हार के बाद बीजेपी में कोहराम उठी आत्म मंथन की मांग
क्या से क्या हो गया देखते-देखते?

- नितिन नबीन की सीट पर बीजेपी की हार ने बदल दिये पूरे देश के राजनीतिक समीकरण
- जब अध्यक्ष की सीट ही नहीं बची तो फिर क्या बचा?
- चार बार की विधायक के साथ कई नेताओं केबयान से तहलका व मुलाकात बाद माहौल गरमाया
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। उप-चुनाव में मिली हार के बाद बीजेपी में मातम का माहौल है और आत्म मंथन की मांग उठने लगी है। पीएम मोदी और बिहार के पूर्व सीएम नीतीश कुमार की आज हुई मुलाकात से बिहार समेत देश का राजनीतिक महौल गर्म है। सवाल बड़ा है उपचुनाव हारने के बाद क्या सत्ता की सबसे बड़ी चुनावी मशीन के भीतर कोई अलार्म बज चुका है? क्या यह महज चुनावी उतार चढ़ाव है या संगठन के भीतर दबी हुई बेचैनियों की पहली सार्वजनिक दस्तक? और उससे भी बड़ा सवाल जब पार्टी की वरिष्ठ नेता केंद्रीय नेतृत्व के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में से एक की सदस्य यशोधरा राजे सिंधिया सिर्फ चार शब्द लिखती हैं आत्म मंथन का समय है तो क्या यह एक सामान्य सलाह है या फिर एक ऐसा राजनीतिक संकेत जिसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा?
मध्य प्रदेश के दतिया में भाजपा की हार। बिहार के बांकीपुर में भाजपा को जन सुराज के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा। चुनावी राजनीति में हार जीत नई बात नहीं होती लेकिन राजनीति में कई बार हार से ज्यादा चर्चा उस हार के बाद आने वाली पहली प्रतिक्रिया की होती है। इस बार चर्चा का केंद्र बने हैं यशोधरा राजे सिंधिया के वे चार शब्द जिन्होंने राजनीतिक गलियारों में आत्ममंथन की बहस को हवा दे दी है। यह वही भारतीय जनता पार्टी है जिसने पिछले एक दशक में चुनावी जीत को अपनी सबसे बड़ी पहचान बनाया। लेकिन उपचुनाव के इन नतीजों ने विपक्ष को सरकार पर सवाल उठाने का मौका दिया है और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह चर्चा तेज हुई है कि क्या स्थानीय चुनावी रणनीति उम्मीदवार चयन और संगठनात्मक तालमेल की समीक्षा की जरूरत है।
यशोधरा राजे सिंधिया के आत्म-मंथन के बयान से राजनीतिक तूफान
मध्य प्रदेश में दतिया विधानसभा उपचुनाव और बिहार में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार के एक दिन बाद भाजपा की वरिष्ठ नेता यशोधरा राजे सिंधिया ने पार्टी के भीतर आत्म मंथन करने की बात कही है। यशोधरा राजे सिंधिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक छोटा लेकिन अहम संदेश पोस्ट किया है जिसमें उन्होंने आत्म मंथन का समय है लिखा है। हालांकि उन्होंने इस बारे में विस्तार से कुछ नहीं कहा लेकिन यह पोस्ट दोनों उपचुनावों में भाजपा को मिली हार के बाद आया है और इसने राजनीतिक दलों का ध्यान खींचा है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री नीतिश कुमार की आज सुबह पीएम मोदी से मुलाकात को भी बांकीपुर हार से देखा जा रहा है। बीजेपी की आतंरिक राजनीति गर्म है और कल तक हाशिये पर पड़े नेता आज केन्द्रीय नेतृत्तव पर सवाल उठाने को अतुर है।
नई राजनीतिक चर्चा शुरू
दतिया में कांग्रेस ने अपनी सीट बचा ली। बांकीपुर में प्रशांत किशोर की पार्टी ने पहली चुनावी जीत दर्ज कर नई राजनीतिक चर्चा शुरू कर दी। दोनों नतीजों के बाद भाजपा नेताओं ने लोकतांत्रिक जनादेश स्वीकार करने की बात कही लेकिन उसी बीच यशोधरा राजे सिंधिया का आत्म मंथन वाला संदेश सामने आया। यही वह क्षण है जिसने राजनीतिक बहस को नई दिशा दे दी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या पार्टी इन नतीजों को सामान्य उपचुनावी संदेश मानकर आगे बढ़ेगी या इन्हें संगठन और चुनावी रणनीति की समीक्षा का अवसर बनाएगी। क्योंकि भारतीय राजनीति में कई बार छोटे चुनाव बड़े संदेश दे जाते हैं। इतिहास गवाह है कि उपचुनावों के संकेतों को समय रहते समझने वाली पार्टियां आगे मजबूत हुई हैं जबकि उन्हें हल्के में लेने वाली पार्टियों को बाद के बड़े चुनावों में कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसलिए सवाल सिर्फ़ दो सीटों का नहीं है। सवाल उस संदेश का है जिसने भाजपा के भीतर आत्म मंथन शब्द को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। अब देखना यह होगा कि मंथन होगा तो उससे विष निकलेगा या फिर अमृत?
कांग्रेस को दतिया में पड़े अच्छे वोट
भारतीय निर्वाचन आयोग के अनुसार कांग्रेस ने मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट अपने पास बरकरार रखी उसके उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 6,0016 वोटों से हराया। घनश्याम सिंह को 66,757 वोट (42.39 प्रतिशत) मिले, जबकि तिवारी को 60,741 वोट (38.57 प्रतिशत) मिले। वोटों की गिनती के ज्यादातर समय कांग्रेस लगातार बढ़त बनाए रही। नौवें राउंड तक, सिंह ने 9,519 वोटों की बढ़त बना ली थी। हालांकि बाद के राउंड में भाजपा ने इस अंतर को कम किया, लेकिन वह कांग्रेस उम्मीदवार से आगे नहीं निकल पाई, जिन्होंने आखिरकार पार्टी के लिए यह सीट बरकरार रखी।




