुलसाती धूप के बीच लगातार काम करने से उनकी हालत बिगड़ती चली गई। अचानक चक्कर आने के बाद वह सड़क पर गिर पड़ीं, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और सहकर्मियों ने तुरंत उन्हें संभाला और प्राथमिक उपचार दिया।
सहकर्मियों और समाजसेवियों ने बचाई जान
घटना के समय मौके पर मौजूद सहकर्मी ज्योति अवस्थी और समाजसेवी “ऑक्सीजन बाबा” रामकृष्ण अवस्थी ने तुरंत मदद पहुंचाई। पानी पिलाकर और प्राथमिक उपचार देकर महिला कर्मी की स्थिति को संभाला गया। समय पर मिली सहायता से एक बड़ा हादसा टल गया।
सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल
इस घटना ने प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मौसम विभाग पहले ही हीट वेव को लेकर अलर्ट जारी कर चुका है, इसके बावजूद फील्ड में काम कर रहे कर्मचारियों के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं दिख रहे हैं। स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों में प्रमुख बिंदु हैं-
- न ठंडे पानी की व्यवस्था
- न मेडिकल टीम की मौजूदगी
- न विश्राम स्थल की सुविधा
- न ही हीट स्ट्रोक से बचाव के पर्याप्त इंतजाम
ऐसे में कर्मचारी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं।
कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर उठी मांग
घटना के बाद स्थानीय लोगों और कर्मचारियों ने मांग की है कि भीषण गर्मी के दौरान फील्ड ड्यूटी का समय बदला जाए और आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएं। साथ ही हर टीम के साथ मेडिकल सपोर्ट और राहत व्यवस्था अनिवार्य की जाए।
चेतावनी बनती घटनाएं
यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि अगर समय रहते व्यवस्था नहीं बदली गई तो भविष्य में ऐसे मामलों में गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल, सरिता निर्मल की स्थिति स्थिर बताई जा रही है, लेकिन यह घटना पूरे प्रशासन के लिए एक बड़ा सबक छोड़ गई है कि काम के साथ-साथ सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
रिपोर्ट – इक़बाल खान
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