इसुदान गढ़वी के सत्याग्रह का असर, इन मांगों के आगे झुकी सरकार, SAUNI योजना से पानी छोड़ने का ऐलान

किसानों की पानी की मांग को लेकर इसुदान गढ़वी के सत्याग्रह के बाद सियासी हलचल तेज हुई... आंदोलन के बीच सरकार ने SAUNI योजना...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात में किसानों की मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है.. आम आदमी पार्टी के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष.. और किसान नेता इसुदान गढ़वी के नेतृत्व में किसानों द्वारा किए गए सत्याग्रह.. और किसानों की एकजुटता के दबाव का असर अब दिखाई देने लगा है.. किसानों के आंदोलन के बीच सरकार ने SAUNI योजना के तहत माछू-2 बांध से वांकानेर, जामनगर और पोरबंदर के जलाशयों में पानी छोड़ने की घोषणा की है..

किसानों की मांगों को आंशिक रूप से स्वीकार किया जाना इसुदान गढ़वी के सत्याग्रह.. और गुजरात के किसानों की एकता की बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है.. हालांकि, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे इसुदान गढ़वी ने साफ कर दिया है कि यह संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है.. किसानों की सभी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही गई है.. दरअसल, गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ सहित राज्य के कई इलाकों में इस साल बारिश की स्थिति को लेकर किसानों के बीच चिंता बनी हुई है.. कई क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम बारिश होने के कारण किसानों को खेती, पशुओं के चारे और पानी की उपलब्धता को लेकर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.. किसानों का कहना है कि अगर समय रहते सरकार ने जरूरी कदम नहीं उठाए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है..

इसी को देखते हुए किसानों की प्रमुख मांग है कि जिन इलाकों में बारिश कम हुई है.. उन्हें सूखा प्रभावित घोषित किया जाए.. इसके साथ ही SAUNI योजना के माध्यम से इन क्षेत्रों के जलाशयों में पर्याप्त पानी पहुंचाया जाए.. ताकि किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल सके.. और ग्रामीण इलाकों में पेयजल तथा पशुओं के लिए पानी की समस्या भी कम हो.. इन्हीं मांगों को लेकर इसुदान गढ़वी ने किसानों के साथ मिलकर सत्याग्रह शुरू किया.. आंदोलन के जरिए सरकार पर दबाव बनाया गया कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए.. और तत्काल राहत के लिए ठोस कदम उठाए जाएं..

आंदोलन की शुरुआत के साथ ही किसानों को अपनी पहली बड़ी कामयाबी मिल गई.. सरकार की ओर से SAUNI योजना के तहत कुछ जलाशयों में पानी छोड़ने की घोषणा की गई.. सरकार के इस फैसले के बाद किसानों और आंदोलनकारियों में उम्मीद जगी है कि उनकी बाकी मांगों पर भी सरकार जल्द सकारात्मक निर्णय ले सकती है.. इसुदान गढ़वी ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है.. उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पानी छोड़ने का फैसला किया है.. जिसका वे स्वागत करते हैं.. लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसानों की समस्याएं केवल पानी छोड़ने से खत्म नहीं होंगी..

इसुदान गढ़वी की मांग है कि जिन क्षेत्रों में बारिश बेहद कम हुई है.. उन इलाकों को तत्काल सूखा प्रभावित घोषित किया जाए.. उनका कहना है कि सरकार को केवल घोषणा करने के बजाय जमीन पर किसानों को राहत पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए.. उन्होंने सरकार से पर्याप्त चारे की व्यवस्था करने की भी मांग की है.. बारिश कम होने की स्थिति में खेती के साथ-साथ पशुपालकों के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती है.. चारे की कमी होने पर पशुपालकों को अपने मवेशियों के लिए चारा जुटाने में परेशानी होती है.. और इसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है..

इसलिए किसानों की मांग है कि सरकार प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में चारे की व्यवस्था करे.. ताकि किसानों और पशुपालकों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ न उठाना पड़े.. इसके अलावा इसुदान गढ़वी ने किसानों के बिजली बिल माफ करने की मांग भी उठाई है.. उनका कहना है कि जब किसान बारिश की कमी.. और पानी की समस्या से जूझ रहे हैं.. तब उनके सामने बिजली के बिल का अतिरिक्त आर्थिक दबाव भी है.. ऐसे में सरकार को किसानों को राहत देते हुए बिजली बिल माफ करने पर तत्काल फैसला लेना चाहिए..

किसानों का कहना है कि खेती पहले से ही कई चुनौतियों से घिरी हुई है.. मौसम की अनिश्चितता, बारिश की कमी, सिंचाई के लिए पानी की समस्या.. और बढ़ती लागत ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.. ऐसे में अगर सरकार की ओर से समय पर राहत नहीं दी गई तो इसका असर हजारों किसानों.. और उनके परिवारों पर पड़ सकता है.. SAUNI योजना को लेकर भी किसानों की उम्मीदें काफी ज्यादा हैं.. किसानों का मानना है कि जिन क्षेत्रों में पानी की कमी है.. वहां इस योजना के माध्यम से जलाशयों को भरा जा सकता है.. इससे न केवल सिंचाई की समस्या कम होगी.. बल्कि ग्रामीण इलाकों में पानी की उपलब्धता को लेकर भी राहत मिल सकती है..

यही वजह है कि किसान संगठन और आंदोलनकारी लगातार मांग कर रहे हैं कि कम बारिश वाले इलाकों में SAUNI योजना के तहत पानी पहुंचाने की प्रक्रिया को तेज किया जाए.. इसुदान गढ़वी ने यह भी संकेत दिया है कि सरकार द्वारा कुछ मांगों पर कदम उठाए जाने के बावजूद किसानों का संघर्ष समाप्त नहीं हुआ है.. उनका कहना है कि आंदोलन की यह पहली जीत है.. लेकिन अभी कई महत्वपूर्ण मांगें बाकी हैं..

 

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