सीतापुर में आठवीं मोहर्रम का ऐतिहासिक जुलूस, हजारों लोगों की उमड़ी भीड़
सीतापुर के बाँसुरा गांव में आठवीं मोहर्रम पर ऐतिहासिक हज़रत अब्बास का जुलूस निकाला गया। हजारों अकीदतमंदों ने नौहाख्वानी और मातम में हिस्सा लिया। सुरक्षा के बीच आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मोहर्रम का महीना इस्लामी इतिहास की उन कुर्बानियों की याद दिलाता है, जिन्होंने इंसाफ, सच्चाई और इंसानियत की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। इसी सिलसिले में सीतापुर जिले के रामपुर मथुरा थाना क्षेत्र स्थित बाँसुरा गांव में आठवीं मोहर्रम के मौके पर ऐतिहासिक हज़रत अब्बास अ.स. का जुलूस पारंपरिक तरीके से निकाला गया। जुलूस में हजारों की संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए और ग़म-ए-कर्बला को याद करते हुए मातम और नौहाख्वानी की। पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे और प्रशासनिक अधिकारी लगातार व्यवस्था पर नजर बनाए हुए थे।
मजलिस में बयान हुई करबला की कुर्बानियां
आठवीं मोहर्रम के अवसर पर मरहूम मुन्ना मियां के इमामबाड़े में विशेष मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना इमरान हुसैन ने करबला के 72 शहीदों की कुर्बानियों का जिक्र किया और हज़रत इमाम हुसैन अ.स. तथा उनके साथियों की शहादत के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने हज़रत अब्बास अ.स. की बहादुरी और वफादारी का उल्लेख करते हुए बताया कि किस तरह उन्होंने प्यासे बच्चों के लिए नहर-ए-फुरात से पानी लाने का प्रयास किया और इसी दौरान शहादत का दर्जा प्राप्त किया।
अलम, ताबूत और मेंहदी के साथ निकला जुलूस
मजलिस के बाद तबर्रुक वितरित किया गया और फिर अलम, ताबूत, मेंहदी तथा ढोल के साथ जुलूस की शुरुआत हुई। जुलूस अपने परंपरागत मार्गों से गुजरते हुए मियां मोहल्ला, पक्के तालाब और मुख्य बाजार क्षेत्रों से होकर निकला। रास्ते भर विभिन्न अंजुमनों द्वारा नौहाख्वानी और मातमजनी की गई। अकीदतमंदों ने ग़म-ए-कर्बला को याद करते हुए श्रद्धा और सम्मान के साथ अपनी अकीदत पेश की।
चार घंटे बाद सकुशल संपन्न हुआ जुलूस
करीब चार घंटे तक चले इस ऐतिहासिक जुलूस का समापन पुनः इमामबाड़े पहुंचकर हुआ। पूरे कार्यक्रम के दौरान पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे, जिससे आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सका। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह जुलूस क्षेत्र की पुरानी धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है और हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं।
भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का संदेश
मोहर्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि त्याग, बलिदान, धैर्य और इंसाफ के लिए संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। बाँसुरा गांव में निकला यह जुलूस सामाजिक एकता और भाईचारे का भी संदेश देता नजर आया। आयोजन में रज्जु मियां, बब्बू मियां, शानू वकील, शब्लू वकील, शावेज़, वली, उर्फी, फैज़ी, ज़ाहिद अली, मुन्ना सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और अकीदतमंद मौजूद रहे।
रिपोर्ट- वली चौधरी
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