10 साल में सबसे ज्यादा बाबा साहब की मूर्तियां टूटीं, अब चुनाव से पहले दिखावा?
आज अम्बेडकर जयंती के मौके पर जहां लोग उन्हें सम्मानपूर्वक श्रद्धांजलि दे रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ उन्हें लेकर कई तरह की बातें भी सामने आ रही हैं जिसपर सियासी पारा हाई है.

4pm न्यूज नेटवर्क: आज अम्बेडकर जयंती के मौके पर जहां लोग उन्हें सम्मानपूर्वक श्रद्धांजलि दे रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ उन्हें लेकर कई तरह की बातें भी सामने आ रही हैं जिसपर सियासी पारा हाई है.
दरअसल आज जयंती के मौके पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बड़ा मुद्दा उठाते हुए बीजेपी पर आरोप लगाया है कि उनकी पार्टी बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के प्रति सच्चा प्यार नहीं रखती। उन्होंने कहा कि बीजेपी की 10 साल की सरकार में सबसे ज्यादा अम्बेडकर की प्रतिमाएं तोड़ी गईं। अब चुनाव के पहले बजट देकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश हो रही है। जनता को सावधान रहना चाहिए।
अखिलेश यादव ने BJP की बाबा साहब अम्बेडकर से नकली मोहब्बत को साफ-साफ उजागर कर दिया है। BJP कहती है कि वो बाबा साहब का सम्मान करती है, लेकिन 10 साल की अपनी सरकार में सबसे ज्यादा अम्बेडकर की प्रतिमाएं तोड़ी गईं। उत्तर प्रदेश में BJP की सरकार चल रही है, फिर भी हर महीने अम्बेडकर जी की मूर्तियां तोड़ने की खबर आती रहती है। मेरठ, इलाहाबाद, गाजियाबाद, गोंडा जैसे जगहों पर सिर काटे गए, हाथ तोड़े गए।
जनता देख रही है कि ये सब किसके इशारे पर हो रहा है।BJP वाले कहते हैं कि वे बाबा साहब को अपना आदर्श मानते हैं। लेकिन हकीकत कुछ और है। जब दलित समाज की प्रतिमाएं टूटती हैं तो पुलिस सिर्फ रिपोर्ट लिखती है, असली अपराधी पकड़े ही नहीं जाते। 2018 से लेकर 2026 तक UP में दर्जनों मामले सामने आए। कुछ जगहों पर तो नई प्रतिमा लगाने के नाम पर BJP सरकार ने बाबा साहब को भगवा रंग का कपड़ा पहना दिया। ये क्या सम्मान है? असली सम्मान तो उनकी सोच को मानना है, न कि मूर्ति को रंग बदलकर अपना बनाने की कोशिश।
अब चुनाव नजदीक हैं तो BJP अचानक बजट निकाल रही है। बाबा साहब के नाम पर कुछ योजनाएं चला रही है। लेकिन ये सब दिखावा है। 10 साल में दलितों पर अत्याचार बढ़े, रोजगार नहीं मिला, शिक्षा महंगी हो गई। अम्बेडकर जी ने समानता और न्याय की बात की थी। BJP ने तो आरक्षण पर सवाल उठाए, संविधान बदलने की बातें कीं। जनता अब इन खोखले वादों से थक चुकी है।
BJP की 10 साल की सरकार में दलित समाज को सिर्फ वोट बैंक समझा गया। जब प्रतिमाएं टूटती हैं तो कहते हैं “अज्ञात व्यक्ति” ने किया। लेकिन असली बात ये है कि दलितों को डराने की साजिश चल रही है। अखिलेश जी ठीक कहते हैं कि जनता अब सतर्क हो गई है। प्रतिमा तोड़ने वाले कभी भी अम्बेडकर जी के सच्चे भक्त नहीं हो सकते। BJP को लगता है कि बजट बांटकर दलित वोट ले लेंगे, लेकिन जनता अब समझदार हो गई है।
BJP सरकार में अम्बेडकर प्रतिमा तोड़ने वाले अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं। कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती। विपक्षी पार्टियां जब आवाज उठाती हैं तो BJP उन्हें राजनीति करने का आरोप लगाती है। लेकिन सवाल ये है कि 10 साल में इतनी मूर्तियां क्यों टूटीं? पहले की सरकारों में भी कुछ मामले थे, लेकिन BJP के राज में ये संख्या बहुत बढ़ गई। UP, हरियाणा, राजस्थान जैसे BJP शासित राज्यों में बार-बार ये घटनाएं हो रही हैं।
अब चुनाव से पहले BJP अचानक बाबा साहब की याद में बजट दे रही है। लेकिन असली मुद्दे – बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य – पर चुप्पी साधे बैठी है। दलित युवा बेरोजगार हैं, किसान परेशान हैं। अम्बेडकर जी का सपना था कि सबको बराबरी मिले। BJP ने तो समाज को बांटने का काम किया।जनता अब समझ चुकी है। प्रतिमा तोड़ने वालों से सावधान रहना है। अखिलेश यादव की बात सही है – BJP का प्रेम खोखला है। असली सम्मान तभी होगा जब दलित समाज को न्याय मिलेगा, न कि सिर्फ फोटो और बजट में। 2027 के चुनाव में जनता इन सब बातों को याद रखेगी। BJP को अब दलितों को गुमराह नहीं कर पाएगी।



