लखनऊ-रुड़की में कांवड़ियों का बवाल, पुलिस पर हमला और पथराव से मचा हड़कंप
कांवड़ यात्रा के दौरान मेरठ, लखनऊ, गाजियाबाद और रुड़की में मारपीट, पथराव और तोड़फोड़ की कई घटनाएं सामने आई हैं. लखनऊ में तो बच्चों की स्कूल वैन पर कांवड़ियों ने पथराव कर दिया.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: कांवड़ यात्रा के दौरान मेरठ, लखनऊ, गाजियाबाद और रुड़की में मारपीट, पथराव और तोड़फोड़ की कई घटनाएं सामने आई हैं. लखनऊ में तो बच्चों की स्कूल वैन पर कांवड़ियों ने पथराव कर दिया.
सावन के महीने में चल रही कांवड़ यात्रा के बीच उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई शहरों से हंगामे और हिंसा की तस्वीरें सामने आई हैं. मेरठ, लखनऊ, गाजियाबाद और रुड़की में अलग-अलग घटनाओं में मारपीट, पथराव और तोड़फोड़ की खबरें सामने आई हैं.
इन घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहे हैं. घटनाओं के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और कई जगह सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है, लेकिन इन सबके बीच एक सवाल है कि कांवड़ यात्रा के दौरान तोड़फोड़ क्यों, हर बार कांवड़ यात्रा में क्यों ऐसी तस्वीरें देखने को मिलती हैं?
मेरठ में पुलिसकर्मियों से मारपीट
सबसे बड़ी घटना उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में सामने आई. यहां दौराला थाना क्षेत्र में कुछ कांवड़ियों और पुलिसकर्मियों के बीच विवाद हो गया. पुलिस के अनुसार, हरिद्वार से जल लेकर लौट रहे दो कांवड़ियों के बीच पहले आपस में टक्कर हुई थी. इसी दौरान एक बाइक सवार पर टक्कर मारने का आरोप लगाया गया. सूचना मिलने पर दो पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में सरकारी जीप से मौके पर पहुंचे.
बताया जा रहा है कि आरोपी के मौके से चले जाने के बाद कुछ कांवड़ियों का गुस्सा पुलिस पर फूट पड़ा. आरोप है कि उन्होंने दोनों पुलिसकर्मियों को जीप से बाहर निकालकर मारपीट की. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है.
लखनऊ में स्कूल वैन पर पथराव
वहीं राजधानी लखनऊ में भी कांवड़ यात्रा के दौरान हंगामे की घटना सामने आई. चरक चौराहे के पास बच्चों से भरी एक स्कूल वैन पर कुछ लोगों ने पथराव कर दिया. पथराव में वैन के शीशे टूट गए और वाहन में बैठे बच्चे घबरा गए. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बच्चे डर के कारण रोने लगे और अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
घटना के दौरान वैन चालक भी वहां से निकल गया. कुछ समय तक सड़क पर हंगामा चलता रहा. बाद में आसपास के लोग और पुलिस मौके पर पहुंची, जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई. पुलिस मामले की जांच कर रही है. घटना में शामिल लोगों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं.
गाजियाबाद में 50 मिनट फंसी रही एंबुलेंस
वहीं गाजियाबाद में दिल्ली-मेरठ मार्ग पर रेलवे रोड के सामने सोमवार सुबह एक एंबुलेंस ने पीछे से कांवड़ियों की ट्रॉली को टक्कर मार दी, जिससे कांवड़ क्षतिग्रस्त हो गई. घटना से नाराज कांवड़ियों ने एंबुलेंस चालक की पिटाई कर दी और सड़क पर जमकर हंगामा किया. हंगामे के कारण दिल्ली-मेरठ मार्ग पर करीब 50 मिनट तक लंबा जाम लगा रहा, जिसमें मरीज को ले जा रही वही एंबुलेंस भी फंस गई. देखते ही देखते सड़क पर लगभग एक किलोमीटर लंबी वाहनों की कतार लग गई.
रुड़की में कार में तोड़फोड़
उत्तराखंड के रुड़की में भी कांवड़ यात्रा के दौरान विवाद हो गया. हरिद्वार से लौट रहे कांवड़ियों की एक कार से टक्कर हो गई, जिससे एक कांवड़ क्षतिग्रस्त हो गई. कुछ कांवड़ियों ने गुस्से में कार में तोड़फोड़ शुरू कर दी. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात पर काबू पाया. पुलिस ने बताया कि जिस कार से टक्कर हुई, उसमें भी कांवड़िए ही सवार थे. फिलहाल पूरे मामले की जांच की जा रही है.
वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
इन चारों घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. वीडियो में कुछ लोगों को सड़क पर हंगामा, मारपीट और तोड़फोड़ करते हुए देखा जा सकता है. हालांकि पुलिस का कहना है कि हर मामले की अलग-अलग जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर ही कार्रवाई होगी.
पुलिस ने शुरू की जांच
गाजियाबाद मेरठ, लखनऊ और रुड़की पुलिस ने संबंधित मामलों में जांच शुरू कर दी है. वायरल वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर घटनाओं में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा पर उठे सवाल
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. धार्मिक यात्रा के दौरान यदि किसी कारण से विवाद होता भी है तो उसे कानून के दायरे में रहकर सुलझाया जाना चाहिए. सड़क पर मारपीट, पथराव और तोड़फोड़ जैसी घटनाएं न केवल आम लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बनती हैं, बल्कि यात्रा की पवित्रता पर भी सवाल खड़े करती हैं.



