गोवा में लखीमपुर के लाल ने किया कमाल, 26 देशों के खिलाड़ियों को पछाड़कर जीता गोल्ड

लखीमपुर खीरी के ताइक्वांडो खिलाड़ी स्वरित तिवारी ने गोवा में आयोजित 9वीं एशिया कप ओपन इंटरनेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप 2026 में 58 किग्रा सीनियर वर्ग का स्वर्ण पदक जीतकर देश और जिले का नाम रोशन किया।

4पीएम न्यूज नेटवर्क:  उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के लिए गर्व की खबर सामने आई है। जिले के होनहार ताइक्वांडो खिलाड़ी स्वरित तिवारी ने गोवा में आयोजित 9वीं एशिया कप ओपन इंटरनेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप-2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 58 किलोग्राम सीनियर वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत और अपने जिले का नाम रोशन किया है। 26 देशों के खिलाड़ियों के बीच हुए कड़े मुकाबलों में स्वरित ने अपने बेहतरीन खेल, तकनीकी कौशल और आत्मविश्वास के दम पर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उनकी इस उपलब्धि पर खेल प्रेमियों और जिलेवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

26 देशों के खिलाड़ियों के बीच दिखाया दम

यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता 28 जून 2026 को गोवा के पेड्डेम इंडोर स्टेडियम में आयोजित हुई। प्रतियोगिता में एशिया सहित 26 देशों के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। कड़े मुकाबलों के बीच स्वरित तिवारी ने हर चुनौती का डटकर सामना किया और शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया। उनकी जीत भारतीय खिलाड़ियों के लिए भी गौरव का क्षण मानी जा रही है।

वर्षों की मेहनत का मिला इनाम

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि स्वरित की यह सफलता एक दिन की उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्षों की कड़ी मेहनत, अनुशासन, नियमित अभ्यास और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।

जिले में खुशी का माहौल

स्वर्ण पदक जीतने की खबर मिलते ही लखीमपुर खीरी में खेल प्रेमियों, प्रशिक्षकों, शुभचिंतकों और स्थानीय लोगों ने स्वरित तिवारी को बधाई दी। उनकी इस उपलब्धि को जिले के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बताया जा रहा है। स्थानीय खेल प्रेमियों का कहना है कि स्वरित की सफलता से जिले में ताइक्वांडो जैसे खेलों को नई पहचान मिलेगी और युवा खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित होंगे।

युवाओं के लिए प्रेरणा बने स्वरित

अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर स्वरित तिवारी ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इच्छाशक्ति, लगातार अभ्यास और समर्पण के बल पर छोटे शहरों के खिलाड़ी भी विश्व मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकते हैं। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

रिपोर्ट – प्रभाकर श्रीवास्तव

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