दुनिया में बढ़ी भारत की ताकत, आर्मेनिया ने लिया बड़ा फैसला
भारत और आर्मेनिया के बीच रक्षा सहयोग नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है. आर्मेनिया अब भारत की मदद से अपने देश में गाइडेड पिनाका रॉकेट और 155 मिमी आर्टिलरी गोलों का स्थानीय उत्पादन करेगा.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भारत और आर्मेनिया के बीच रक्षा सहयोग नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है. आर्मेनिया अब भारत की मदद से अपने देश में गाइडेड पिनाका रॉकेट और 155 मिमी आर्टिलरी गोलों का स्थानीय उत्पादन करेगा. इस प्रोजेक्ट लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है.
‘मेक इन इंडिया’ के तहत बने हथियारों की मांग अब दुनिया भर में बढ़ रही है. इसी कड़ी में एक बड़ी रणनीतिक कामयाबी सामने आ रही है. भारत का बेहद भरोसेमंद दोस्त आर्मेनिया अब केवल भारतीय हथियार खरीद ही नहीं रहा, बल्कि वह अपने देश में ही भारत की मदद से गाइडेड पिनाका रॉकेट और 155 मिमी आर्टिलरी गोलों का स्थानीय उत्पादन (Local Production) करने की तैयारी में है. दोनों देशों के बीच इस महाप्रोजेक्ट को लेकर बातचीत का दौर शुरू हो चुका है.
आर्मेनिया DRDO द्वारा निर्मित पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL) सिस्टम को खरीदने वाला पहला विदेशी देश था. करीब 2,000 करोड़ रुपए के इस सौदे के बाद, अत्याधुनिक गाइडेड पिनाका रॉकेट की पहली खेप आर्मेनिया को सौंप दी गई है. लेकिन अब आर्मेनिया इस साझेदारी को केवल खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रखना चाहता.
क्यों आर्मेनिया उठा रहा है यह कदम?
पड़ोसी देश अजरबैजान के साथ जारी तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति को देखते हुए आर्मेनिया अपनी रक्षा तैयारियों को पुख्ता करना चाहता है. इस स्वदेशी उत्पादन के पीछे आर्मेनिया की दो मुख्य रणनीतियां हैं:
सप्लाई चेन की सुरक्षा: युद्ध या संकट के समय गोला-बारूद की सप्लाई में कोई रुकावट न आए. निर्भरता कम करना: आर्मेनिया अपने पुराने पारंपरिक सहयोगियों (जैसे रूस) पर निर्भरता घटाकर भारत जैसे नए और विश्वसनीय रणनीतिक साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करना चाहता है.
दोनों देशों के बीत बातचीत जारी
सूत्रों के मुताबिक भारतीय रक्षा कंपनियों और आर्मेनियाई अधिकारियों के बीच मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश मॉडल और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) की शर्तों पर गंभीर चर्चा चल रही है. यदि बातचीत सही रही तो इस साल के अंत तक दोनों देशों के बीच आधिकारिक तौर पर पहला प्रारंभिक एमओयू (MoU) साइन हो सकता है.
वहीं साल 2027 में उत्पादन इकाई (फैक्ट्री) के लिए जमीन का चयन, मशीनरी की स्थापना और ट्रायल असेंबली का काम शुरू होने की उम्मीद है. अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो अगले 2 से 3 सालों में आर्मेनिया की धरती पर गाइडेड पिनाका रॉकेट और 155mm गोलों का पूर्ण स्तर पर व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो जाएगा.
तीन बड़ी शर्तों पर निर्भर परियोजना
हालांकि, यह पूरी महत्वाकांक्षी परियोजना मुख्य रूप से तीन बड़ी शर्तों पर निर्भर करेगी. पहला यह कि भारत इस घातक गाइडेड मिसाइल तकनीक का कितना Technology Transfer करने को तैयार होता है. दूसरा, आर्मेनिया की सरकार इसके बुनियादी ढांचे के लिए कितना बड़ा निवेश करती है और तीसरा, काकेशस क्षेत्र की बदलती भू-राजनीतिक स्थिति क्या मोड़ लेती है. अगर यह बातचीत अंतिम समझौते का रूप लेती है, तो यह भारतीय रक्षा निर्यात के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी.



