खरगे-राहुल का दमदार भाषण, भरे मंच से मोदी को धो डाला

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूँ तो अक्सर बड़े-बड़े राजनीतिक मंचों पर खड़े होकर बयानबाजी करते हैं लेकिन वहीं दूसरी तरफ विपक्ष के सवालों से डरते हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूँ तो अक्सर बड़े-बड़े राजनीतिक मंचों पर खड़े होकर बयानबाजी करते हैं लेकिन वहीं दूसरी तरफ विपक्ष के सवालों से डरते हैं।

विपक्ष के सवालों के जवाब देने से पहले ही भाजपाई भाग खड़े होते हैं, जिसे लेकर पीएम मोदी समेत पूरी बीजेपी की सियासी गलियारों में खूब आलोचना होती है। पीएम मोदी पर अनेकों बार ऐसे आरोप लगे हैं कि वो सत्ता की लालच में इस कदर पड़े हैं कि उन्हें खुद के आगे किसी की नहीं पड़ी है। सड़क से लेकर सदन तक विपक्ष सवाल करता लेकिन मोदी मंडली है कि चुप्पी साधे रखती है या फिर सदन से चुप चाप निकल जाते हैं। अब तो आलम ये है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी तक को सवाल करने का मौका नहीं दिया जाता या फिर उनके सवालों के जवाब दिए बिना ही मोदी मंडली नौ दो ग्यारह हो जाती है।

इसी बीच  भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में कांग्रेस ने जवाहर चौक पर विशाल ‘किसान महाचौपाल’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों और कार्यकर्ताओं के जुटने का दावा किया गया। सागर से आई एक महिला कार्यकर्ता ‘इंडिया नॉट फॉर सेल’ लिखी टी-शर्ट पहनकर विरोध दर्ज कराती नजर आई। बता दें कि आयोजन के लिए करीब 50 हजार लोगों की क्षमता वाला डोम तैयार किया गया। जहां कई कांग्रेस नेताओं ने पहुंचकर बीजेपी को जमकर घेरा और आईना दिखाया। इसी दौरान भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में आयोजित किसान महाचौपाल में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली पर तीखे सवाल उठाए।

खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधते हुए उन्हें हिटलर जैसा तानाशाही रवैया अपनाने वाला प्रधानमंत्री बताया। खरगे ने कहा कि वे 54 वर्षों से विधायक, सांसद रहे हैं, लेकिन उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में ऐसा प्रधानमंत्री कभी नहीं देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर रही है और विपक्ष की आवाज दबाने का काम कर रही है। खरगे ने व्यंग्य करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का काम सिर्फ नाम बदलना रह है। योजनाओं, सड़कों और संस्थानों के नाम बदले जा रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मोदीजी खुद कांग्रेस शासनकाल में पैदा हुए, तो उन्हें अपना नाम भी बदल लेना चाहिए।

जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा, ‘पहली बार लोकसभा में नेता विपक्ष को बोलने नहीं दिया गया.  मुझे बोलने नहीं दिया गया.’ राहुल गांधी ने जनरल नरवणे की किताब का जिक्र किया और सीधे प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा. राहुल गांधी ने कहा, ‘किताब में नरवणे जी ने  साफ लिखा कि जब चीन के टैंक हिंदुस्तान की बाउंड्री के अंदर आ रहे थे तो उन्होंने राजनाथ सिंह जी को फोन किया और उनसे पूछा मेरा ऑर्डर क्या है?

राहुल ने कहा कि जब चीन को जवाब देने का वक्त आया तब पीएम मोदी गायब हो गए. यूएस-इंडिया ट्रेड डील का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा. ‘ हिंदुस्तान और अमेरिका का जो समझौता है वो चार महीने से रूका हुआ था.  क्यों रूका था, कृषि की वजह से. हिंदुस्तान की सरकार नहीं चाहती थी कि अमेरिका की बड़ी-बड़ी कंपनियां सोया, कपास, भुट्टा हिंदुस्तान में बेच पाएं, दाल हिंदुस्तान में बेच पाएं. यहां का कोई किसान, राजनेता नहीं चाहता और हिंदुस्तान की सरकार भी नहीं चाहती थी. चार महीने  चर्चा बंद पड़ी  थी.

कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री ब्लैकमेल हो रहे हैं। उनकी कमजोर नस अमेरिका में दबा रखी है। यदि वे 18 दिन और रुक जाते तो वहां के सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने वाला था। डील नहीं करने को सबने कहा था, लेकिन डील की। सरेआम हमारे देश के किसानों के हित बेच दिए हैं। छोटे-छोटे देश डोनाल्ड ट्रंप की आंखों में आंख डालकर बोले कि अमेरिका के साथ कोई डील नहीं करेंगे, लेकिन हमारे प्रधानमंत्री ने डील कर ली।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने पहले ही कहा था – “नरेंद्र सरेंडर।” यह जो ट्रेड डील हुई है, वह भारत और अमेरिका के बीच नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई समझौता है। अगर यह समझौता देश के हित में होता, तो किसानों और आम जनता को नुकसान नहीं होता। उन्होंने कहा कि जैसे किसान कानूनों के खिलाफ लंबी लड़ाई के बाद केंद्र सरकार को उन्हें वापस लेना पड़ा, उसी तरह इस मुद्दे पर भी सच्चाई सामने आएगी।

राहुल गांधी जो कहते हैं, वह सच साबित होता है। पटवारी ने राहुल गांधी का आभार जताते हुए कहा कि किसानों के इस अहम मुद्दे को उठाने के लिए उन्होंने मध्य प्रदेश को चुना। उन्होंने बताया कि 20 तारीख को राहुल गांधी ने खुद उनसे पूछा था कि क्या यह कार्यक्रम भोपाल में आयोजित किया जा सकता है। आज की भारी भीड़ इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस की ताकत और जनता का समर्थन कितना मजबूत है।

वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि इस समझौते से कपास, सोयाबीन और सरसों के दाम गिर रहे हैं, जिससे किसान संकट में हैं। इधर भाजपा ने आरोपों को निराधार बताया है। कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना ने राहुल गांधी के कृषि ज्ञान पर सवाल उठाए। विधायक घनश्याम चंद्रवंशी ने कहा कि कांग्रेस अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रही है। गौरतलब है कि जिस तरह से मोदी सरकार की कांग्रेस समेत हर वर्ग के लोग आलोचना कर रहे है इससे एक बात तो तय है कि यह सरकार ज्यादा दिन इसी तौर-तरीके से नहीं चलने वाली।

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