लखीमपुर: झोपड़ी में रहने वाले टॉपर के घर पहुंचे DM! खटिया पर बैठकर कही ऐसी बात, गांव में बन गया जश्न

लखीमपुर खीरी में झोपड़ी में रहने वाले यूपी बोर्ड इंटर 2026 के जिला टॉपर उमाशंकर से मिलने खुद डीएम अंजनी कुमार सिंह गांव पहुंचे। खटिया पर बैठकर बधाई दी, मिठाई खिलाई और इंजीनियर बनने के सपने को पूरा करने का भरोसा दिलाया।

4पीएम न्यूज नेटवर्कः कभी-कभी एक खबर सिर्फ परीक्षा के अंकों की नहीं होती, बल्कि उस संघर्ष की होती है जो उन अंकों तक पहुंचने के पीछे खड़ा होता है। लखीमपुर खीरी में ऐसा ही एक दृश्य देखने को मिला, जब यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में 93.60 प्रतिशत अंक हासिल कर जिला टॉपर बने उमाशंकर के घर खुद जिलाधिकारी पहुंचे।

घाघरा नदी के किनारे स्थित एक कच्ची झोपड़ी, छप्पर की छांव, खटिया पर बैठा जिला प्रशासन का मुखिया और सामने बैठा एक संघर्षशील छात्र, यह दृश्य किसी सरकारी औपचारिकता से ज्यादा उम्मीद और संवेदना की तस्वीर बन गया।अंजनी कुमार सिंह ने करीब 60 किलोमीटर का सफर तय कर गांव रामनगर बगहा पहुंचकर न सिर्फ छात्र को बधाई दी, बल्कि उसके सपनों को भी अपना समर्थन दिया।

गरीबी के बीच मेहनत से बना जिला टॉपर

उमाशंकर ने यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में 93.60 प्रतिशत अंक हासिल कर जिला टॉप किया। सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और यह साबित कर दिया कि सफलता सुविधाओं की मोहताज नहीं होती। उनका घर एक साधारण झोपड़ी है, लेकिन सपने असाधारण हैं। यही कारण है कि उनकी सफलता ने पूरे जिले का ध्यान अपनी ओर खींचा।

जब DM खुद पहुंचे गांव

जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित रामनगर बगहा गांव में जैसे ही प्रशासनिक काफिला पहुंचा, ग्रामीण हैरान रह गए। किसी ने सोचा भी नहीं था कि जिलाधिकारी खुद एक छात्र को बधाई देने उसके घर आएंगे। सबसे भावुक क्षण तब आया, जब डीएम छप्पर की छांव में खटिया पर बैठ गए। उन्होंने उमाशंकर को अपने पास बैठाया और पूरी आत्मीयता के साथ बातचीत की। यह मुलाकात केवल औपचारिक बधाई नहीं थी, बल्कि एक ऐसे छात्र के संघर्ष को सम्मान देने का प्रयास थी, जिसने हालात से हार मानने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बना लिया।

कविता, गजल और सपनों की बात

बातचीत के दौरान उमाशंकर ने अपनी लिखी कविताओं और गजलों की कॉपी डीएम को दिखाई। पन्नों पर लिखी सादगी और संवेदनशीलता को पढ़कर डीएम मुस्कुराए। उन्होंने कहा, “तुम्हारे शब्दों में मेहनत की खुशबू है।” यह वाक्य वहां मौजूद हर व्यक्ति के लिए यादगार बन गया। पढ़ाई के साथ साहित्य के प्रति उमाशंकर की रुचि ने डीएम को भी प्रभावित किया।

इंजीनियर बनने का सपना, प्रशासन ने दिया साथ

डीएम ने जब उमाशंकर से पूछा कि आगे क्या बनना चाहते हो, तो उन्होंने बिना झिझक कहा—“मैं इंजीनियर बनना चाहता हूं।” इस पर डीएम ने जवाब दिया, “अब यह सपना सिर्फ तुम्हारा नहीं, हमारा भी है।” उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रशासन उसकी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में हरसंभव मदद करेगा। यह आश्वासन सिर्फ एक छात्र के लिए नहीं, बल्कि उन तमाम युवाओं के लिए संदेश था जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं।

माला पहनाई, मिठाई खिलाई, परिवार को सराहा

डीएम ने उमाशंकर को माला पहनाई, मिठाई खिलाई और उपहार देकर सम्मानित किया। उन्होंने उसके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद भी दिया। साथ ही माता-पिता से लंबी बातचीत कर उनके संघर्ष और त्याग को नमन किया। उन्होंने कहा कि ऐसे परिवार ही बच्चों को ऊंचाइयों तक पहुंचाने की असली ताकत होते हैं।

गांव में बन गया उत्सव जैसा माहौल

डीएम के पहुंचते ही गांव में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई इस पल का गवाह बनना चाहता था। ग्रामीणों की आंखों में गर्व साफ दिखाई दे रहा था। एक ग्रामीण ने कहा, “आज लगा कि मेहनत सच में पहचानी जाती है।” झोपड़ी के आंगन में खड़ा यह दृश्य सिर्फ एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि यह विश्वास था कि प्रतिभा अगर सच्ची हो, तो व्यवस्था भी उसके दरवाजे तक पहुंचती है। इस दौरान एसडीएम शशि कांत मणि, डीआईओएस विनोद कुमार मिश्र, बीडीओ श्रद्धा गुप्ता सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। लखीमपुर खीरी की यह कहानी बताती है कि सपने बड़े होने चाहिए, चाहे घर छोटा ही क्यों न हो।

रिपोर्ट -अक्षय श्रीवास्तव

यह भी पढ़ें: ड्रमंडगंज घाटी हादसे के पीड़ित परिवारों से मिला सपा प्रतिनिधिमंडल, 25-25 लाख मुआवजे की मांग

Related Articles

Back to top button