AI समिट में मोदी सरकार की पिटवाई भद्द, अपना बताकर दिखाया चीनी रोबोट

अब तक कई बार ऐसा हुआ है जब मोदी सरकार की भद्द पिटी है। खुद को बड़ा दिखाने की इस कवायद में कई बार मोदी सरकार की न केवल देश बल्कि दुनियाभर में बेइज्जती होती रहती है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: अब तक कई बार ऐसा हुआ है जब मोदी सरकार की भद्द पिटी है। खुद को बड़ा दिखाने की इस कवायद में कई बार मोदी सरकार की न केवल देश बल्कि दुनियाभर में बेइज्जती होती रहती है। और सरकार में बैठे बीजेपी लीडर ऐसी बातों पर पर्दा डालते हुए नजर आते हैं।

इसी बीच एक ऐसी खबर पर सियासत गर्म है जो की यहाँ से लेकर चीन तक चर्चा में  बनी हुई है। दरअसल हम बात कर रहे हैं AI समिट की जिसने मोदी सरकार की भद्द पिटवाई, जहां भारत में बना बताकर  चीनी रोबोट दिखाया गया। इस मामले पर एक तरफ जहां खूब सारी सफाइयां पेश की जा रही हैं तो वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे लेकर मोदी सरकार पर हमलावर है।

16 फरवरी से शुरू हुए इस समिट में दुनियाभर के टेक दिग्गज शामिल हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले दिन इस समिट का उद्घाटन किया था। लेकिन दूसरे दिन 17 फरवरी को गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने कुछ ऐसा कर दिया कि दुनियाभर में भारत को शर्मिंदिगी का सामना करना पड़ा। जिसके बाद अब गलगोटिया यूनिवर्सिटी को एआई समिट से तुरंत अपना स्टॉल खाली करने को कह दिया गया है।

दरअसल ग्रेटर नोएडा में आयोजित AI Impact Summit 2026 के दौरान एक रोबोटिक डॉग को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की ओर से प्रदर्शित किए गए इस रोबोट को भारत में विकसित एआई तकनीक के रूप में पेश किया गया था। दावा किया गया कि यह यूनिवर्सिटी की ‘इन-हाउस’ डेवलप्ड टेक्नोलॉजी है। हालांकि सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद इस दावे पर सवाल उठने लगे और मामला तूल पकड़ गया। समिट के दौरान एक वीडियो सामने आया जिसमें यूनिवर्सिटी की एक प्रतिनिधि मीडिया से बातचीत करते हुए रोबोटिक डॉग के फीचर्स समझा रही थीं। वीडियो में रोबोट को “ओरियन” नाम दिया गया और कहा गया कि इसे यूनिवर्सिटी के ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ ने तैयार किया है। वीडियो वायरल होते ही कई टेक विशेषज्ञों और यूजर्स ने दावा किया कि यह रोबोट भारत में विकसित नहीं है, बल्कि चीन की कंपनी का मॉडल है। दावा किया गया है कि यह ‘Go2’ मॉडल बाजार में लगभग 2 से 3 लाख रुपये की कीमत में उपलब्ध है।

इसपर राजनेताओं की लगातार प्रतिक्रिया भी सामने आ रही है। इसी बीच राहुल गांधी ने ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ 2026 को सिर्फ पीआर यानी प्रचार का तमाशा बताया है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा ‘चीनी रोबोटिक डॉग’ को प्रदर्शित किए जाने के बाद हुए बवाल के बाद केंद्र सरकार पर यह आरोप लगाया। राहुल गांधी ने ‘X’ पर पोस्ट किया, “भारत की प्रतिभा और डेटा का इस्तेमाल करने के बजाय, एआई शिखर सम्मेलन अव्यवस्थित तरीके से पीआर का तमाशा बन गया है। भारतीय डेटा बिक्री के लिए उपलब्ध है और चीनी उत्पादों का प्रदर्शन किया जा रहा है।” वहीं कांग्रेस ने पोस्ट किया, “मोदी सरकार ने देश की छवि को अपूर्णीय क्षति पहुंचाई है, उन्होंने एआई को मजाक बनाकर रख दिया है। यह एक ऐसा सेक्टर है जिसमें हम अपनी डेटा पावर को देखते हुए विश्व के अगुवा बन सकते हैं।”

अपने आधिकारिक बयान में Galgotias University ने कहा कि वह रोबोडॉग बनाने का दावा नहीं कर रही है. संस्था का कहना था कि उसका उद्देश्य छात्रों के दिमाग को तैयार करना है, ताकि भविष्य में वे खुद ऐसी तकनीक डिजाइन और निर्माण कर सकें. यूनिवर्सिटी ने यह भी कहा कि वह समय-समय पर वैश्विक तकनीकों को कैंपस में लाती है, जिससे छात्रों को अत्याधुनिक इनोवेशन का अनुभव मिल सके. इसके बावजूद, सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने आरोप लगाया कि आयातित तकनीक को स्वदेशी के रूप में पेश किया गया. इस विवाद ने देखते ही देखते तूल पकड़ लिया और चर्चा का विषय बन गया. वहीं इस मामले को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए गलगोटिया विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नेहा सिंह ने क्या कुछ कहा आप इस वीडियो में देखिये-

वहीं सामने आई जानकारी के मुताबिक इस पूरे प्रकरण के बाद यूनिवर्सिटी को एआई समिट के एक्सपो स्पेस से हटने के निर्देश दिए। हालांकि इस पर अभी तक आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि मामला गंभीरता से लिया गया है. इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि टेक्नोलॉजी इवेंट्स में पारदर्शिता कितनी जरूरी है. खासकर जब बात एआई और रोबोटिक्स जैसी संवेदनशील तकनीकों की हो, तो उनकी उत्पत्ति और विकास को लेकर स्पष्ट जानकारी देना जरूरी हो जाता है. फिलहाल, एआई समिट जारी है, लेकिन इस विवाद ने कार्यक्रम की छवि पर असर डाला है. आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।  कुल मिलाकर यह मामला सामने आने के बाद न केवल यूनिवर्सिटी की बल्कि मोदी सरकार की भी भद्द पिटती हुई नजर आ रही है।

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