समुद्र में बढ़ेगी भारत की मारक क्षमता, ब्रह्मोस से लैस होंगे 8 नए कॉर्वेट
भारतीय नौसेना का 40,000 करोड़ का नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट (NGC) प्रोजेक्ट को जल्द अंतिम मंजूरी मिल सकती है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भारतीय नौसेना का 40,000 करोड़ का नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट (NGC) प्रोजेक्ट को जल्द अंतिम मंजूरी मिल सकती है. इसमें 8 अत्याधुनिक युद्धपोत शामिल होंगे, जो ब्रह्मोस मिसाइल, उन्नत वायु रक्षा और पनडुब्बी रोधी क्षमताओं से लैस होंगे. ये कॉर्वेट भारत की समुद्री ताकत को हिंद महासागर में मजबूत करेंगे, जिससे नौसेना का आधुनिकीकरण होगा और देश की सुरक्षा बढ़ेगी.
भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत को नई धार देने वाला नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट (NGC) प्रोजेक्ट जल्द ही अंतिम मंजूरी की दहलीज पर पहुंच सकता है. करीब 40 हजार करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अब केवल कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की अंतिम स्वीकृति का इंतजार है, जो जल्द मिल सकती है.
सूत्रों के अनुसार, भारतीय नौसेना कुल 8 अत्याधुनिक नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट युद्धपोत चाहती है. इस परियोजना में सरकारी शिपबिल्डिंग कंपनी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनकर उभरी है और उसे 5 युद्धपोतों के निर्माण का ऑर्डर मिलने की संभावना है. वहीं बाकी 3 युद्धपोतों का निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) में किया जा सकता है.
छोटे आकार में बड़ी मारक क्षमता
इन नए युद्धपोतों को “डिस्ट्रिब्यूटेड लेथैलिटी” कॉन्सेप्ट पर विकसित किया जा रहा है. इसका मतलब है कि आकार में अपेक्षाकृत छोटे होने के बावजूद इनमें दुश्मन पर जबरदस्त हमला करने की क्षमता होगी. लगभग 3,500 टन वजनी ये कॉर्वेट 32 नॉट्स तक की अधिकतम गति से चल सकेंगे और बिना किसी बाहरी रसद सहायता के करीब 30 दिनों तक समुद्र में तैनात रह पाएंगे.
ब्रह्मोस और अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम से होंगे लैस
इन युद्धपोतों की सबसे बड़ी ताकत इनकी हथियार प्रणाली होगी. हर एक कॉर्वेट में 8 एक्सटेंडेड रेंज ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें तैनात की जाएंगी, जो लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम हैं. हवाई खतरों से सुरक्षा के लिए इनमें 16 से 32 वर्टिकल लॉन्च शॉर्ट रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइलें (VLS-SR SAM) होंगी. AK-630 क्लोज-इन वेपन सिस्टम लगाया जाएगा, जो मिसाइलों और दुश्मन के लड़ाकू विमानों को नष्ट करने में सक्षम होगा.ये युद्धपोत पनडुब्बियों के लिए भी बेहद घातक होंगी.
समुद्र के नीचे छिपे दुश्मनों से निपटने के लिए इन युद्धपोतों में एडवांस्ड हल-माउंटेड सोनार, एक्टिव टोव्ड ऐरे सोनार और ट्रिपल-ट्यूब टॉरपीडो लॉन्चर लगाए जाएंगे. इसके अलावा इन पर ALH ध्रुव या सी किंग जैसे मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर भी ऑपरेट किए जा सकेंगे, जिससे इनकी पनडुब्बी रोधी क्षमता और मजबूत होगी. इसमें अत्याधुनिक रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम लगा होगा.
नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट में ELM-2248 MF-STAR AESA रडार, VARUNA ESM और SHAKTI जैसे आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम तथा एडवांस टारगेट ट्रैकिंग सिस्टम लगाए जाएंगे. खास बात ये है कि ये तमाम तकनीकें युद्ध के दौरान दुश्मन के हथियारों और इलेक्ट्रॉनिक हमलों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी.
क्या होगी प्रोजेक्ट की टाइमलाइन?
अगर 2026 में CCS से इस परियोजना को मंजूरी मिल जाती है, तो इसी साल GRSE और गोवा शिपयार्ड के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर हो सकते हैं. इसके बाद 2027 में विस्तृत डिजाइन और स्टील कटिंग के साथ निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है.
सूत्रों के मुताबिक, पहला युद्धपोत 2028-29 तक लॉन्च किया जा सकता है, जबकि 2031-32 तक इसे भारतीय नौसेना में शामिल किया जा सकता है. बाकी सात युद्धपोत 2032 से 2036 के बीच चरणबद्ध तरीके से नौसेना को सौंपे जा सकते हैं.
हिंद महासागर में और मजबूत होगी भारत की ताकत
यह परियोजना भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी. ब्रह्मोस मिसाइलों, अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम और पनडुब्बी रोधी क्षमताओं से लैस ये युद्धपोत हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक बढ़त को और मजबूत करेंगे.



