केदारताल हादसे ने उजाड़ दिया परिवार, वर्तिका-दीपिका के भाई ने बयां किया दर्द

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित केदारताल ट्रेक पर हुए दर्दनाक हादसे में लखनऊ की रहने वाली दो सगी बहनों की जान चली गई।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित केदारताल ट्रेक पर हुए दर्दनाक हादसे में लखनऊ की रहने वाली दो सगी बहनों की जान चली गई।

भारी बर्फबारी और हिमस्खलन की चपेट में आने से वर्तिका वर्मा और दीपिका वर्मा की मौत हो गई। दोनों बहनों की मौत की खबर मिलते ही लखनऊ स्थित उनके परिवार में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

जानकारी के मुताबिक, उत्तरकाशी के केदारताल ट्रेक पर ट्रेकिंग के दौरान मौसम अचानक खराब हो गया था। इलाके में भारी बर्फबारी और हिमस्खलन के कारण कई ट्रेकर्स इसकी चपेट में आ गए। इस हादसे के बाद से ही कई लोग लापता थे। लापता ट्रेकर्स की तलाश के लिए लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा था।

बुधवार सुबह रेस्क्यू ऑपरेशन में मिले दोनों बहनों के शव

बुधवार सुबह उत्तरकाशी में चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान वर्तिका वर्मा और दीपिका वर्मा के शव बरामद किए गए। दोनों की पहचान होने के बाद परिवार को इसकी सूचना दी गई। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिजन दोनों बहनों के शव लेकर लखनऊ के लिए रवाना हो गए हैं।

परिजनों के मुताबिक, गुरुवार दोपहर करीब एक बजे दोनों के शव लखनऊ के गायत्रीपुरम स्थित घर पहुंचेंगे। इसके बाद परिवार और रिश्तेदारों की मौजूदगी में दोनों बहनों का अंतिम संस्कार किया जाएगा।

वर्तिका और दीपिका 27 अक्टूबर को 7 अन्य ट्रेकर्स और 5 सपोर्ट स्टाफ के साथ गंगोत्री से केदारताल के लिए निकली थीं. इस दल को 3 दिन का ट्रेक पूरा कर 29 अक्टूबर को वापस लौटना था. इसी बीच अचानक उत्तरकाशी के ऊंचे इलाकों में मौसम खराब हो गया. भारी बर्फबारी और हिमस्खलन की वजह से वापसी के रास्ते बंद हो गए और दल के सदस्य फंस गए.

30 अक्टूबर को कच्ची ढांग के पास फंसे सदस्यों ने ट्रेकिंग एजेंसी से मदद मांगी, जिसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ. 31 अक्टूबर को 4 सपोर्ट स्टाफ को सुरक्षित निकाला गया, जबकि बुधवार को दोनों बहनों समेत 3 और ट्रेकर्स के शव बरामद हुए.

दोनों बहनों को था पहाड़ों पर ट्रेकिंग का शौक, नोएडा और मुंबई में करती थीं काम

दोनों बहनों के पिता श्रीनारायण वर्मा कृषि विभाग से रिटायर्ड अधिकारी हैं और मूल रूप से बाराबंकी के सराय पांडेय के निवासी हैं.

वर्तिका नोएडा की एक निजी कंपनी में कार्यरत थीं और फ्रीलांस इन्फ्लुएंसर भी थीं. उन्हें कंपनी से मिले टूर पैकेज के तहत केदारताल ट्रेक पर जाने का मौका मिला था. दीपिका मुंबई की एक कंपनी में ग्राफिक्स डिजाइनर थीं और फिलहाल ‘वर्क फ्रॉम होम’ के चलते लखनऊ में रह रही थीं.

दोनों बहनों को ट्रेकिंग का गहरा जुनून था. वे भारत और नेपाल के कई कठिन ट्रेक पूरे कर चुकी थीं. दो महीने पहले ही वे फूलों की घाटी (Valley of Flowers) और हेमकुंड साहिब से लौटी थीं.

ट्रेकिंग एजेंसी पर लापरवाही के गंभीर आरोप, सोशल मीडिया से परिजनों को मिली खबर

भाई अतुल वर्मा ने आरोप लगाया कि दुर्घटना होने के बाद भी ट्रेकिंग एजेंसी ने परिजनों को कोई जानकारी नहीं दी. भाई और परिवार को सोशल मीडिया के जरिए इस हादसे की खबर मिली, जिसके बाद वे आनन-फानन में उत्तरकाशी पहुंचे.

परिजनों ने ट्रेकिंग एजेंसी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मौसम विभाग के अलर्ट और खराब मौसम के बावजूद रिस्की केदारताल ट्रेक की अनुमति क्यों दी गई. अगर समय पर परिजनों को सूचना मिल जाती, तो तुरंत रेस्क्यू में मदद जुटाई जा सकती थी.

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