न्यायिक आदेश के बिना कैसे छूटा स्क्रैप माफिया रवि काना? जेल प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

गौतमबुद्ध नगर से स्क्रैप माफिया रवि काना की जेल से 'अवैध रिहाई' ने हड़कंप मचा दिया है. बिना किसी न्यायिक आदेश के रिहा किए जाने पर नोएडा कोर्ट ने बांदा जेल अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. रवि काना 2024 के गैंगस्टर एक्ट मामले में वांछित है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिले के चर्चित स्क्रैप माफिया रवि नागर उर्फ रवि काना को बीते दिनों जेल से रिहा कर दिया गया, जिसके बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया।

हैरानी की बात यह है कि न तो किसी न्यायालय ने उसकी रिहाई का आदेश दिया था और न ही उसे किसी मामले में बरी किया गया है। इसी गंभीर लापरवाही को लेकर नोएडा कोर्ट ने बांदा जेल के अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण तलब किया है। माफिया और गैंगस्टर रवि नागर उर्फ रवि काना पर 2024 के गैंगस्टर एक्ट मामले में गिरफ्तारी हुई थी. अब पुलिस उसकी तलाश में जुट गई है. इस मामले में जेल प्रशासन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

कोर्ट ने जारी किया नोटिस
शुक्रवार 30 जनवरी को कोर्ट को जैसे ही रवि काना के रिहा होने की खबर मिली. वैसे ही ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की तरफ बांदा जेल सुपरिटेंडेंट को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.CJM संजीव कुमार त्रिपाठी ने बांदा जेल सुपरिटेंडेंट से पूछा, “आपने आरोपी को, जो दूसरे मामले में आपकी जेल में बंद था, कोर्ट के किसी नोटिस के बिना किन परिस्थितियों में और किस आधार पर रिहा किया था? कोर्ट ने यह भी पूछा कि हिरासत से आरोपी के भगाने” के लिए अधिकारी के खिलाफ मामला क्यों दर्ज नहीं किया जाना चाहिए?

पहले पेशी और फिर कर दिया रिहा
काना अपने खिलाफ दूसरे मामलों के सिलसिले में गौतम बुद्ध नगर की जेल में था. प्रशासनिक कारणों से अगस्त 2024 में उसे बांदा ट्रांसफर कर दिया गया था. हालांकि, काना को गुरुवार को बांदा जेल से वीडियो लिंक के जरिए पेश किया गया. शाम को उसे रिहा कर दिया गया. नोएडा कोर्ट को भेजे गए एक पत्र में जेल सुपरिटेंडेंट ने बताया कि पुलिस गार्ड उपलब्ध न होने के कारण, काना को वीडियो लिंक के जरिए पेश करना पड़ा था.

जेल ने रिहा करने के पीछे की क्या वजह बताई?
जेलर ने बताया कि विचाराधीन कैदी के लिए जेल में मौजूद सभी कस्टडी वारंट के लिए रिहाई के आदेश मिल गए थे. मतलब काना को दूसरे मामलों में जमानत मिल गई थी. कैदी 29 जनवरी, 2026 तक सिर्फ B वारंट के तहत हिरासत में था. जब उसे VC के जरिए पेश किया गया, तो कस्टडी वारंट/अगली पेशी की तारीख न मिलने के कारण उसे जेल में हिरासत में रखना संभव नहीं था.

चूंकि कस्टडी वारंट या संबंधित मामले की अगली सुनवाई की तारीख के बारे में किसी भी माध्यम से कोई जानकारी
नहीं मिली थी. इसलिए विचाराधीन कैदी को 29 जनवरी को 18:39 बजे संबंधित B वारंट के बारे में सूचित करने के
बाद इस जेल से रिहा कर दिया गया.

कोर्ट ने खारिज किए जेलर के तर्क
कोर्ट ने जेल प्रशासन के तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया. कोर्ट ने जेल अधीक्षक से पूछा कि जब आरोपी B-वारंट
पर तलब था और उसी दिन रिमांड पर सुनवाई चल रही थी, तो किस आधार पर उसे रिहा किया गया? अदालत ने
चेतावनी दी है कि क्यों न इस कृत्य को अभियुक्त का कस्टडी से भागना मानते हुए जेल अधीक्षक के खिलाफ
मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए.

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