POK पर फिर आमने-सामने भारत-पाकिस्तान, चीन के साथ 1963 समझौते को भारत ने नकारा
भारत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अविभाज्य अंग हैं, और पाकिस्तान के साथ कोई वैध सीमा नहीं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: पाकिस्तान-चीन ने सीमा मामलों पर एक संयुक्त आयोग बनाया है, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है. भारत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अविभाज्य अंग हैं, और पाकिस्तान के साथ कोई वैध सीमा नहीं.
पाकिस्तान और चीन ने सीमा से जुड़े मामलों के लिए Boundary Joint Commission शुरू किया है, लेकिन भारत ने इस पूरी कवायद को सिरे से खारिज कर दिया है.
16 और 17 सितंबर को इस्लामाबाद में आयोग की पहली बैठक हुई. पाकिस्तान के मुताबिक, इसके जरिए सीमा प्रबंधन, संयुक्त सीमा सर्वे, सामान और लोगों की आवाजाही जैसे मुद्दों पर दोनों देश सहयोग करेंगे.भारत ने साफ कहा है कि पाकिस्तान और चीन के बीच ऐसी कोई सीमा नहीं है, जिसे भारत मान्यता देता हो.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि तथाकथित Joint Commission का कोई कानूनी आधार नहीं है. भारत के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे क्षेत्र भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं और पाकिस्तान को भारतीय क्षेत्र से जुड़े किसी भी इंतजाम में शामिल होने का अधिकार नहीं है.भारत ने खास तौर पर 1963 के चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को भी खारिज किया है. नई दिल्ली का कहना है कि इस समझौते को भारत ने कभी मान्यता नहीं दी और इसे अवैध तथा अमान्य मानता है.
भारतीय क्षेत्र की स्थिति बदलने की कोशिश स्वीकार नहीं
भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारतीय क्षेत्र की स्थिति बदलने या पाकिस्तान के कब्जे को वैध ठहराने वाली किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा. उधर पाकिस्तान ने भारत की आपत्ति को खारिज करते हुए 1963 के चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को वैध बताया है. पाकिस्तान का कहना है कि नया Boundary Joint Commission दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद सीमा प्रबंधन व्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए बनाया गया है.
यानी पाकिस्तान और चीन सीमा प्रबंधन के नाम पर नया तंत्र खड़ा कर रहे हैं, लेकिन भारत ने इसकी बुनियाद पर ही सवाल उठा दिया है. नई दिल्ली का संदेश साफ है, जिस जमीन को भारत अपना अभिन्न हिस्सा मानता है, उसके भविष्य या सीमा को लेकर पाकिस्तान और चीन के बीच कोई भी समझौता भारत को मंजूर नहीं है.



